नई दिल्ली में कॉर्पोरेट और जॉब मार्केट का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। एक समय था जब प्रतिष्ठित संस्थानों से मिलने वाली डिग्री को करियर की सफलता की पूरी गारंटी माना जाता था। रिश्तेदारों में जश्न मनाया जाता था और बहुराष्ट्रीय कंपनियों में भारी-भरकम पैकेज मिलने की पूरी उम्मीद होती थी। लेकिन पिछले दो-तीन वर्षों में काम करने के तौर-तरीके और हायरिंग के नियमों में बड़ा बदलाव आया है। आज तकनीकी और प्रबंधन जगत में 'डिग्री बनाम स्किल' की एक नई बहस जोरों पर चल रही है।
बदलती हायरिंग प्रक्रिया और कंपनियों का रुख
आजकल तमाम बड़ी कंपनियां और स्टार्टअप्स कर्मचारियों का चयन करते समय रिज्यूमे में सिर्फ संस्थान का नाम देखने के बजाय उनके काम करने के हुनर को प्राथमिकता दे रहे हैं। छह महीने के डेटा साइंस, एआई या डिजिटल मार्केटिंग जैसे पाठ्यक्रम पूरा करने वाले युवा भी अब उन पदों के लिए दावेदारी पेश कर रहे हैं, जिन पर कभी केवल प्रीमियम संस्थानों के स्नातकों का एकाधिकार हुआ करता था। इंडस्ट्री की रिपोर्टों के अनुसार, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, आईबीएम और कई प्रमुख टेक स्टार्टअप्स ने डिग्री-फर्स्ट नीति को छोड़कर स्किल-फर्स्ट यानी हुनर को पहले रखने की नीति अपना ली है। लिंक्डइन के आंकड़े बताते हैं कि भारत में 45 प्रतिशत से ज्यादा रिक्रूटर्स अब नौकरी के विज्ञापनों से डिग्री की अनिवार्यता को हटा रहे हैं। वहीं नैसकॉम के अनुसार, आने वाले कुछ वर्षों में आईटी और टेक क्षेत्र में 50 लाख से अधिक ऐसे पद सृजित होंगे जहां केवल व्यावहारिक कौशल जैसे एआई प्रॉम्प्ट्स, डेटा एनालिटिक्स और क्लाउड कंप्यूटिंग की आवश्यकता होगी।
लाखों की फीस बनाम किफायती पढ़ाई का विकल्प
आईआईटी से बीटेक या आईआईएम से एमबीए जैसी उच्च शिक्षा प्राप्त करने में लगभग 10 लाख से 25 लाख रुपये तक का भारी खर्च आता है। इसके बावजूद यदि मंदी का दौर आ जाए तो नौकरी मिलने की पूरी गारंटी नहीं रहती है। इसके विपरीत, ऑनलाइन स्किल कोर्सेज या बूटकैंप्स 20 हजार से 1 लाख रुपये के मामूली बजट में छह महीने के भीतर ही युवाओं को उद्योग की जरूरतों के अनुसार तैयार कर देते हैं। जो छात्र शिक्षा ऋण के भारी बोझ से बचना चाहते हैं, उनके लिए यह तरीका बेहद किफायती और उपयोगी विकल्प बनकर सामने आया है।
प्रीमियम संस्थानों के नेटवर्क और ब्रांड वैल्यू का महत्व
भले ही छह महीने का कोई पाठ्यक्रम आपको हुनर सिखा दे, लेकिन आईआईटी और आईआईएम जैसे संस्थान अपने मजबूत नेटवर्किंग और ब्रांड वैल्यू के लिए जाने जाते हैं। इन प्रतिष्ठित संस्थानों का पूर्व छात्र नेटवर्क जीवनभर करियर में मददगार साबित होता है। इसके अलावा, नेतृत्व क्षमता, समस्याओं को सुलझाने की मानसिकता और सहपाठियों के बीच सीखने की प्रक्रिया जैसी महत्वपूर्ण बातें केवल छह महीने की ऑनलाइन कक्षाओं या स्क्रीन टाइम से पूरी तरह हासिल नहीं की जा सकती हैं।
हाइब्रिड मॉडल साबित हो रहा है सबसे प्रभावी
वास्तविकता यह है कि छह महीने का कोई भी प्रमाण पत्र पाठ्यक्रम किसी संस्थान की डिग्री का पूर्ण विकल्प नहीं है, बल्कि उसका एक बेहतरीन पूरक है। आज के समय में वही उम्मीदवार सबसे आगे निकल रहे हैं जिनके पास मजबूत बुनियादी शिक्षा के साथ-साथ नवीनतम तकनीक का व्यावहारिक अनुभव भी मौजूद है। यदि किसी सामान्य कॉलेज से पढ़ाई करने वाले छात्र हैं तो निराश होने की आवश्यकता नहीं है। अपनी पढ़ाई के साथ-साथ बाजार की मांग के अनुसार कोई छह महीने का स्किल कोर्स जोड़कर किसी भी प्रतिष्ठित संस्थान के छात्र को कड़ी टक्कर दी जा सकती है।


















