मुजफ्फरपुर में खुद का रोजगार शुरू करने की चाह रखने वाले लोगों के लिए आटा चक्की का काम एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है। इस छोटे व्यवसाय को शुरू करने के लिए बहुत बड़ी धनराशि की आवश्यकता नहीं होती है। स्थानीय बाजारों में बिजली से संचालित होने वाली आटा चक्की की मशीनें लगभग साठ से अस्सी हजार रुपये की शुरुआती कीमत पर मिल जाती हैं। इसके अतिरिक्त बिजली का कनेक्शन और अन्य जरूरी बुनियादी तैयारियां करने के बाद करीब सत्तर से अस्सी हजार रुपये के कुल खर्च में यह काम आसानी से शुरू किया जा सकता है।
आधुनिक मशीनों से आसान हुआ कामकाज
मुजफ्फरपुर के स्थानीय कारोबारी राजकुमार का कहना है कि बीते समय में आटा चक्की का संचालन करने के लिए काफी शारीरिक श्रम और बड़े पैमाने पर संयंत्र स्थापित करने की जरूरत पड़ती थी। हालांकि आज के समय में बिजली से चलने वाली आधुनिक तकनीकी मशीनों ने इस प्रक्रिया को बेहद सरल बना दिया है। उनके अनुसार लगभग साठ से अस्सी हजार रुपये की लागत से मशीन खरीदी जा सकती है। एक उचित बिजली कनेक्शन के साथ इसे किसी भी दुकान या घर के पास स्थित व्यावसायिक परिसर में आसानी से स्थापित किया जा सकता है।
एक ही मशीन से कई चीजों की पिसाई
इस कारोबार की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह केवल गेहूं पीसने तक ही सीमित नहीं है। कारोबारी के मुताबिक एक ही मशीन के जरिए गेहूं का आटा, बेसन, सत्तू और दाना समेत कई अन्य अनाजों व खाद्य पदार्थों की पिसाई का काम किया जा सकता है। इससे दुकान पर ग्राहकों की संख्या में भी बढ़ोतरी होती है। एक ही यंत्र की मदद से विभिन्न प्रकार की पिसाई का कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया जा सकता है।
हर घंटे एक से डेढ़ क्विंटल पिसाई की क्षमता
राजकुमार के अनुसार इस मशीन की कार्यक्षमता लगभग एक घंटे में एक से डेढ़ क्विंटल तक माल पीसने की है। हालांकि वास्तविक उत्पादन मशीन के विशिष्ट मॉडल, मोटर की क्षमता, बिजली की आपूर्ति और पिसाई के लिए डाली जाने वाली सामग्री के प्रकार पर भी निर्भर करता है। स्थानीय दुकानदार का यह भी कहना है कि यदि मशीन को सही और भीड़भाड़ वाली जगह पर लगाया जाए, आसपास के निवासियों तक इसकी जानकारी पहुंचाई जाए और पूरी नियमितता के साथ काम किया जाए, तो लगभग तीन महीने के भीतर ही शुरुआती लागत की भरपाई की जा सकती है।



















