टेस्ट क्रिकेट में 50 की बल्लेबाजी औसत को कामयाबी का पैमाना माना जाता है, और इसे पूरे करियर तक टिकाए रखना किसी भी बल्लेबाज के लिए बेहद कठिन इम्तिहान होता है। सचिन तेंदुलकर, रिकी पोंटिंग और विराट कोहली जैसे महानतम नामों के करियर में भी ऐसे दौर आए जब उनका ग्राफ ऊपर-नीचे होता रहा। मगर इस खेल के इतिहास में सिर्फ दो बल्लेबाज ऐसे रहे जिन्होंने डेब्यू से लेकर विदाई तक, यानी अपने पहले मैच से आखिरी मैच तक, अपनी औसत को एक बार भी 50 के नीचे नहीं गिरने दिया। इस बेहद खास सूची में पहला नाम इंग्लैंड के हर्बर्ट सटक्लिफ का है और दूसरा पाकिस्तान के उस आक्रामक बल्लेबाज का, जिसने अपने तेवरों से विरोधियों के हौसले तोड़ दिए थे — जावेद मियांदाद।
हर्बर्ट सटक्लिफ: भरोसे का दूसरा नाम
पहले विश्व युद्ध के बाद के दौर में इंग्लैंड के हर्बर्ट सटक्लिफ दुनिया के सबसे टिकाऊ और भरोसेमंद सलामी बल्लेबाज के तौर पर सामने आए। उन्होंने 1924 से 1935 के बीच कुल 54 टेस्ट मैच खेले, और इस पूरे सफर की सबसे बड़ी बात यह रही कि उनकी बल्लेबाजी औसत कभी 50 के नीचे नहीं पहुंची। जब उन्होंने टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कहा, उस वक्त उनकी औसत 60.73 थी — जो टेस्ट इतिहास के लिहाज से असाधारण आंकड़ा है। उन्होंने 16 शतक लगाए और 4500 से ज्यादा टेस्ट रन जोड़े। फर्स्ट क्लास क्रिकेट में भी इस दिग्गज का दबदबा कायम रहा, जहां 52 की औसत के साथ उनके खाते में 50000 से ज्यादा रन दर्ज हैं।
जावेद मियांदाद: दबाव में बिखरने नहीं, निखरने वाला बल्लेबाज
जब बात मुश्किल हालात में और बेहतर खेलने की हो, तो पाकिस्तान के जावेद मियांदाद का नाम सबसे पहले जेहन में आता है। उन्होंने 1976 में न्यूजीलैंड के खिलाफ अपने पहले ही टेस्ट में शतक ठोककर तहलका मचा दिया था। उस सनसनीखेज शुरुआत के बाद 1993 में खेले अपने आखिरी टेस्ट तक मियांदाद का करियर पूरे 17 साल तक फैला, लेकिन इतने लंबे अरसे में भी उनकी औसत का ग्राफ कभी 50 के नीचे नहीं उतरा। 124 टेस्ट मैचों के उतार-चढ़ाव भरे लंबे सफर के बाद जब वे रिटायर हुए, तो उनकी टेस्ट औसत 52.57 की थी। मियांदाद के नाम 23 शतक और 8000 से ज्यादा रन दर्ज हैं, जबकि उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर नाबाद 280 रन रहा। फर्स्ट क्लास क्रिकेट में भी उनकी औसत 50 के पार रही और इस फॉर्मेट में उन्होंने 28000 से ज्यादा रन बनाए।
ब्रैडमैन क्यों इस सूची से बाहर हैं
आंकड़ों की दुनिया में सबसे ऊंचा शिखर बेशक डॉन ब्रैडमैन का है, जिनकी टेस्ट औसत 99.94 आज भी अजेय मानी जाती है। मगर अपने करियर की शुरुआत में एक मौके पर उनकी औसत भी 50 से नीचे चली गई थी। यही वजह है कि इस अनोखे क्लब में जगह सिर्फ सटक्लिफ और मियांदाद को मिलती है — दो ऐसे नाम जिनकी औसत का ग्राफ पहले मैच से आखिरी मैच तक हमेशा '50 प्लस' ही बना रहा।













