अंतरराष्ट्रीय बुलियन बाजार में सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। शुरुआती एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान सोना 4,300 डॉलर प्रति औंस के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसलकर 4,295 डॉलर के स्तर तक आ गया। अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी बांड यील्ड में हुई तेज बढ़ोतरी और फेडरल रिजर्व की ओर से सख्त मौद्रिक नीति अपनाए जाने की मजबूत संभावनाओं ने सोने की मांग को प्रभावित किया है। हालिया लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार सोना 4,329 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है जो अपने पिछले बंद भाव 4,409 डॉलर की तुलना में 1.81 प्रतिशत नीचे है। पिछले 52 हफ्तों के दौरान सोने का दायरा 3,635 डॉलर से 5,586 डॉलर के बीच रहा है।
अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 5% के पार और फेडरल रिजर्व का रुख
अमेरिकी बांड बाजार में भारी हलचल देखी जा रही है। 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड साल 2023 के बाद पहली बार 5 प्रतिशत के स्तर को पार कर गई है। अमेरिका में लगातार बनी हुई मुद्रास्फीति की चिंता और सरकार के साथ-साथ कॉरपोरेट क्षेत्र द्वारा कर्ज जुटाने की बढ़ती जरूरतों ने यील्ड को इस ऊंचाई पर पहुंचाया है। ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी का सीधा असर बिना ब्याज देने वाली संपत्तियों जैसे सोने पर पड़ता है क्योंकि निवेशक अपना पैसा ज्यादा रिटर्न देने वाले सरकारी बांड में लगाने को प्राथमिकता देते हैं।
अमेरिका में जारी हुए हालिया सीपीआई और पीपीआई मुद्रास्फीति आंकड़ों तथा ऊर्जा की ऊंची कीमतों ने इस धारणा को और मजबूत किया है कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कड़ाई जारी रखेगा। सीएमई फेडवॉच टूल के आंकड़ों से संकेत मिलता है कि बाजार में इस बात की लगभग 92.4 प्रतिशत संभावना जताई जा रही है कि फेडरल रिजर्व अपनी आगामी मौद्रिक समीक्षा बैठक में ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी कर सकता है। जब ब्याज दरें ऊंची होती हैं तो सोने जैसी गैर-ब्याज वाली धातु की अवसर लागत बढ़ जाती है जिससे निवेशकों का रुझान बांड और डॉलर की तरफ शिफ्ट होने लगता है।
तकनीकी विश्लेषण और सोने के प्रमुख सपोर्ट व रेजिस्टेंस स्तर
तकनीकी चार्ट पर सोने के सामने ऊपर और नीचे दोनों तरफ अहम स्तर बने हुए हैं। ऊपर की दिशा में सोने के लिए पहला बड़ा रेजिस्टेंस 100-दिन के सिंपल मूविंग एवरेज यानी 4,330 डॉलर पर है। इसके बाद 20-दिन के बोलिंगर सिंपल मूविंग एवरेज का स्तर 4,455 डॉलर पर आता है। यदि खरीदार दोबारा बाजार में हावी होते हैं तो अपर बोलिंगर बैंड के पास 4,685 डॉलर का स्तर एक मजबूत रुकावट साबित हो सकता है।
दूसरी तरफ नीचे की ओर निकटतम तकनीकी सपोर्ट लोअर बोलिंगर बैंड के पास लगभग 4,230 डॉलर पर स्थित है। यदि सोना इस स्तर से नीचे गिरता है तो बाजार में और गहरा सुधार देखने को मिल सकता है। हालांकि यदि कीमतें इस सपोर्ट जोन के ऊपर बनी रहती हैं तो सोना मूविंग एवरेज रेजिस्टेंस के नीचे समेकन की स्थिति में रहेगा। लाइव तकनीकी सूचकांकों की बात करें तो 14-दिवसीय आरएसआई 46 पर स्थिर है जो एक न्यूट्रल से बियरिश गति का संकेत देता है। एमएसीडी सूचकांक भी बियरिश क्रॉसओवर दिखा रहा है जबकि दैनिक वोलाटिलिटी को दर्शाने वाला एटीआर 79.08 पर है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में आई हालिया नरमी और ट्रेजरी यील्ड के 5 प्रतिशत से थोड़ा पीछे हटने से सोने को कुछ राहत मिली है लेकिन आने वाली एफओएमसी बैठक ही यह तय करेगी कि यह रिकवरी आगे जारी रहेगी या दरों का दबाव दोबारा हावी होगा।
सुरक्षित निवेश और मुद्रास्फीति से बचाव के रूप में सोने का महत्व
