कठिन परिस्थितियों में टीम की जरूरतों के अनुसार खुद को ढालना ही किसी महान खिलाड़ी की पहचान होती है। टेस्ट क्रिकेट का इतिहास ऐसे कई उदाहरणों से भरा पड़ा है जहां किसी बल्लेबाज ने अपनी नियमित स्थिति से हटकर नई भूमिका निभाई और हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा लिया। ऐसा ही एक अद्भुत कारनामा देखने को मिला था जब भारतीय टीम के भरोसेमंद बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा को अचानक ओपनिंग करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। हरी पिच और तेज गेंदबाजों के अनुकूल माहौल में उन्होंने 289 गेंदों का सामना करते हुए 145 रनों की नाबाद मैराथन पारी खेली और टेस्ट क्रिकेट के सबसे कठिन रिकॉर्ड्स में से एक कैरिंग द बैट अपने नाम किया।
सिंहली स्पोर्ट्स क्लब की यादें और कॉमेंट्री बॉक्स का खास संयोग
रविवार को जब भारतीय क्रिकेट टीम कोलंबो के सिंहली स्पोर्ट्स क्लब (SSC) के मैदान पर उतरेगी, तब कॉमेंट्री बॉक्स में बैठकर मैच का हाल सुनाने वाला एक खास शख्स 11 साल पुराने उस ऐतिहासिक पल को याद करेगा। 2015 में खेले गए उस यादगार मुकाबले में चेतेश्वर पुजारा ने अपनी बल्लेबाजी से पूरी दुनिया को प्रभावित किया था। दिलचस्प बात यह है कि उस मैच में उनके साथ मैदान पर मौजूद अजिंक्य रहाणे भी इस बार कॉमेंट्री बॉक्स में उनके साथ ही नजर आएंगे। दोनों पूर्व साथी खिलाड़ी उस ऐतिहासिक लम्हे और मैच के रोमांचक पलों को फिर से याद करेंगे।
मुरली विजय की चोट और ओपनर के रूप में पुजारा की एंट्री
वर्ष 2015 में भारत और श्रीलंका के बीच खेला गया वह मुकाबला सीरीज का तीसरा और निर्णायक टेस्ट मैच था। कोलंबो के सिंहली स्पोर्ट्स क्लब की पिच पर हरी घास थी और परिस्थितियां तेज गेंदबाजों के पूरी तरह अनुकूल नजर आ रही थीं। मैच की शुरुआत से ठीक पहले नियमित सलामी बल्लेबाज मुरली विजय अचानक चोटिल हो गए। संकट की इस घड़ी में टीम को एक ऐसे बल्लेबाज की जरूरत थी जो नई गेंद का सामना कर सके और गेंदबाजों की धार को कुंद कर सके। ऐसे में मध्यक्रम में खेलने वाले चेतेश्वर पुजारा को ओपनिंग के लिए मैदान पर उतारा गया।
289 गेंदों का संघर्ष और ऐतिहासिक 145 रन की नाबाद पारी
श्रीलंका के खतरनाक गेंदबाजी आक्रमण और गेंदबाजों की मदद करती पिच पर चेतेश्वर पुजारा ने एक छोर मजबूती से थाम लिया। एक तरफ भारतीय टीम के बाकी बल्लेबाज नियमित अंतराल पर पवेलियन लौटते रहे, लेकिन पुजारा चट्टान की तरह क्रीज पर टिके रहे। उन्होंने 289 गेंदों का सामना करते हुए नाबाद 145 रनों की बेमिसाल पारी खेली। जब भारतीय टीम की पहली पारी 312 रनों के कुल स्कोर पर सिमट गई, तब पुजारा नाबाद पवेलियन वापस लौटे। उनकी इस जुझारू पारी की मदद से भारत ने न केवल उस मुकाबले में जीत दर्ज की, बल्कि टेस्ट सीरीज पर भी अपना कब्जा जमाया।
क्या है 'कैरिंग द बैट' रिकॉर्ड और भारत के चुनिंदा 4 दिग्गज
टेस्ट क्रिकेट में 'कैरिंग द बैट' उस स्थिति को कहा जाता है जब कोई सलामी बल्लेबाज मैच की पहली गेंद से बल्लेबाजी करने आता है और टीम के सभी 10 विकेट गिरने तक बिना आउट हुए नाबाद बना रहता है। यह उपलब्धि किसी भी बल्लेबाज के अनुशासन, मानसिक सहनशक्ति और बेहतरीन तकनीक का सबसे बड़ा प्रमाण मानी जाती है। टेस्ट क्रिकेट के 150 से अधिक सालों के लंबे इतिहास में केवल 4 भारतीय बल्लेबाज ही यह करिश्मा कर पाए हैं। इनमें सुनील गावस्कर (1983), वीरेंद्र सहवाग (2008), राहुल द्रविड़ (2011) और चेतेश्वर पुजारा शामिल हैं। ध्यान देने योग्य बात यह है कि इन 4 दिग्गजों में से केवल सुनील गावस्कर ही विशेषज्ञ सलामी बल्लेबाज थे, जबकि सहवाग, द्रविड़ और पुजारा को टीम की तात्कालिक जरूरतों के कारण ओपनर की भूमिका निभानी पड़ी थी।



















