हर माता-पिता की यह गहरी इच्छा होती है कि उनकी बेटी का आने वाला कल पूरी तरह सुरक्षित रहे, ताकि उच्च शिक्षा या विवाह जैसे बड़े आयдоखों के समय उन्हें आर्थिक तंगी का सामना न करना पड़े। इसी बात को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और विभिन्न वित्तीय संस्थानों द्वारा बालिकाओं के लिए विशेष बचत योजनाएं संचालित की जाती हैं। इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य छोटी राशि की नियमित बचत के माध्यम से एक बड़ा वित्तीय फंड तैयार करना है, जो जरूरत के वक्त परिवार का संबल बन सके।
इसी कड़ी में देश के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की ओर से चलाई जाने वाली एसबीआई हर घर लखपति योजना निवेशकों का खासा ध्यान आकर्षित कर रही है। इस विशेष योजना में अनुशासित तरीके से निवेश करके तय समय सीमा के भीतर एकमुश्त बड़ी राशि जुटाई जा सकती है। यदि निवेशक सही रणनीति के साथ इसमें पैसा लगाएं, तो योजना की परिपक्वता यानी मैच्योरिटी पर लाखों रुपये का फंड प्राप्त किया जा सकता है। यही मुख्य वजह है कि तमाम परिवार अपनी बेटियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए इसे एक बेहतरीन वित्तीय विकल्प के रूप में अपना रहे हैं।
एसबीआई हर घर लखपति योजना की मुख्य विशेषताएं
यह स्टेट बैंक ऑफ इंडिया द्वारा पेश की गई एक अनूठी बचत योजना है, जिसके तहत आप प्रत्येक माह छोटी-सी राशि जमा करके अंत में एक लाख रुपये या उससे अधिक का फंड आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। इस योजना के तहत खाताधारक अपनी सुविधा के अनुसार तीन साल से लेकर दस साल तक की निवेश अवधि का चयन कर सकते हैं। इस खाते को कोई भी व्यक्ति अकेले यानी सिंगल या फिर दो लोगों के नाम से संयुक्त रूप से खुलवा सकता है। दस वर्ष से अधिक आयु के बच्चे भी स्वयं अपना यह खाता संचालित कर सकते हैं, बशर्ते वे हस्ताक्षर करने में सक्षम हों। वहीं, बहुत छोटे बच्चों के मामले में उनके माता-पिता या कानूनी अभिभावक द्वारा यह खाता खोला जाता है। आपकी हर महीने की किस्त की राशि आपके द्वारा चुनी गई कुल अवधि और वित्तीय लक्ष्य पर पूरी तरह निर्भर करती है।
इस योजना की एक खास बात यह भी है कि निवेशक चाहें तो कभी-कभी अपनी निर्धारित किस्त का आधा हिस्सा भी जमा कर सकते हैं। इसके अलावा, आने वाली किस्तों का भुगतान समय से पहले भी किया जा सकता है, हालांकि ऐसा करने से अंतिम मिलने वाली कुल राशि में कोई बढ़ोतरी नहीं होती है। योजना के तहत परिपक्वता का पैसा अंतिम किस्त जमा करने के ठीक एक महीने बाद या फिर चुनी गई अवधि पूरी होने के उपरांत मिलता है। जहां तक कराधान की बात है, इस पर सामान्य आयकर नियम ही लागू होते हैं। यह उन लोगों के लिए बेहद मुफीद है जो छोटी बचतों के जरिए बड़ा वित्तीय संबल खड़ा करना चाहते हैं।
ब्याज दरों का गणित और श्रेणियां
इस योजना के अंतर्गत मिलने वाली ब्याज दरें पूरी तरह से निवेश की अवधि और निवेशक की श्रेणी पर निर्भर करती हैं। आम ग्राहकों को 3 और 4 साल की अवधि वाले निवेश पर 6.55 प्रतिशत की दर से ब्याज दिया जाता है, जबकि 5 से 10 साल तक की लंबी अवधि के लिए यह ब्याज दर 6.30 प्रतिशत निर्धारित की गई है। दूसरी ओर, वरिष्ठ नागरिकों को इन्हीं समान अवधियों के लिए 6.80 प्रतिशत से लेकर 7.05 प्रतिशत तक का आकर्षक ब्याज लाभ प्रदान किया जाता है।
