हाल में हुए जेन-जी आंदोलन के व्यापक असर को देखते हुए प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। अब सरकारी विभागों और जिला प्रशासन के लिए सोशल मीडिया पर सक्रियता बढ़ाना अनिवार्य कर दिया गया है। शासन ने सभी विभागों के प्रमुखों को निर्देश दिया है कि वे अपनी दैनिक गतिविधियों, जनकल्याणकारी योजनाओं और प्रशासनिक उपलब्धियों की विस्तृत जानकारी इंस्टाग्राम सहित अन्य प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निरंतर साझा करें। इसके साथ ही जिला स्तर पर निगरानी का दायरा बढ़ा दिया गया है, जहां अब केवल पारंपरिक प्रिंट मीडिया की खबरों पर ही ध्यान नहीं दिया जाएगा, बल्कि सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली हर छोटी-बड़ी गतिविधि और समाचार पर भी पैनी नजर रखी जाएगी।
100 अंकों का डेल्टा मार्किंग सिस्टम और अंकों का विभाजन
प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यकुशलता और सूचना प्रसार की गति को मापने के लिए एक नई मूल्यांकन व्यवस्था लागू की गई है। इस नई प्रक्रिया के अंतर्गत सभी सरकारी विभागों के सचिवों तथा जिला कलेक्टरों की प्रदर्शन रैंकिंग तैयार की जाएगी। इसके लिए कुल 100 अंकों का एक विशेष डेल्टा मार्किंग सिस्टम तैयार किया गया है। इस मूल्यांकन प्रणाली में अंकों का विभाजन बहुत ही स्पष्ट रूप से किया गया है। इसमें आधिकारिक प्रेस रिलीज जारी करने के लिए 15 अंक और विभिन्न क्षेत्रों की सफलता की कहानियों (सक्सेस स्टोरी) को उजागर करने के लिए 15 अंक तय किए गए हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया पर नियमित गतिविधियों और कंटेंट शेयरिंग के लिए 30 अंक निर्धारित किए गए हैं, जबकि सबसे बड़ा हिस्सा यानी 40 अंक एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) की प्रस्तुति के लिए रखा गया है।
नकारात्मक खबरों पर त्वरित प्रतिक्रिया और 6 घंटे की समय-सीमा
सार्वजनिक मंचों पर विभाग की छवि और भ्रामक जानकारियों के नियंत्रण के लिए बेहद सख्त समय-सीमा निर्धारित की गई है। यदि किसी समाचार पत्र या प्रिंट मीडिया में किसी विभाग के विरुद्ध कोई नकारात्मक समाचार प्रकाशित होता है, तो संबंधित अधिकारी को उसी दिन उसका आधिकारिक स्पष्टीकरण देना होगा। वहीं सोशल मीडिया पर किसी भी गलत, भ्रामक अथवा नकारात्मक खबर के सामने आते ही अधिक से अधिक 6 घंटे की अवधि के भीतर जवाब प्रस्तुत करना अनिवार्य कर दिया गया है। यदि जांच में खबर सत्य पाई जाती है, तो विभाग को तुरंत यह स्पष्ट करना होगा कि उस समस्या के समाधान के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। इसी विवरण के आधार पर एक्शन टेकन रिपोर्ट तैयार होगी। तय समय-सीमा बीत जाने के पश्चात दिए गए किसी भी स्पष्टीकरण को मूल्यांकन में शामिल नहीं किया जाएगा और अधिकारी को उस मद में शून्य अंक मिलेंगे।
गूगल फॉर्म के जरिए दैनिक मॉनिटरिंग और करियर पर प्रभाव
इस पूरी जवाबदेही प्रक्रिया को पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए एक विशेष डिजिटल गूगल फॉर्म विकसित किया गया है। हर जिले और विभाग में तैनात जनसंपर्क अधिकारी रोजाना की गतिविधियों का प्रामाणिक डेटा इस फॉर्म में दर्ज करेंगे। जानकारी दर्ज होते ही केंद्रीय डेटाबेस अपने आप अपडेट हो जाएगा। प्रणाली में दोहरी प्रविष्टि रोकने की व्यवस्था की गई है, जिससे एक ही सूचना दो बार दर्ज होने पर सिस्टम दूसरी एंट्री को खुद ही हटा देगा। डेटा में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या गलत जानकारी पाए जाने पर दोषी अधिकारी के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसके अतिरिक्त तीन प्रमुख सोशल मीडिया मंचों पर की गई संयुक्त मूल पोस्ट को ही गिनती में लिया जाएगा, जबकि री-पोस्ट और शेयर को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा। हर माह तैयार होने वाली यह रैंकिंग अधिकारियों के वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन से जोड़ी जाएगी, जो भविष्य में उनके तबादलों और पदोन्नति का मुख्य आधार बनेगी।



















