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छत्तीसगढ़ के सरगुजा में जल निकायों से बढ़ेगी ग्रामीण कमाई, 50 हितग्राहियों को मिले 1 लाख फिंगरलिंग बीजछत्तीसगढ़
20 अग॰ 2026, 2:26 pm (1 दिन पहले)· 1

छत्तीसगढ़ के सरगुजा में जल निकायों से बढ़ेगी ग्रामीण कमाई, 50 हितग्राहियों को मिले 1 लाख फिंगरलिंग बीज

सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड में जल संरक्षण ढांचों को आजीविका से जोड़ते हुए 50 हितग्राहियों को 50 प्रतिशत अनुदान पर फिंगरलिंग मछली बीज बांटे गए हैं।

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से जल निकायों के बहुआयामी उपयोग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी कड़ी में जिले की 28 ग्राम पंचायतों में निर्मित जल संरचनाओं को मत्स्य पालन की गतिविधियों से जोड़ा गया है। स्थानीय ग्रामीणों को स्वावलंबी बनाने और उनकी कमाई के नए साधन तैयार करने के लिए 35 आजीविका डबरी तथा 2 नवा तरिया का चयन किया गया है, जिनमें करीब 1 लाख फिंगरलिंग मछली बीज का संचयन कराया गया है। इस पूरी कवायद का प्राथमिक उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में केवल पानी सहेजने तक सीमित न रहकर जल संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करते हुए स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित करना है।

दरिमा प्रक्षेत्र में आयोजित वितरण कार्यक्रम और योजना की बारीकियां

विकासखंड अम्बिकापुर के तहत आने वाले शासकीय मत्स्य बीज प्रक्षेत्र, दरिमा में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के दौरान 45 अलग-अलग गांवों से पहुंचे 50 चयनित हितग्राहियों को फिंगरलिंग मत्स्य बीज प्रदान किए गए। योजना के प्रावधानों के अनुसार, इन सभी हितग्राहियों को 50 प्रतिशत अनुदान पर मछली बीज उपलब्ध कराया गया है। इससे मत्स्य पालन की शुरुआत करने वाले ग्रामीणों पर आने वाला प्रारंभिक वित्तीय बोझ काफी हद तक कम हो जाएगा। इस योजना के माध्यम से तैयार की गई 35 आजीविका डबरी और 2 नवा तरिया में इन बीजों का संचयन किया जाएगा, जिससे आने वाले समय में मछली उत्पादन के जरिए ग्रामीणों को नियमित और अतिरिक्त आय प्राप्त होगी।

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वीबी-जी राम जी योजना से जल निकायों का कायाकल्प

ग्रामीण अंचलों में तैयार की गई आजीविका डबरी और नवा तरिया का निर्माण वीबी-जी राम जी योजना के माध्यम से किया गया है। इन जल संरचनाओं को अब ग्रामीणों की स्थानीय आवश्यकताओं और आजीविका की प्राथमिकताओं से सीधे जोड़ा जा रहा है। गांवों में पानी की उपलब्धता का उपयोग केवल सिंचाई या दैनिक जरूरतों के लिए ही नहीं, बल्कि व्यावसायिक गतिविधियों के लिए भी किया जा रहा है। अपने ही गांव में आर्थिक गतिविधियों के अवसर मिलने से ग्रामीणों को पलायन नहीं करना पड़ेगा और गांव के जल संसाधनों का शत-प्रतिशत बेहतर उपयोग संभव हो सकेगा। इससे न केवल संबंधित परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी, बल्कि समग्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी संबल मिलेगा।

मत्स्य विभाग का तकनीकी मार्गदर्शन और आधुनिक पद्धतियां

मत्स्य पालन को टिकाऊ और अधिक मुनाफा देने वाला व्यवसाय बनाने के लिए मत्स्य विभाग द्वारा हितग्राहियों को हर स्तर पर तकनीकी सहायता दी जा रही है। केवल मछली बीज का वितरण ही नहीं, बल्कि डबरी में बीज संचयन का सही तरीका, मछलियों के आहार, देख-रेख, पानी की गुणवत्ता का प्रबंधन और उत्पादन बढ़ाने से जुड़ी जरूरी जानकारियां भी ग्रामीणों को उपलब्ध कराई जा रही हैं। विभाग का जोर इस बात पर है कि ग्रामीण परंपरागत तरीकों के बजाय उन्नत और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाएं, ताकि सीमित जल क्षेत्र से भी अधिकतम और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन हासिल किया जा सके। इस तरह की रियायती और तकनीकी पहलों से अधिक से अधिक ग्रामीण मत्स्य पालन की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

सवाल-जवाब

सरगुजा में कितने जल निकायों में फिंगरलिंग मछली बीज का संचयन किया गया है?
सरगुजा जिले की 28 ग्राम पंचायतों में बनी 35 आजीविका डबरी और 2 नवा तरिया में फिंगरलिंग मछली बीज का संचयन किया गया है।
ग्रामीणों को मछली बीज पर कितना अनुदान दिया जा रहा है?
फिंगरलिंग मत्स्य बीज संचयन योजना के तहत हितग्राहियों को 50 प्रतिशत अनुदान पर मछली बीज उपलब्ध कराया गया है।
इस योजना के तहत कितने गांवों और हितग्राहियों को लाभ मिला है?
अम्बिकापुर विकासखंड के तहत 45 गांवों के 50 चयनित हितग्राहियों को लगभग 1 लाख फिंगरलिंग मछली बीज बांटे गए हैं।
मछली बीज का वितरण किस स्थान पर किया गया?
मछली बीज का वितरण विकासखंड अम्बिकापुर के अंतर्गत शासकीय मत्स्य बीज प्रक्षेत्र, दरिमा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान किया गया।
इन आजीविका डबरी और नवा तरिया का निर्माण किस योजना के तहत हुआ है?
इन जल संरचनाओं का निर्माण वीबी-जी राम जी योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में किया गया है।
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