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हजारों साल पुराना है कंडोम का इतिहास, कभी भेड़ की आंत और कछुए के खोल से तैयार होते थे ये कवरजीवनशैली
30 अक्तू॰ 2026, 6:37 am (1 घंटे पहले)· 2

हजारों साल पुराना है कंडोम का इतिहास, कभी भेड़ की आंत और कछुए के खोल से तैयार होते थे ये कवर

कंडोम का इतिहास तीन हजार साल से भी अधिक पुराना है। प्राचीन काल में इसे जानवरों की आंतों, रेशमी कागज और कछुए के खोल से बनाया जाता था, जो आज के समय में आधुनिक लैटेक्स से तैयार किए जाते हैं।

कंडोम एक ऐसी वस्तु है जिसके बारे में हर कोई जानने की उत्सुकता रखता है। आज के दौर में जहां बाजार में बेहद पतले, फ्लेवर्ड और डॉटेड कंडोम आसानी से मिल जाते हैं, वहीं इसकी तीन हजार साल पुरानी कहानी बेहद दिलचस्प और हैरान करने वाली है। आज के आधुनिक और आरामदायक सुरक्षा कवच तक पहुंचने की यह यात्रा कई ऐतिहासिक बदलावों से होकर गुजरी है। इतिहास के पन्नों को पलटने पर पता चलता है कि एक वक्त था जब इन आवरणों को तैयार करने के लिए जानवरों के अंगों और अन्य अजीबोगरीब चीजों का इस्तेमाल किया जाता था। गंभीर शोधों के आधार पर इसकी पूरी कहानी इंसानी सभ्यता के विकास और स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में उठाए गए कदमों की एक अनोखी दास्तान बयां करती है।

जानवरों की आंतों से होती थी शुरुआत

पब मेड सेंट्रल जर्नल के अनुसार तकनीकी विकास कितना भी हो गया हो, लेकिन कंडोम का बुनियादी उद्देश्य आज भी वही है जो हजारों साल पहले था। इसका मुख्य मकसद यौन संक्रमण से बचाव करना और अनचाहे गर्भ को रोकना है। इतिहास में इसका सबसे पहला लिखित जिक्र होमर की इलियट में मिलता है, जिसमें क्रीट के राजा मिनोस से जुड़ी एक लोककथा का उल्लेख है। कहा जाता है कि उनके वीर्य में विषैले जीव होने के कारण रानियों की मृत्यु हो जाती थी। इस समस्या से निपटने के लिए सलाहकारों ने बकरी की आंत या मूत्राशय से एक संकरी थैलीनुमा आवरण तैयार करने का सुझाव दिया। इस आवरण का उपयोग करने के बाद राजा ने अपनी पत्नी के साथ सुरक्षित संबंध बनाए और वंश को आगे बढ़ाया। हालांकि इस कथा में अतिशयोक्ति हो सकती है, लेकिन इसी के बाद से पशुओं के अंगों से सुरक्षा कवच बनाने का चलन समाज में तेजी से फैल गया और कसाई इस काम में माहिर हो गए।

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मिस्र और न्यू गिनी की प्राचीन तकनीक

हजारों साल पुराने साक्ष्य बताते हैं कि प्राचीन मिस्र की संस्कृति में पुरुष संभोग के दौरान लिनन के कपड़े से बने आवरण का उपयोग करते थे। सामाजिक रूप से प्रतिष्ठित लोग रंगीन लिनन पहनना पसंद करते थे। मिस्र में बिल्हार्जिया जैसी उष्णकटिबंधीय बीमारियों से बचने के लिए भी लिंग के अगले हिस्से को ढकने वाले शीथ का आविष्कार किया गया था। दूसरी ओर न्यू गिनी की प्राचीन जुकास जनजाति ने संभवतः दुनिया का पहला महिला कंडोम तैयार किया था। यह एक खास पौधे से बनाया जाता था, जो प्याले के आकार का और करीब छह इंच लंबा होता था। इसे महिला के शरीर के भीतर इस प्रकार फिट किया जाता था कि वह संबंध के दौरान पड़ने वाले दबाव को आसानी से सहन कर सके। कोलंबिया यूनिवर्सिटी की सहायक निदेशक डोना ड्रकर के अनुसार उस दौर में पुरुषों की तुलना में महिला कंडोम काफी लोकप्रिय हुआ करते थे।

