नई दिल्ली। डिग्री भी पूरी है, अनुभव भी मापदंडों पर खरा उतरता है और सारे कॉलम भरने के बाद आपने आवेदन पर क्लिक भी कर दिया, फिर भी कोई जवाब नहीं मिलता? अगर ऐसा लगातार हो रहा है, तो समस्या आपकी प्रतिभा में नहीं बल्कि आपके रिज्यूमे के फॉर्मेट में हो सकती है। आज के दौर में कंपनियां सैकड़ों और हजारों अर्जियों में से योग्य उम्मीदवारों को छांटने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एप्लिकेंट ट्रैकिंग सिस्टम का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रही हैं। आपका मुकाबला सबसे पहले किसी मानव मानव संसाधन प्रबंधक से नहीं, बल्कि एक एल्गोरिदम से होता है जो तय करता है कि आपकी अर्जी आगे जाएगी या नहीं।
एटीएस क्या है और यह क्यों जरूरी है?
एप्लिकेंट ट्रैकिंग सिस्टम एक ऐसा सॉफ्टवेयर है जो नौकरी के विवरण से जुड़े खास कीवर्ड्स, तकनीकी योग्यताओं, डिग्रियों और कार्य अनुभव को स्कैन करता है। यदि आपका रिज्यूमे इन जरूरी शब्दों से मेल नहीं खाता या उसका डिजाइन ऐसा है जिसे सॉफ्टवेयर पढ़ नहीं सकता, तो वह सीधे खारिज हो जाता है। इसका मतलब यह है कि आपकी मेहनत से बना सीवी किसी कंपनी के निर्णयकर्ता अधिकारी तक पहुंचने से पहले ही रिजेक्ट फोल्डर में पहुंच जाता है। इसलिए यह समझना बेहद जरूरी हो जाता है कि यह तकनीक कैसे काम करती है और इससे कैसे बचा जा सकता है।
डिजाइनर और सुंदर रिज्यूमे क्यों हो जाते हैं फेल?
उम्मीदवार अक्सर अपने सीवी को आकर्षक बनाने के चक्कर में दो या तीन कॉलम, तरह-तरह के रंग, ग्राफिक्स, टेबल और फैंसी डिजाइनर फॉन्ट का प्रयोग करते हैं। इंसानी नजरों को यह भले ही बहुत सुंदर लगे, लेकिन एटीएस सॉफ्टवेयर इन बॉक्सों और जटिल डिजाइनों को डिकोड नहीं कर पाता है। ऐसे में सॉफ्टवेयर टेक्स्ट को गलत पढ़ लेता है और महत्वपूर्ण जानकारी गायब हो जाती है। आधुनिक एल्गोरिदम को हमेशा एक सरल, साफ-सुथरा और सीधा फॉर्मेट पसंद आता है जिसे वह आसानी से स्कैन कर सके।
पंद्रह मिनट में सीवी को बनाएं एटीएस फ्रेंडली
इस आधुनिक प्रणाली में अपने आवेदन को शॉर्टलिस्ट कराने के लिए किसी महंगे करियर काउंसलर या भारी-भरकम फीस लेने वाले एक्सपर्ट की कोई आवश्यकता नहीं है। आप केवल पंद्रह मिनट के समय और कुछ स्मार्ट बदलावों के जरिए अपने साधारण से दिखने वाले रिज्यूमे को पूरी तरह एआई-फ्रेंडली बना सकते हैं। सबसे पहले जिस नौकरी के लिए आवेदन कर रहे हैं, उसके विवरण को बहुत ध्यान से पढ़ें। उसमें दिए गए मुख्य शब्दों जैसे पायथन, कंटेंट स्ट्रेटजी, एसईओ या लीड जनरेशन को अपने सीवी में बिल्कुल प्राकृतिक तरीके से शामिल करें ताकि वह जबरदस्ती जोड़ा हुआ न लगे।
फ्री एआई टूल्स और सही प्रॉम्प्ट का इस्तेमाल
आप चैटजीपीटी या क्लॉड जैसे मुफ्त एआई टूल्स की मदद ले सकते हैं। इनमें अपनी नौकरी का विवरण और अपना मौजूदा रिज्यूमे डालकर पूछ सकते हैं कि इसमें कौन से कीवर्ड्स छूट रहे हैं। यह तकनीक आपको पल भर में सटीक शब्द बता देगी जिनका उपयोग करके आप अपना स्कोर सुधार सकते हैं। इसके अलावा, अपनी जिम्मेदारियों को बयां करते समय केवल सामान्य बातें लिखने के बजाय अपने काम के आंकड़े दिखाएं। उदाहरण के लिए, यह लिखने के बजाय कि आपने बिक्री संभाली, यह लिखें कि वार्षिक बिक्री में बीस प्रतिशत की बढ़ोतरी की और पच्चीस लाख रुपये का नया कारोबार लेकर आए।
हेडिंग और फाइल फॉर्मेट से जुड़े जरूरी नियम
अपने सीवी में रचनात्मक हेडिंग देने से बचें और हमेशा मानक शीर्षकों का ही प्रयोग करें जैसे कि वर्क एक्सपीरियंस, एजुकेशन और स्किल्स। इसके अलावा, अपने रिज्यूमे की फाइल को हमेशा सही फॉर्मेट यानी पीडीएफ या डीओसीएक्स में ही सहेजें और साझा करें। आवेदन भेजने से पहले जॉबस्कैन या रिज्यूएवर्डेड जैसे मुफ्त टूल्स पर जाकर अपने सीवी का स्कोर जरूर जांच लें। यदि आपका स्कोर सत्तर प्रतिशत से अधिक आता है, तो उसके आगे बढ़ने की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है। साथ ही, यह गलती कभी न करें कि एआई को धोखा देने के लिए सीवी के बैकग्राउंड में सफेद रंग से कीवर्ड छिपा दें, क्योंकि आज के उन्नत सिस्टम ऐसी चालाकी को तुरंत पकड़ लेते हैं और आपको ब्लैकलिस्ट कर सकते हैं।



















