मिर्जापुर में एक नया बिजनेस शुरू करने की चाह रखने वाले युवाओं के लिए यह एक बेहतरीन मिसाल है। सरकार की ओर से युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए नंद बाबा दुग्ध योजना का संचालन किया जा रहा है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पशुपालकों को आर्थिक रूप से मजबूत करना और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देना है। योजना के नियमों के अनुसार दो गायों के पालन पर अस्सी हजार रुपये तक का अनुदान दिया जाता है। दो लाख रुपये तक की कुल लागत वाली इस योजना में किसानों और पशुपालकों को चालीस प्रतिशत की दर से सब्सिडी प्रदान की जाती है। इसी योजना का लाभ उठाकर मिर्जापुर जिले के अघवार गांव के निवासी संदीप दुबे ने अपना डेयरी व्यवसाय शुरू किया और आज वे अपने पैरों पर खड़े होकर अच्छी कमाई कर रहे हैं।
लॉटरी प्रक्रिया से हुआ पारदर्शी चयन
संदीप कुमार दुबे ने इस पूरी प्रक्रिया के बारे में बताते हुए कहा कि सरकारी सहायता मिलने के बाद उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में काफी सुधार आया है। वे पहले से भी पशुपालन से जुड़े हुए थे, लेकिन इस योजना के आने के बाद उन्हें एक नया संबल मिला। योजना के तहत लाभार्थियों का चयन पूरी तरह से पारदर्शी तरीके से लॉटरी के माध्यम से किया जाता है। पारदर्शिता के चलते ही पात्र लोगों तक इसका लाभ आसानी से पहुंच रहा है। प्रशासनिक सहयोग और पारदर्शी प्रणाली के कारण उन्हें इस योजना का हिस्सा बनने का मौका मिला और आज उनका व्यवसाय सुचारू रूप से आगे बढ़ रहा है।
स्नातक की पढ़ाई के बाद अपनाया पशुपालन
अपनी शैक्षणिक पृष्ठभूमि और करियर के चुनाव पर बात करते हुए संदीप दुबे ने साझा किया कि स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद जब उन्हें पारंपरिक नौकरियों में मन नहीं लगा, तो उन्होंने पूरी तरह से गौ पालन को ही अपना मुख्य व्यवसाय बनाने का निर्णय लिया। नंद बाबा दूध मिशन के अंतर्गत दो गायों का चयन किया जाता है। इस प्रक्रिया के तहत वे हरियाणा से दो उन्नत नस्ल की गायें अपने यहां लेकर आए थे। धीरे-धीरे उनके पास मवेशियों की संख्या बढ़ती गई और वर्तमान में उनके पास कुल दस पशु हैं। उनके पास मौजूद मवेशियों से मिलने वाले दूध की बिक्री सुगमता से हो जाती है।
पराग डेयरी को होती है दूध की आपूर्ति
व्यवसाय के आर्थिक पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि उनके फॉर्म से निकलने वाले दूध की खपत की कोई समस्या नहीं होती है। उनका उत्पाद सीधे पराग डेयरी को सप्लाई किया जाता है। खास बात यह है कि वे खुद पराग डेयरी में सचिव के पद पर भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जिससे उनके दूध की बिक्री की व्यवस्था और भी अधिक सहज हो जाती है। इस पूरे कारोबार से उन्हें हर महीने लगभग चालीस हजार रुपये की शुद्ध बचत हो जाती है। उन्होंने अन्य किसानों और युवाओं से भी अपील की है कि वे आगे आएं और सरकार की इस लाभकारी योजना में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें।
सरकारी अनुदान और गोबर के अन्य उपयोग
संदीप दुबे का मानना है कि वर्तमान समय में सरकार द्वारा पशुपालकों को जो आर्थिक लाभ दिया जा रहा है, वह अभूतपूर्व है। यदि कोई व्यक्ति दो लाख रुपये का निवेश करता है, तो उसे सीधे अस्सी हजार रुपये का अनुदान मिल जाता है, जो इस व्यवसाय को शुरू करने वाले के लिए बहुत बड़ा संबल है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इससे राज्य के पशुपालकों को सीधा लाभ मिल रहा है। इसके अलावा मवेशियों के गोबर और मूत्र का उपयोग करके जैविक खेती को भी बढ़ावा दिया जा सकता है, जिससे अतिरिक्त आमदनी का मार्ग प्रशस्त होता है।

















