बिहार के पश्चिम चंपारण जिले में स्थित प्रदेश के एकमात्र वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से सटे सीमावर्ती ग्रामीण इलाकों में इस समय दहशत का माहौल है। जंगलों की प्राकृतिक सुंदरता भले ही पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती हो, लेकिन यहां की सीमा पर बसे स्थानीय लोगों के लिए यह माहौल जानलेवा साबित हो रहा है। जंगल के बिल्कुल करीब स्थित बस्तियों में वन्य जीवों की आवाजाही लगातार बढ़ गई है, जिससे ग्रामीणों और खूंखार जानवरों के बीच खतरनाक आमना-सामना होने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। इस स्थिति ने सैकड़ों परिवारों के दैनिक जीवन और सुरक्षा को गंभीर खतरे में डाल दिया है।
17 दिनों में 4 हमले और 3 मौतें: रिहाइशी इलाकों में बढ़ा खतरा
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के मंगुराहा, गोबर्धना, मदनपुर और वाल्मीकिनगर रेंजों के आसपास सैकड़ों बस्तियां बसी हुई हैं, जहां लाखों की संख्या में लोग जीवन यापन करते हैं। हाल के दिनों में सबसे चिंताजनक हालात मदनपुर और वाल्मीकिनगर रेंज से सटी ग्रामीण बस्तियों में देखने को मिले हैं। महज 17 दिनों की अवधि के भीतर बाघ और इंसानों के बीच संघर्ष के 4 अलग-अलग मामले सामने आ चुके हैं। इन हमलों की विभीषिका का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 3 मामलों में शिकार बने लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
इन सभी घटनाओं में सबसे गौर करने वाली बात यह है कि यह तमाम हादसे जंगल के भीतर नहीं, बल्कि जंगल की सीमाओं से बाहर ग्रामीण इलाकों और कृषि खेतों में हुए हैं। इससे स्पष्ट हो गया है कि हिंसक वन्य जीव अब केवल जंगल तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि भोजन और शिकार की तलाश में मानव बस्तियों में प्रवेश कर रहे हैं। लगातार हो रही इन घटनाओं से पूरे इलाके के ग्रामीणों में डर और खौफ पसर गया है।
मचान पर पहरेदारी और आदमखोर का खौफ
बाघ के लगातार होते हमलों और वन्य जीवों के सीधे खतरे से निपटने के लिए ग्रामीणों को आत्मरक्षा का तरीका खोजना पड़ा है। गांवों के बाहरी हिस्सों और खेतों की सीमाओं पर दर्जनों ऊंचे मचान तैयार किए गए हैं। इन मचानों पर चढ़कर गांव के पुरुष दिन और रात, दोनों समय लगातार पहरेदारी कर रहे हैं। खतरे की गंभीरता को देखते हुए पहरा देने के लिए भारी संख्या में ग्रामीणों को एक साथ मौजूद रहना पड़ रहा है। हाल ही में हुई मौतों के तरीके और बाघ के आक्रामक रुख ने स्थानीय निवासियों के मन में यह विश्वास पैदा कर दिया है कि हमलावर बाघ अब आदमखोर बन चुका है।
भेड़िहारी गांव का मामला: 15 अगस्त की दर्दनाक घटना
बाघ के जानलेवा हमलों का शिकार बने लोगों में भेड़िहारी गांव के विजय हालदार भी शामिल हैं। शनिवार, 15 अगस्त को विजय हालदार जब अपने खेत में मवेशियों के लिए घास काटने गए थे, तभी घात लगाकर बैठे बाघ ने उन पर हमला कर दिया और उन्हें मौत के घाट उतार दिया। इस दुखद हादसे के संबंध में मृतक विजय हालदार के बड़े भाई तपन हालदार ने बताया कि उनका पूरा भेड़िहारी गांव जंगल की सीमा से बिल्कुल सटा हुआ है। गांव के लगभग सभी कृषि योग्य खेत जंगल की सीमा रेखा के किनारे स्थित हैं।
तपन हालदार के अनुसार, विजय का खेत भी उसी जोखिम भरे इलाके में था, जहां बाघ की आवाजाही बनी हुई थी। घटना के बाद से उस पूरे क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी और लोकेशन को दोबारा ट्रैक किया गया है। इसी कारण ग्रामीणों के मन में इतना डर समा गया है कि उन्होंने अपने खेतों में जाना पूरी तरह बंद कर दिया है। खेती-बाड़ी का काम ठप होने से ग्रामीणों के सामने आजीविका का संकट भी मंडराने लगा है।





















