इंजीनियरिंग कॉलेजों में कैंपस प्लेसमेंट का दौर शुरू होते ही छात्रों के बीच गहरी हलचल और मानसिक दबाव देखने को मिलने लगता है। हर छात्र अपनी पसंदीदा ड्रीम कंपनी में नौकरी का अवसर पाने के लिए कड़ी मेहनत करता है। ऐसी स्थिति में अगर सही मार्गदर्शन मिल जाए, तो सफलता का रास्ता काफी आसान हो सकता है। इसी तनाव को कम करने और सही दिशा दिखाने के इरादे से प्रसिद्ध टेक एजुकेटर श्रद्धा खापरा, जिन्हें छात्र लोकप्रिय रूप से 'माइक्रोसॉफ्ट वाली दीदी' के नाम से भी जानते हैं, उन्होंने 5 बेहद कारगर रणनीति शेयर की हैं।
श्रद्धा खापरा का करियर और अनुभव
श्रद्धा खापरा का अपना शैक्षणिक और पेशेवर रिकॉर्ड काफी शानदार रहा है। दिल्ली के प्रतिष्ठित संस्थान Netaji Subhas Institute of Technology (NSIT) से कंप्यूटर इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल करने वाली श्रद्धा ने अपने करियर की शुरुआत में Defence Research and Development Organisation (DRDO) में एक शोध परियोजना पर काम किया था। इसके बाद उन्होंने प्रमुख वैश्विक टेक कंपनी Microsoft (IDC) में सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट इंजीनियर (SWE) के पद पर अपनी सेवाएं दीं। वर्तमान में वह हजारों युवाओं को Data Structures and Algorithms (DSA), वेब डेवलपमेंट, AI/ML और DevOps जैसे आधुनिक विषयों की शिक्षा दे रही हैं। उनका मानना है कि सही योजना बनाकर कम समय की तैयारी में भी बेहतरीन नतीजे हासिल किए जा सकते हैं।
1. छुट्टियों का बुद्धिमानी से इस्तेमाल और निरंतरता
कैंपस प्लेसमेंट की प्रक्रिया आधिकारिक रूप से शुरू होने से ठीक पहले के 2 महीने हर उम्मीदवार के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय होते हैं। श्रद्धा का कहना है कि इस दौरान रोजाना का निरंतर अभ्यास ही सफलता की असली कुंजी है। किसी एक दिन में 12 घंटे लगातार पढ़ाई करने के बजाय हर दिन 3-4 घंटे पूरे ध्यान और समर्पण के साथ कोडिंग और प्रॉब्लम सॉल्विंग को दिए जाने चाहिए। यह आदत परीक्षा के समय तक छात्रों को दूसरों से काफी आगे खड़ा कर देती है।
2. सहपाठियों के साथ मॉक इंटरव्यू का अभ्यास
किताबों या स्क्रीन के सामने अकेले बैठकर पढ़ाई करना एक बात है, लेकिन वास्तविक इंटरव्यू रूम के दबाव को झेलना पूरी तरह से अलग चुनौती है। इसके लिए अपने दोस्तों या सहपाठियों के साथ कम से कम 2-3 मॉक इंटरव्यू आयोजित करने चाहिए। एक सत्र में खुद उम्मीदवार बनें और अगले सत्र में इंटरव्यूअर की भूमिका निभाएं। ऐसा करने से अपनी तकनीकी कमियों, कोडिंग लॉजिक की गड़बड़ियों और संवाद शैली को बेहतर बनाने का वास्तविक मौका मिलता है।
3. 'ट्यूटोरियल हेल' के चक्रव्यूह से बाहर निकलना
ऑनलाइन पढ़ाई के दौर में अधिकांश छात्र दिन भर YouTube या विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर केवल वीडियो ट्यूटोरियल देखते रहते हैं। तकनीकी भाषा में इसे 'Tutorial Hell' कहा जाता है। वीडियो देखते समय सब कुछ आसानी से समझ में आता दिखता है, लेकिन जब खुद खाली स्क्रीन पर कोड लिखना पड़ता है, तो हाथ रुक जाते हैं। इसलिए केवल ट्यूटोरियल देखने की आदत को कम करें और अपने हाथों से कोड लिखने तथा समस्याओं को खुद हल करने पर जोर दें।
4. एप्टीट्यूड और कोर कंप्यूटर साइंस विषयों की तैयारी
अधिकांश इंजीनियरिंग छात्र अपना पूरा समय केवल कोडिंग और DSA के अभ्यास में लगा देते हैं और कोर विषयों को नजरअंदाज कर देते हैं। श्रद्धा के अनुसार, Operating Systems (OS), Database Management Systems (DBMS), और Computer Networks जैसे विषयों के साथ-साथ एप्टीट्यूड की अनदेखी भारी पड़ सकती है। अधिकांश बड़ी कंपनियों के पहले राउंड में होने वाला Online Assessment (OA) एप्टीट्यूड टेस्ट पर ही टिका होता है, जो शुरुआती छंटनी का मुख्य जरिया बनता है। इसलिए अंतिम समय में इन कोर विषयों का रिवीजन बेहद जरूरी है।
5. मानसिक तनाव से बचाव और सही दृष्टिकोण
प्लेसमेंट सीजन के दौरान घबराहट और मानसिक दबाव होना स्वाभाविक है, लेकिन इस प्रक्रिया को जीवन का अंतिम फैसला मान लेना गलत है। श्रद्धा खापरा सलाह देती हैं कि यह प्रक्रिया एक लंबी और सफल जिंदगी का एक बेहद छोटा सा हिस्सा मात्र है। अपनी ओर से 100 प्रतिशत ईमानदारी से प्रयास करें, प्रक्रिया का आनंद लें और बिना किसी परिणाम के भय के शांत दिमाग से इंटरव्यू में हिस्सा लें।



















