प्रशांत उत्तर-पश्चिम के तकनीकी गढ़ सिएटल में भारतीय-अमेरिकी उद्योगपतियों का एक बड़ा जमावड़ा देखने को मिला, जहां कृत्रिम मेधा यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उन्नत डिजिटल ढांचे को लेकर दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर गहन मंथन हुआ। भारत के महावाणिज्य दूतावास की इस पहल पर आयोजित विशेष संवाद सत्र में 40 से अधिक शीर्ष कार्यकारी अधिकारी और मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी एक मंच पर आए। इस परिचर्चा का मुख्य केंद्र यह था कि किस प्रकार भारतीय प्रतिभा और वैश्विक मंच मिलकर आधुनिक तकनीकों से मिलने वाले आर्थिक व सामाजिक लाभ को हर तबके तक पहुंचा सकते हैं।
प्रौद्योगिकी के विस्तार और प्रभाव पर शीर्ष नेतृत्व का नजरिया
इस सम्मेलन के मुख्य आकर्षण के तौर पर मौजूद शीर्ष उद्योगपति सत्य नडेला ने तकनीकी जगत में आए बदलावों पर अपने विचार रखे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नई तकनीक की वास्तविक उपयोगिता तभी सिद्ध होती है जब उसकी पहुंच समाज के हर कोने तक पहुंचे। सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिक कंप्यूटिंग क्षमताएं अब किसी एक दायरे तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह एक ऐसी बुनियादी तकनीक बन चुकी है जिसका असर अर्थव्यवस्था के हर हिस्से पर पड़ता है।
सत्य नडेला ने पिछले साढ़े तीन दशकों के दौरान इस क्षेत्र में विकसित हुए तकनीकी परिवेश को याद किया और इस बात पर संतोष जताया कि कैसे यह समुदाय भारत की विकास गाथा से जुड़कर लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने रेखांकित किया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के फायदे इस बात पर निर्भर करेंगे कि दुनिया भर के विभिन्न देश, समाज और उद्योग इसे कितनी तेजी से अपनाते हैं।
सहयोग के प्रमुख आयाम और डिजिटल ढांचे पर मंथन
सम्मेलन में शामिल हुए अनुभवी नीति निर्माताओं और अधिकारियों ने भविष्य की प्राथमिकताओं को रेखांकित किया। अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि दोनों देशों की तकनीकी साझेदारी को मजबूत करना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने इस बात को दोहराया कि डिजिटल मिशन को आगे बढ़ाते समय संप्रभुता, लोकतांत्रिक पहुंच, खुलेपन, विश्वसनीयता और सुरक्षा के मानकों से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
बैठक के दौरान आयोजित विचार-विमर्श में कई अहम विषयों पर रणनीति बनाई गई। उद्योगपतियों ने सेमीकंडक्टर निर्माण, डेटा सेंटर के विस्तार, क्वांटम अनुसंधान, एयरोस्पेस इंजीनियरिंग, उन्नत विनिर्माण और प्रतिभाओं को नई तकनीकों में दक्ष बनाने से जुड़े सुझाव प्रस्तुत किए। इस पूरी रूपरेखा का उद्देश्य दोनों देशों के नवाचार तंत्र को एक साथ लाकर रणनीतिक तकनीकी साझेदारी को नई ऊंचाई देना है।
उद्योग जगत के अग्रदूतों को श्रद्धांजलि
कार्यक्रम के औपचारिक सत्र की शुरुआत से पहले तकनीक जगत के दो ऐसे अग्रदूतों को सम्मान दिया गया, जिन्होंने इस क्षेत्र में विशेष योगदान दिया था। आईसीईआरटीआईएस के सह-संस्थापक समीर बोडास और मैड्रोना वेंचर ग्रुप के प्रबंध निदेशक रहे एस. सोमसेगर के हालिया निधन पर उपस्थित लोगों ने एक मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की। इन दोनों हस्तियों ने लंबे समय तक स्थानीय स्टार्टअप परिवेश को खड़ा करने और भारतीय प्रतिभाओं को वैश्विक स्तर पर मार्गदर्शन देने में अहम भूमिका निभाई थी। इसके अलावा यूएसबी सी तकनीक के विकास से जुड़े प्रमुख अन्वेषक अजय भट्ट भी इस विचार विमर्श का हिस्सा बने।
भारत में अरबों डॉलर की ऐतिहासिक निवेश योजनाएं
सम्मेलन के दौरान इस बात पर भी विशेष प्रकाश डाला गया कि दुनिया की दिग्गज कंपनियां भारतीय बाजार में किस तरह अपनी जड़ें मजबूत कर रही हैं। वैश्विक क्लाउड और डेटा प्रबंधन की मांग को देखते हुए बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश की घोषणाएं सामने आई हैं।
- माइक्रोसॉफ्ट की पहल: कंपनी ने वर्ष 2026 से 2029 के चार वर्षों की अवधि में भारत के भीतर 17.5 अरब डॉलर लगाने का संकल्प लिया है, जो समूचे एशिया में उसका अब तक का सबसे विशाल निवेश कार्यक्रम है। यह राशि मुख्य रूप से क्लाउड सेवाओं, एआई इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी कौशल विकास पर खर्च होगी।
- अमेजन का दीर्घकालिक लक्ष्य: अमेजन ने 2026 से 2030 के बीच 48 अरब डॉलर की कुल पूंजी झोंकने की योजना तैयार की है। इसके तहत मुंबई और हैदराबाद में एडब्ल्यूएस डेटा केंद्रों की क्षमता को कई गुना बढ़ाया जाएगा।
- अन्य कंपनियों का विस्तार: इसी कड़ी में कॉस्टको ने भी दक्षिण भारत के प्रमुख तकनीकी केंद्र हैदराबाद में अपना पहला वैश्विक क्षमता केंद्र शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
सामरिक तकनीकी सहयोग को मिला नया आयाम
सिएटल में आयोजित यह पहला ऐसा अवसर था जब इतने बड़े पैमाने पर भारतीय मूल के तकनीकी नेतृत्वकर्ता किसी साझा रणनीति के तहत एकत्रित हुए। यह संवाद दोनों देशों के बीच चल रही ट्रस्ट यानी ट्रांसफॉर्मिंग द रिलेशनशिप यूटिलाइजिंग स्ट्रैटेजिक टेक्नोलॉजी पहल के उद्देश्यों से पूरी तरह मेल खाता है।
इस पहल का सीधा लक्ष्य टेलीकॉम, स्पेस, सेमीकंडक्टर, बायोटेक्नोलॉजी और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे संवेदनशील व भविष्योन्मुखी क्षेत्रों में संयुक्त विकास और उत्पादन को गति देना है। इस सम्मेलन से जुड़े विवरण एक्स पर पोस्ट साझा कर सार्वजनिक किए गए, जिससे यह स्पष्ट होता है कि दोनों देशों के रिश्ते अब मात्र व्यापारिक साझेदारी से आगे बढ़कर सह-निर्माण के नए युग में प्रवेश कर चुके हैं।




