इसके विपरीत, बैंक के कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मचारी वर्ग के वरिष्ठ नागरिकों को सामान्य ग्राहकों की तुलना में अधिक ब्याज का फायदा मिलता है। बैंक कर्मियों के लिए यह दर 7.30 प्रतिशत से 7.55 प्रतिशत तथा कर्मचारी वर्ग के वरिष्ठ नागरिकों के लिए 7.80 प्रतिशत से 8.05 प्रतिशत तक होती है। हालांकि, बैंक ने यह स्पष्ट किया है कि मासिक किस्तों की गणना वर्तमान में लागू ब्याज दरों के आधार पर की जाती है। यदि भविष्य में ब्याज दरों में किसी प्रकार का फेरबदल होता है, तो उसका सीधा असर मासिक निवेश राशि और कुल मैच्योरिटी वैल्यू पर भी पड़ सकता है।
हर महीने 600 रुपये के निवेश पर मिलेंगे 1.10 लाख रुपये
यदि कोई अभिभावक अपनी बेटी के नाम पर हर महीने मात्र 600 रुपये का नियमित निवेश करता है, तो 8 प्रतिशत के अनुमानित रिटर्न के आधार पर उसे 10 वर्षों की अवधि में कुल 1,10,168 रुपये का फंड प्राप्त होगा। इस पूरे कार्यकाल के दौरान निवेशक की कुल मूल निवेश राशि 72,000 रुपये होगी, जिस पर लगभग 38,000 रुपये का ब्याज जुड़ेगा। इस प्रकार अंत में कुल फंड मूल्य करीब 1.10 लाख रुपये तक पहुंच जाएगा।
यदि आपका लक्ष्य अपनी बेटी के लिए ठीक 1 लाख रुपये का फंड तैयार करने का है, तो आपको हर महीने कितनी राशि जमा करनी होगी, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने कितने वर्षों का कार्यकाल चुना है। उदाहरण के लिए, यदि आप 3 साल में 1 लाख रुपये का फंड बनाना चाहते हैं, तो आपको प्रत्येक माह लगभग 2,510 रुपये जमा करने होंगे। वहीं, यदि आप 5 साल की अवधि चुनते हैं, तो यह मासिक राशि घटकर 1,420 रुपये रह जाती है, और यदि आप 10 साल का लंबा विकल्प चुनते हैं, तो आपको हर महीने लगभग 610 रुपये ही जमा करने होंगे। इसका सीधा अर्थ यह है कि आप जितनी लंबी अवधि का चुनाव करेंगे, आपको हर महीने उतनी ही कम राशि का निवेश करना पड़ेगा।
यदि आपका वित्तीय लक्ष्य 2 लाख, 3 लाख या फिर 4 लाख रुपये का बड़ा फंड तैयार करने का है, तो उसी अनुपात में आपकी मासिक जमा राशि भी बढ़ जाएगी। सरल शब्दों में कहें तो आप जितनी बड़ी मैच्योरिटी राशि का चयन करेंगे, आपको हर महीने उतना ही अधिक निवेश करना होगा। निवेशक अपनी व्यक्तिगत आर्थिक जरूरत और अपने बजट के हिसाब से मैच्योरिटी राशि और निवेश अवधि का खुद चयन करने के लिए स्वतंत्र हैं।
समय से पहले पैसे निकालने के नियम और पेनल्टी
यदि किसी अपरिहार्य परिस्थिति या इमरजेंसी के कारण आपको परिपक्वता अवधि पूरी होने से पहले ही इस योजना से अपने पैसे निकालने की आवश्यकता पड़ती है, तो बैंक द्वारा यह सुविधा भी प्रदान की जाती है। हालांकि, तय समय से पहले खाता बंद करने की स्थिति में बैंक द्वारा कुछ जुर्माना यानी पेनल्टी काटी जाती है। इसका मतलब यह है कि आपको निर्धारित ब्याज दर के मुकाबले थोड़ा कम रिटर्न प्राप्त होगा।
यदि कुल जमा राशि 5 लाख रुपये तक है, तो समय से पहले निकासी करने पर 0.50 प्रतिशत की पेनल्टी लगाई जाती है। वहीं, यदि जमा राशि 5 लाख रुपये से अधिक है, तो निवेशकों को 1 प्रतिशत की पेनल्टी चुकानी पड़ती है। प्री-मैच्योर विथड्रॉल पर मिलने वाले ब्याज की गणना हमेशा पेनल्टी की राशि को घटाने के बाद ही की जाती है। इसके अतिरिक्त, यदि जमा किया गया पैसा महज 7 दिन के भीतर ही निकाल लिया जाता है, तो उस पर बैंक की ओर से किसी भी प्रकार का ब्याज नहीं दिया जाएगा।



