कागज और कछुए के खोल का अनोखा इस्तेमाल

चीनी सभ्यता अपनी रेशमी कला के लिए प्रसिद्ध थी, जिसके चलते वहां प्राचीन काल में रेशमी कागज से कंडोम बनाए जाते थे और उन पर तेल लगाकर उन्हें चिकना किया जाता था। जैसे-जैसे बीमारियां और महामारियां मध्य यूरोप से पूर्व की ओर फैलीं, इन आवरणों की मांग और अधिक बढ़ गई। जापानी सभ्यता में काबुता-गाटा नामक आवरण का उपयोग होता था, जो केवल लिंग के अगले हिस्से को ढकता था। यह आमतौर पर कछुए के खोल से बनाया जाता था, हालांकि कभी-कभी चमड़े का भी प्रयोग किया जाता था। इस आवरण का इस्तेमाल स्तंभन दोष से पीड़ित लोग भी करते थे।

वैज्ञानिक शोध से आधुनिक रूप की ओर

सोलहवीं शताब्दी में यूरोपीय वैज्ञानिकों ने आधुनिक कंडोम के विकास में अभूतपूर्व योगदान दिया। प्रसिद्ध इतालवी शरीर रचना विशेषज्ञ गैब्रिएले फैलोपियो ने 1564 में सिफलिस जैसी खतरनाक बीमारी से बचने के लिए लिनन के एक आवरण का विस्तृत वर्णन किया। यह आवरण केवल अग्रभाग को ढकता था जिसे एक रिबन से बांधा जाता था और लार की मदद से चिकना किया जाता था। यह सिंगल-यूज़ नहीं था बल्कि इसे साफ करके दोबारा इस्तेमाल में लाया जाता था। उन्होंने करीब 1100 पुरुषों पर इसका अध्ययन किया और बड़ी सफलता हासिल की। सत्रहवीं शताब्दी आते-आते रिबन वाले इन सुरक्षा आवरणों का उपयोग गर्भनिरोधक के रूप में बड़े पैमाने पर होने लगा।

भारतीय रबर और वल्कनीकरण की क्रांति

उन्नीसवीं और बीसवीं सदी में आविष्कारकों ने वाटरप्रूफ कपड़ों, गुट्टा पेरका और भारतीय रबर की मदद से कंडोम बनाने के कई प्रयोग किए। हालांकि प्राकृतिक रबर से बने शुरुआती कंडोम काफी मोटे होते थे और तापमान के बदलने पर वे या तो बहुत सख्त हो जाते थे या टूट जाते थे। इस बड़ी समस्या का समाधान 1844 में वैज्ञानिक चार्ल्स गुडईयर ने खोज निकाला। उन्होंने वल्कनीकृत रबर का पेटेंट कराया जिसके बाद 1855 में वल्कनीकृत रबर से बने कंडोम व्यापक स्तर पर बाजार में उपलब्ध हो गए। इस खोज ने कंडोम की पूरी तस्वीर ही बदल दी और इसकी लागत में भारी कमी आई। प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सैनिकों को मोर्चे पर भेजने से पहले ये आवरण बड़े पैमाने पर बांटे गए, जिससे इनकी बिक्री में जबरदस्त उछाल आया।

सवाल-जवाब

कंडोम का इतिहास कितने साल पुराना है?
कंडोम का इतिहास तीन हजार साल से भी अधिक पुराना है।
प्राचीन काल में सबसे पहले कंडोम किससे बनाए जाते थे?
प्राचीन काल में कंडोम भेड़ या बकरी की आंतों और मूत्राशय से बनाए जाते थे।
मिस्र के लोग किस सामग्री से बने शीथ का उपयोग करते थे?
मिस्र के लोग संभोग के दौरान लिनन के कपड़े से बने शीथ का उपयोग करते थे।
वल्कनीकृत रबर का पेटेंट किसने कराया था?
वैज्ञानिक चार्ल्स गुडईयर ने 1844 में वल्कनीकृत रबर का पेटेंट कराया था।
गैब्रिएले फैलोपियो ने किस बीमारी से बचाव के लिए आवरण का वर्णन किया था?
गैब्रिएले फैलोपियो ने सिफलिस से बचाव के लिए आवरण का वर्णन किया था।
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