सप्ताह के पहले कारोबारी दिन राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में सोने के भाव में हल्की मजबूती देखने को मिली। स्थानीय आभूषण विक्रेताओं और औद्योगिक लिवाली के बीच 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 200 रुपये की बढ़ोतरी के साथ 1,46,300 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई। इससे पिछले कारोबारी सत्र में, यानी शुक्रवार को सोना 1,46,100 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। दूसरी तरफ, औद्योगिक इकाइयों और सिक्का निर्माताओं की ओर से उठाव संतुलित रहने के कारण चांदी के भाव में कोई बदलाव नहीं हुआ। स्थानीय बाजार में चांदी 2,02,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर अपरिवर्तित रही। उल्लेखनीय है कि इस स्थिरता से पहले चांदी के भाव में लगातार तीन दिनों तक गिरावट का दौर देखा गया था।
कमजोर रुपये ने घरेलू स्तर पर सोने को दिया सहारा
घरेलू बाजार में सोने की तेजी को रुपये की कमजोरी से काफी बल मिला। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया लगातार तीसरे दिन दबाव में नजर आया। सत्र की समाप्ति पर रुपया 29 पैसे टूटकर 95.22 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। भारत अपनी सोने की कुल आवश्यकता का एक बड़ा हिस्सा विदेशों से मंगाता है, जिसका भुगतान अमेरिकी मुद्रा में किया जाता है। रुपये में आई इस गिरावट के चलते कारोबारियों के लिए सोने का आयात महंगा साबित हुआ, जिसने स्थानीय स्तर पर हाजिर कीमतों को गिरने से रोका और भाव को मजबूती दी।
वैश्विक बाजार के रुझान और बॉन्ड यील्ड में गिरावट
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुमूल्य धातुओं के रुख और मैक्रो संकेतकों ने भी बाजार को सहारा दिया। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के सीनियर एनालिस्ट (कमोडिटी) सौमिल गांधी ने कहा, "घरेलू बाजार में सोमवार को सोने की कीमतों में तेजी आई।" उन्होंने रेखांकित किया कि वैश्विक बाजारों में दर्ज किए गए मामूली सुधार के साथ कच्चे तेल की कमजोर कीमतों, स्थिर अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी बेंचमार्क सरकारी बॉन्ड पर यील्ड में आई गिरावट से कीमती धातुओं को अच्छा आधार मिला। विदेशी बाजारों में हाजिर सोना 17.49 डॉलर यानी 0.44 प्रतिशत की छलांग लगाकर 4013.12 डॉलर प्रति औंस पर दर्ज किया गया। वहीं वैश्विक स्तर पर चांदी की कीमत 53.91 डॉलर प्रति औंस पर टिकी रही।
भू-राजनीतिक खींचतान और अमेरिकी फेडरल रिजर्व पर नजरें
मध्य पूर्व के राजनीतिक समीकरणों का असर भी कीमती धातुओं के कारोबार पर साफ दिखाई दे रहा है। मिराए एसेट शेयरखान के कमोडिटी हेड प्रवीण सिंह ने बताया कि खाड़ी देश अमेरिका और ईरान के बीच राजनयिक स्तर की बातचीत को फिर से पटरी पर लाने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि इसके समानांतर अमेरिका भी ईरान के खिलाफ नए सैन्य विकल्पों के इस्तेमाल पर विचार कर रहा है। इसी भू-राजनीतिक असमंजस के बीच निवेशकों ने सुरक्षित परिसंपत्ति के रूप में सोने में दांव लगाया।
इधर एलकेपी सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट और रिसर्च एनालिस्ट (कमोडिटी और करेंसी) जतिन त्रिवेदी ने स्पष्ट किया कि आने वाले दिनों में बाजार की मुख्य दिशा अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसलों से तय होगी। उनके मुताबिक, निवेशक इस समय मुद्रास्फीति से जुड़ी चिंताओं, अमेरिकी चुनावों की अनिश्चितताओं और ब्याज दरों के भविष्य के रुख पर लगातार ध्यान दे रहे हैं। साथ ही बाजार भागीदार केविन वार्श के आगामी नीतिगत संकेतों के नफा-नुकसान को तौलने में जुटे हैं।



















