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तीन-भाषा नीति पर धर्मेंद्र प्रधान का बड़ा स्पष्टीकरण, सिर्फ 1.3% सीबीएसई छात्रों पर पड़ेगा असरकरियर
3 घंटे पहले· 5

तीन-भाषा नीति पर धर्मेंद्र प्रधान का बड़ा स्पष्टीकरण, सिर्फ 1.3% सीबीएसई छात्रों पर पड़ेगा असर

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने साफ किया है कि सीबीएसई की तीन-भाषा नीति केवल इस साल कक्षा 6 में नया दाखिला लेने वाले छात्रों पर लागू होगी। कक्षा 7, 8 और 9 में पहले से पढ़ रहे छात्रों को अपनी भाषाएं बदलने की कोई जरूरत नहीं है।

Karan MalhotraKaran MalhotraCrime Correspondent 3 मिनट पढ़ें AI के लिए
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सीबीएसई स्कूलों में नई तीन-भाषा नीति को लेकर छात्रों और अभिभावकों के मन में जो भ्रम बना हुआ था, उसे केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने साफ कर दिया है। उन्होंने बताया कि यह नियम केवल उन विद्यार्थियों पर लागू होगा जो इस साल कक्षा 6 में नया दाखिला ले रहे हैं। कक्षा 7, 8 और 9 में पहले से पढ़ रहे छात्रों को अपनी भाषाएं बदलने की कोई जरूरत नहीं है।

पुराने नोटिस से क्यों हुआ भ्रम?

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने माना कि सीबीएसई के पिछले नोटिस में स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं की गई थी, जिसकी वजह से छात्र और उनके माता-पिता असमंजस में पड़ गए थे। अब यह भ्रम दूर हो गया है। जो छात्र फिलहाल दो विदेशी भाषाओं के साथ पढ़ाई कर रहे हैं, वे कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा तक उन्हीं विषयों को जारी रख सकते हैं। सीबीएसई अपनी गवर्निंग काउंसिल की बैठक के बाद इस संबंध में संशोधित आदेश जारी करेगा।

R1, R2 और R3: क्या है यह ढांचा?

नई नीति को व्यवस्थित तरीके से लागू करने के लिए भाषाओं को तीन अलग-अलग स्तरों में बांटा गया है, जिसे R1, R2 और R3 फ्रेमवर्क कहते हैं। इस ढांचे को समझना जरूरी है ताकि छात्र और अभिभावक सही निर्णय ले सकें:

  • R1 (पहली भाषा): यह पढ़ाई का मुख्य माध्यम होगी, जैसे हिंदी या अंग्रेजी।
  • R2 (दूसरी भाषा): यह R1 से अलग कोई अन्य भाषा होगी।
  • R3 (तीसरी भाषा): यह R1 और R2 दोनों से भिन्न एक तीसरी भाषा होगी।

इस पूरे ढांचे की सबसे अहम शर्त यह है कि चुनी गई तीन भाषाओं में से कम से कम दो भाषाएं भारतीय (देशी भाषाएं) होनी अनिवार्य हैं।

सिर्फ 1.3% छात्र ही थे प्रभावित

शिक्षा मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुसार कक्षा 6 से 8 तक तीन भाषाओं की पढ़ाई अनिवार्य है। भारत में करीब 90% छात्र, यानी लगभग 25 करोड़ बच्चे, पहले से ही तीन भाषाएं पढ़ रहे हैं। तमिलनाडु और सीबीएसई को छोड़कर बाकी सभी राज्य बोर्ड कक्षा 10 तक इसी पैटर्न का पालन करते हैं। खुद सीबीएसई के भीतर 99% छात्र पहले से दो भारतीय भाषाएं पढ़ रहे हैं। केवल 1.3% छात्र ऐसे थे जो दो विदेशी भाषाओं के साथ पढ़ाई कर रहे थे। नए स्पष्टीकरण के बाद अब उन्हें भी परेशान होने की जरूरत नहीं रही।

विदेशी भाषाओं पर कोई रोक नहीं

इस नीति को लेकर एक बड़ी गलतफहमी यह थी कि स्कूलों से विदेशी भाषाएं पूरी तरह हटा दी जाएंगी। लेकिन धर्मेंद्र प्रधान ने इसे साफ तौर पर नकार दिया है। विदेशी भाषाओं पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया जा रहा। छात्र तीन मुख्य भाषाओं के अलावा चौथी भाषा के रूप में किसी विदेशी भाषा को चुन सकते हैं। नियम का सार बस इतना है कि तीन में से दो भाषाएं भारतीय होनी चाहिए, ताकि शिक्षा व्यवस्था में देश की अपनी भाषाओं को और मजबूती मिल सके।

किताबों और शिक्षकों की कमी पर क्या आश्वासन मिला?

इस नीति के लागू होने के साथ ही स्कूलों और अभिभावकों की सबसे बड़ी चिंता थी कि भारतीय भाषाओं में पर्याप्त पाठ्यपुस्तकें और योग्य शिक्षक कहां से आएंगे। यह मामला कोर्ट तक भी पहुंच गया था। धर्मेंद्र प्रधान ने भरोसा दिलाया कि देश की 22 भारतीय भाषाओं में पाठ्यपुस्तकें समय पर तैयार हो जाएंगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि स्कूलों में पर्याप्त शिक्षकों और जरूरी संसाधनों की व्यवस्था करना सीबीएसई की जिम्मेदारी है, इसलिए किसी को भी घबराने की जरूरत नहीं है।

इसका आप पर असर

आपके बच्चे पर क्या असर पड़ेगा:

  • भारत में: सीबीएसई के जो छात्र इस समय कक्षा 7, 8 या 9 में हैं, उन्हें अपनी भाषाएं बदलने की कोई जरूरत नहीं है। नया नियम सिर्फ इस साल कक्षा 6 में नए दाखिले लेने वाले बच्चों पर लागू होगा।
  • विदेशी भाषा सीखने के इच्छुक छात्र उसे तीन मुख्य भाषाओं के अलावा चौथे विषय के रूप में चुन सकते हैं, इसलिए उनकी पढ़ाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

सवाल-जवाब

सीबीएसई की तीन-भाषा नीति किन छात्रों पर लागू होगी?
यह नीति केवल उन छात्रों पर लागू होगी जो इस साल कक्षा 6 में नया दाखिला ले रहे हैं।
क्या कक्षा 7, 8 और 9 के छात्रों को अपनी भाषाएं बदलनी होंगी?
नहीं, कक्षा 7, 8 और 9 में पहले से पढ़ रहे छात्रों को कोई बदलाव नहीं करना है, वे कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा तक अपने मौजूदा भाषा विषय जारी रख सकते हैं।
R1, R2 और R3 फ्रेमवर्क क्या होता है?
R1 पढ़ाई का मुख्य माध्यम है जैसे हिंदी या अंग्रेजी, R2 उससे अलग दूसरी भाषा है और R3 इन दोनों से अलग तीसरी भाषा है। तीनों में से कम से कम दो भारतीय भाषाएं होनी अनिवार्य हैं।
क्या इस नियम के बाद स्कूलों से विदेशी भाषाएं हटा दी जाएंगी?
नहीं, विदेशी भाषाओं पर कोई प्रतिबंध नहीं है। छात्र तीन मुख्य भाषाओं के अलावा चौथी भाषा के रूप में विदेशी भाषा को चुन सकते हैं।
सीबीएसई के कितने प्रतिशत छात्र इस बदलाव से प्रभावित थे?
केवल 1.3% छात्र प्रभावित थे जो दो विदेशी भाषाएं पढ़ रहे थे। 99% छात्र पहले से ही दो भारतीय भाषाएं पढ़ रहे हैं।
भारतीय भाषाओं की पाठ्यपुस्तकें और शिक्षक समय पर मिलेंगे?
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आश्वासन दिया है कि 22 भारतीय भाषाओं में पाठ्यपुस्तकें समय पर तैयार होंगी और पर्याप्त शिक्षकों की व्यवस्था करना सीबीएसई की जिम्मेदारी है।
NEP 2020 के तहत तीन भाषाओं की पढ़ाई कब से अनिवार्य है?
NEP 2020 के तहत कक्षा 6 से 8 तक तीन भाषाएं पढ़ाना अनिवार्य है।
क्या भारत के अन्य राज्य बोर्ड पहले से यही पैटर्न अपनाते हैं?
हां, तमिलनाडु और सीबीएसई को छोड़कर बाकी सभी राज्य बोर्ड कक्षा 10 तक तीन-भाषा पैटर्न का पालन करते हैं।
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