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अंतरिक्ष में चीन का नया कदम, इंटरनेट सैटेलाइट्स की ताजा खेप सफलतापूर्वक लॉन्चचीन
26 अक्तू॰ 2026, 3:36 pm (4 दिन पहले)· 2

अंतरिक्ष में चीन का नया कदम, इंटरनेट सैटेलाइट्स की ताजा खेप सफलतापूर्वक लॉन्च

चीन ने लॉन्ग मार्च-8A रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में इंटरनेट सैटेलाइट्स का नया जत्था भेजा है। यह अभियान वैश्विक स्तर पर लो-अर्थ ऑर्बिट आधारित इंटरनेट सेवाओं की बढ़ती दौड़ का हिस्सा है।

अंतरिक्ष में इंटरनेट का एक विशाल नेटवर्क स्थापित करने की अपनी महत्वाकांक्षी योजना के तहत चीन ने एक बार फिर से नए उपग्रहों को अंतरिक्ष की कक्षा में भेजा है। रविवार को एक उन्नत लॉन्ग मार्च-8A रॉकेट का इस्तेमाल करके इंटरनेट सैटेलाइट्स के एक नए समूह को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में रवाना किया गया। अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में यह कदम ऐसे वक्त में उठाया गया है, जब पूरी दुनिया में अंतरिक्ष के जरिए तेज रफ्तार इंटरनेट सेवाएं मुहैया कराने की तकनीक पर कब्जा जमाने के लिए वैश्विक प्रतिस्पर्धा अपने चरम पर पहुंच चुकी है। ये सभी सैटेलाइट्स अपनी निर्धारित कक्षा में सुरक्षित रूप से स्थापित हो चुके हैं, जिससे देश के आगामी अंतरिक्ष इंटरनेट ढांचे को और अधिक मजबूती मिली है।

कहां से हुआ रॉकेट का प्रक्षेपण और क्या रहा वक्त?

इस पूरे अंतरिक्ष अभियान को दक्षिण चीन सागर में स्थित द्वीप प्रांत हैनान के अत्याधुनिक वाणिज्यिक अंतरिक्ष यान लॉन्च केंद्र से अंजाम दिया गया। तय कार्यक्रम के मुताबिक, लॉन्ग मार्च-8A रॉकेट ने स्थानीय समयानुसार सुबह ठीक 10:03 बजे आसमान की तरफ उड़ान भरी। इस मिशन की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इसके जरिए लो-अर्थ ऑर्बिट यानी धरती की निचली कक्षा में इंटरनेट उपग्रहों का 28वां समूह भेजा गया है। इन सभी आधुनिक सैटेलाइट्स को चाइना एकेडमी ऑफ स्पेस टेक्नोलॉजी (CAST) द्वारा डिजाइन और तैयार किया गया है। हालांकि, इस बार के प्रक्षेपण में कुल कितने उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजा गया है, इस बात की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। 28वें समूह का यह आंकड़ा इस श्रृंखला के लॉन्च क्रम को दर्शाता है, न कि इसमें मौजूद कुल उपग्रहों की गिनती को। ऐतिहासिक आंकड़ों पर नजर डालें तो लॉन्ग मार्च रॉकेट श्रृंखला की यह अब तक की कुल 674वीं उड़ान थी।

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चीन की अंतरिक्ष आधारित इंटरनेट योजना का पूरा खाका

अंतरिक्ष आधारित इंटरनेट योजनाओं पर लंबे समय से काम कर रहा चीन पृथ्वी की परिक्रमा करने वाले उपग्रहों का एक बहुत बड़ा जाल बुनना चाहता है। इस रणनीति के तहत उसका सबसे प्रमुख प्रोजेक्ट गुओवांग है, जिसका सीधा संबंध सरकारी कंपनी चाइना सैटेलाइट नेटवर्क ग्रुप से माना जाता है। उपलब्ध जानकारियों के अनुसार, इस महात्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के तहत अंतरिक्ष में लगभग 13,000 सैटेलाइट्स तैनात करने का बड़ा लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा, चीन का एक और महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट छियानफान भी है, जिसे थौजेंड सेल्स या स्पेससेल्स के नाम से भी जाना जाता है। इस दूसरे प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य देश और दुनिया में सैटेलाइट आधारित इंटरनेट सेवाओं का तेजी से विस्तार करना है। वैश्विक विशेषज्ञों का मानना है कि इन सभी प्रोजेक्ट्स को अमेरिका की स्टारलिंक सेवा के एक बड़े और मजबूत विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, रविवार को हुए इस खास लॉन्च से जुड़े आधिकारिक बयानों में किसी भी विशिष्ट प्रोजेक्ट के नाम का सीधा जिक्र नहीं किया गया है।

लो-अर्थ ऑर्बिट तकनीक से इंटरनेट सेवाओं को मिलने वाले लाभ

पृथ्वी की सतह के ठीक नजदीक की कक्षा को लो-अर्थ ऑर्बिट यानी LEO कहा जाता है, जहां इस तरह के उपग्रहों को स्थापित किया जाता है। इस विशेष कक्षा में काम करने वाले इंटरनेट सैटेलाइट्स का सबसे बड़ा तकनीकी फायदा यह है कि सिग्नल को अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट और जमीन के बीच बेहद कम दूरी तय करनी पड़ती है। दूरी कम होने की वजह से इंटरनेट ब्राउज़िंग या डेटा ट्रांसफर के दौरान होने वाली देरी यानी लेटेंसी में भारी कमी आती है, जिससे उपयोगकर्ताओं को काफी तेज और स्थिर कनेक्शन मिलता है। हालांकि, इस तरह के नेटवर्क की सबसे बड़ी शर्त यह होती है कि इसके लिए अंतरिक्ष में भारी संख्या में सैटेलाइट्स की निरंतर आवश्यकता पड़ती है, ताकि पृथ्वी के हर कोने में निर्बाध कनेक्टिविटी हमेशा बनी रहे। चीन इसी उच्च तकनीकी मॉडल को जमीन पर उतारने के लिए लगातार अपने उपग्रहों के बेड़े का विस्तार करने में जुटा हुआ है।

सवाल-जवाब

चीन ने हाल ही में कौन सा रॉकेट अंतरिक्ष में भेजा है?
चीन ने लॉन्ग मार्च-8A रॉकेट का उपयोग करके इंटरनेट सैटेलाइट्स का नया समूह अंतरिक्ष में भेजा है।
इस रॉकेट का प्रक्षेपण कहां से किया गया था?
इस रॉकेट को दक्षिणी द्वीप प्रांत हैनान के वाणिज्यिक अंतरिक्ष यान लॉन्च केंद्र से छोड़ा गया था।
इन उपग्रहों को किस संगठन ने तैयार किया है?
इन इंटरनेट सैटेलाइट्स को चाइना एकेडमी ऑफ स्पेस टेक्नोलॉजी (CAST) द्वारा तैयार किया गया है।
चीन के प्रमुख सैटेलाइट इंटरनेट प्रोजेक्ट का नाम क्या है?
चीन के प्रमुख प्रोजेक्ट का नाम गुओवांग है, इसके अलावा छियानफान प्रोजेक्ट पर भी काम चल रहा है।
लो-अर्थ ऑर्बिट में सैटेलाइट भेजने का मुख्य फायदा क्या है?
इस कक्षा में सिग्नल को कम दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे इंटरनेट इस्तेमाल करते समय होने वाली देरी कम हो जाती है।
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