ऐतिहासिक रूप से सोने ने मानव सभ्यता में मूल्य के संचयन और विनिमय के माध्यम के रूप में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आधुनिक वित्तीय प्रणाली में गहनों के निर्माण के अलावा सोने को एक प्रमुख सेफ-हेवन एसेट माना जाता है। आर्थिक और राजनीतिक अनिश्चितता के समय में जब शेयर बाजार या अन्य जोखिम वाली संपत्तियों में गिरावट आती है तब निवेशक अपनी पूंजी की सुरक्षा के लिए सोने का रुख करते हैं।
इसके अतिरिक्त सोने को मुद्रास्फीति और गिरती हुई मुद्राओं के खिलाफ एक मजबूत ढाल यानी हेज के रूप में देखा जाता है। चूंकि सोना किसी सरकार या केंद्रीय बैंक के सीधे नियंत्रण में नहीं होता इसलिए इसमें काउंटरपार्टी जोखिम नहीं होता। अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी के साथ सोने का विपरीत संबंध होता है। जब डॉलर कमजोर होता है तो अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए सोना सस्ता हो जाता है जिससे इसकी मांग और कीमत दोनों बढ़ती हैं।
केंद्रीय बैंकों की रिकॉर्ड खरीदारी और वैश्विक स्वर्ण भंडार
दुनिया भर के केंद्रीय बैंक सोने के सबसे बड़े धारक हैं। आर्थिक अनिश्चितता के दौर में अपनी घरेलू मुद्राओं को स्थिरता प्रदान करने और राष्ट्रीय भंडार में विविधता लाने के लिए केंद्रीय बैंक बड़े पैमाने पर सोने की खरीदारी करते हैं। मजबूत स्वर्ण भंडार किसी भी देश की वित्तीय क्षमता और साख में वैश्विक बाजारों का विश्वास बढ़ाता है।
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार साल 2022 में केंद्रीय बैंकों ने अपने भंडार में 1,136 टन सोना जोड़ा था जिसकी कीमत लगभग 70 अरब डॉलर थी। यह रिकॉर्ड आंकड़ों की शुरुआत के बाद से किसी भी एक वर्ष में की गई सबसे बड़ी खरीदारी थी। उभरती अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों जैसे चीन, भारत और तुर्की के केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने का अनुपात तेजी से बढ़ा रहे हैं ताकि वैश्विक डॉलर जोखिम को कम किया जा सके।
विदेशी मुद्रा और डिजिटल एसेट बाजारों की स्थिति
सोने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में भी हलचल तेज रही है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) अमेरिकी डॉलर की मजबूती के कारण दबाव में रहा और 0.7100 के स्तर के पास पहुंचने के बाद एशियाई सत्र की शुरुआत में 0.7150 के पास सुधरा। फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की तेज होती उम्मीदों ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर जैसी जोखिम-संवेदनशील मुद्राओं पर दबाव डाला है।
दूसरी ओर जापानी येन (USD/JPY) के मुकाबले अमेरिकी डॉलर में बढ़त देखी गई और यह 154.00 के करीब पहुंच गया। क्रिप्टो परिसंपत्तियों की बात करें तो जसमीकॉइन (JASMY) 0.0035 डॉलर के सपोर्ट और 0.0040 डॉलर के रेजिस्टेंस के बीच सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है। मई के 0.0078 डॉलर के उच्चतम स्तर से नीचे आने के बाद इस टोकन का तकनीकी ढांचा लगातार दबाव में बना हुआ है जहां बिकवाल बाजार पर अपनी पकड़ बनाए हुए हैं।
निवेशकों के लिए रणनीतिक दृष्टिकोण
आगामी दिनों में निवेशकों और ट्रेडर्स का पूरा ध्यान फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसले और फेड अध्यक्ष की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिका रहेगा। यदि केंद्रीय बैंक भविष्य में दरों में कटौती या नरम रुख का कोई संकेत देता है तो इससे सोने की कीमतों में गिरावट को रोकने में मदद मिल सकती है। हालांकि जब तक 10-वर्षीय यील्ड 5 प्रतिशत के करीब बनी रहती है और डॉलर में मजबूती रहती है तब तक सोने पर बियरिश दबाव बना रह सकता है। ट्रेडर्स को 4,330 डॉलर और 4,230 डॉलर के प्रमुख तकनीकी स्तरों पर कड़ी नजर रखनी चाहिए।



















