अगर आप उत्तराखंड के पहाड़ों से ताल्लुक रखते हैं और अभिनय को अपना करियर बनाना चाहते हैं, तो रास्ता उतना दूर नहीं जितना लगता है। छोटे से मंच पर थिएटर से शुरुआत करके देश के सबसे प्रतिष्ठित अभिनय संस्थान नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा यानी NSD तक का सफर मुमकिन है। इसकी सबसे बड़ी मिसाल खुद नैनीताल में मौजूद है, जहां की मशहूर नाट्य संस्था युगमंच लगातार ऐसे कलाकार गढ़ रही है जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। अब तक युगमंच के 17 कलाकार NSD में दाखिला लेकर संस्था और नैनीताल का नाम रोशन कर चुके हैं।
नैनीताल पहुंचे NSD के फैकल्टी विनोद सुमन का साफ कहना है कि अभिनय की दुनिया में टिकने और आगे बढ़ने का सबसे मजबूत आधार थिएटर ही है। उनके मुताबिक NSD में दाखिले की शुरुआत ऑनलाइन आवेदन से होती है, और इसके बाद ऑडिशन तथा इंटरव्यू का दौर आता है। इस दौरान उम्मीदवार की अभिनय क्षमता, संवाद अदायगी, मंच पर प्रस्तुति और रंगमंच की समझ को परखा जाता है। विनोद सुमन की सलाह है कि जिस युवा के भीतर अभिनय का जुनून है, उसे सबसे पहले थिएटर का दामन थामना चाहिए, क्योंकि यही मंच कलाकार के आत्मविश्वास और हुनर को निखारता है।
दाखिले की पूरी प्रक्रिया क्या है
NSD के प्रस्तुति प्रबंधक पराग शर्मा ने दाखिले की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि हर साल मार्च से अप्रैल के बीच दाखिले के लिए आवेदन मांगे जाते हैं और इच्छुक अभ्यर्थी संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। यह तीन साल का रेजिडेंशियल डिप्लोमा कोर्स है, जिसमें अभिनय, निर्देशन, रंगमंच, मंच सज्जा और थिएटर की बाकी बारीकियों की व्यावहारिक ट्रेनिंग दी जाती है।
पराग शर्मा के अनुसार दाखिले के लिए उम्मीदवार का स्नातक होना जरूरी है। इसके साथ ही अभ्यर्थी के पास कम से कम छह नाटकों में अभिनय या थिएटर का अनुभव होना चाहिए। पूरे देश से हर साल सिर्फ 33 सीटों पर दाखिला मिलता है, इसलिए मुकाबला बेहद कड़ा रहता है।
दो चरणों में होता है चयन
चयन की प्रक्रिया दो चरणों में पूरी होती है। पहले 30 अंकों की ऑब्जेक्टिव लिखित परीक्षा होती है, जिसमें रंगमंच और नाटक से जुड़े सवाल पूछे जाते हैं। इसके बाद 80 अंकों का प्रैक्टिकल ऑडिशन होता है, जहां अभिनय, संवाद प्रस्तुति, अभिव्यक्ति और मंचीय प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाता है। आखिरी चयन मेरिट के आधार पर तय होता है।
पढ़ाई मुफ्त, ऊपर से छात्रवृत्ति
NSD की सबसे खास बात यह है कि यहां छात्रों को पढ़ाई बिल्कुल निःशुल्क मिलती है। इतना ही नहीं, भारत सरकार की ओर से हर छात्र को 9,500 रुपये प्रतिमाह की छात्रवृत्ति भी दी जाती है। साथ ही हॉस्टल, मैस और दूसरी जरूरी सुविधाएं भी मुहैया कराई जाती हैं। चूंकि यह रेजिडेंशियल कोर्स है, इसलिए विद्यार्थियों को संस्थान परिसर में रहकर ही ट्रेनिंग लेनी होती है।
पहाड़ से निकलकर पर्दे तक का सफर
NSD के फैकल्टी सुमन वैध ने अपनी कहानी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने भी अपने अभिनय सफर की शुरुआत नैनीताल की सबसे पुरानी नाट्य संस्था युगमंच से ही की थी। इसके बाद उन्होंने NSD से ट्रेनिंग ली और आगे चलकर कई फिल्मों में अहम किरदार निभाए। उनका मानना है कि पहाड़ के युवाओं में प्रतिभा और मेहनत की कोई कमी नहीं है, जरूरत है तो बस सही मार्गदर्शन, लगातार अभ्यास और मंच के अनुभव की। उनके मुताबिक उत्तराखंड के युवाओं के लिए थिएटर महज एक शौक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने का दमदार जरिया बन सकता है। अगर अभिनय के प्रति समर्पण, अनुशासन और सीखने की ललक हो, तो पहाड़ों से निकलकर देश के सबसे बड़े रंगमंच संस्थान तक पहुंचना पूरी तरह मुमकिन है।













