गॉल में खेले गए पहले टेस्ट मुकाबले में धमाकेदार जीत दर्ज करने के बाद भारतीय टीम प्रबंधन श्रीलंका के खिलाफ 23 अगस्त से कोलंबो में शुरू हो रहे दूसरे और अंतिम टेस्ट मैच के लिए अपनी प्लेइंग इलेवन में बड़ा बदलाव करने पर विचार कर रहा है। मध्य प्रदेश के 33 वर्षीय ऑलराउंडर सारांश जैन का इस मुकाबले में भारत के लिए टेस्ट डेब्यू करना लगभग तय माना जा रहा है। टीम प्रबंधन लेग स्पिनर कुलदीप यादव के स्थान पर सारांश जैन को अंतिम एकादश में शामिल करने की तैयारी में है।
गॉल टेस्ट के बाद स्पिन संयोजन में बदलाव की वजह
कोलंबो टेस्ट से पहले सारांश जैन को मौका देने का फैसला गॉल टेस्ट के दौरान देखे गए प्रदर्शन पर आधारित है। गॉल की पिच पूरी तरह स्पिनरों के अनुकूल थी और श्रीलंका के 20 में से 15 विकेट स्पिन गेंदबाजों के खाते में गए थे। इसके बावजूद कुलदीप यादव टर्निंग ट्रैक का खास फायदा नहीं उठा सके और पूरे मैच में केवल 1 विकेट ही हासिल कर पाए। दूसरी ओर, अंगुली के स्पिनरों ने शानदार प्रदर्शन किया, जहां मानव सुथार ने मैच में 10 विकेट चटकाए और रवींद्र जडेजा ने दोनों पारियों को मिलाकर 4 सफलताएं अर्जित कीं। मददगार पिच पर कुलदीप के बेअसर रहने की वजह से टीम प्रबंधन ने गेंदबाजी संतुलन को बेहतर बनाने के लिए यह रणनीतिक कदम उठाया है।
इंदौर से शुरुआत और शुरुआती क्रिकेट सफर
31 मार्च 1993 को मध्य प्रदेश के इंदौर में जन्मे सारांश जैन एक दशक लंबे घरेलू क्रिकेट के अनुभव के साथ अंतरराष्ट्रीय मंच पर दस्तक देने की दहलीज पर हैं। क्रिकेट उनके परिवार में गहरा रचा-बसा है, क्योंकि उनके पिता सुबोध जैन भी मध्य प्रदेश के लिए रणजी ट्रॉफी खेल चुके हैं। शुरुआत में सुबोध जैन अपने बड़े बेटे को कोचिंग देने पर ध्यान केंद्रित कर रहे थे, लेकिन जब उन्होंने सारांश के भीतर असाधारण प्रतिभा देखी, तो उन्होंने अपना ध्यान सारांश पर केंद्रित किया और उनका दाखिला इंदौर के प्रसिद्ध विजय क्लब में कराया। विजय क्लब का क्षेत्रीय क्रिकेट में बड़ा नाम है, जहां अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर रजत पाटीदार ने भी अपने खेल को निखारा था। रजत पाटीदार ने आगे चलकर भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया, मध्य प्रदेश की कप्तानी की और इंडियन प्रीमियर लीग में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की कमान संभाली। सारांश ने 2014-15 के घरेलू सत्र में मध्य प्रदेश के लिए अपना फर्स्ट क्लास डेब्यू किया था।
रणजी ट्रॉफी में ऐतिहासिक प्रदर्शन और लाला अमरनाथ अवॉर्ड
मध्य प्रदेश की टीम जब 2021-22 सत्र में पहली बार रणजी ट्रॉफी चैंपियन बनी, तो उस ऐतिहासिक जीत में सारांश जैन का योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने दबाव के क्षणों में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए क्वार्टर-फाइनल, सेमी-फाइनल और फाइनल मुकाबलों में हिस्सा लिया तथा नॉकआउट चरण में कुल 13 विकेट चटकाए। गेंदबाजी के अलावा मुंबई के खिलाफ फाइनल मैच में उनकी 57 रनों की महत्वपूर्ण पारी ने मध्य प्रदेश को पहला खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई। इसके बाद 2022-23 के घरेलू सत्र में उन्होंने अपने प्रदर्शन का स्तर और ऊंचा करते हुए 360 रन बनाए और 35 विकेट झटके। इस शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन के लिए उन्हें रणजी ट्रॉफी के सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर के प्रतिष्ठित लाला अमरनाथ अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
इंडिया ए और दिलीप ट्रॉफी में निरंतरता का प्रदर्शन
घरेलू स्तर पर लगातार बेहतरीन खेल दिखाने के कारण सारांश को 2024 में इंग्लैंड लायंस के खिलाफ सीरीज के लिए इंडिया ए टीम में जगह मिली, जहां उन्होंने एक मैच की दोनों पारियों में अर्धशतक जमाकर अपनी बल्लेबाजी क्षमता का लोहा मनवाया। इसके बाद 2025 की दिलीप ट्रॉफी में उन्होंने सेंट्रल ज़ोन की ओर से खेलते हुए राष्ट्रीय चयन के लिए अपने दावे को और मजबूत किया। दो मैचों में 16 विकेट लेने के साथ-साथ उन्होंने सेमी-फाइनल और फाइनल दोनों में अर्धशतक जड़े और प्लेयर ऑफ द सीरीज का पुरस्कार अपने नाम किया। अलग-अलग परिस्थितियों में दिए गए इसी निरंतर प्रदर्शन के दम पर 33 वर्षीय सारांश जैन अब कोलंबो में भारत की टेस्ट कैप पहनने के मुहाने पर खड़े हैं।



















