भारतीय क्रिकेट टीम के लिए इंग्लैंड का दौरा बेहद निराशाजनक और एक बुरे सपने की तरह साबित हुआ है। टी20 वर्ल्ड कप की मौजूदा चैंपियन टीम इंडिया को मेजबान देश के खिलाफ खेली गई द्विपक्षीय टी20 श्रृंखला में बेहद शर्मनाक शिकस्त का सामना करना पड़ा है। साउथेम्प्टन के मैदान पर खेले गए सीरीज के पांचवें और अंतिम मुकाबले में इंग्लैंड ने भारतीय टीम को खेल के हर विभाग में पीछे छोड़ते हुए एकतरफा अंदाज में हरा दिया। इस धमाकेदार जीत के साथ ही मेजबान टीम ने सीरीज को 4-0 से अपने नाम कर लिया। इस ऐतिहासिक जीत की बदौलत इंग्लैंड ने न केवल भारतीय टीम का सूपड़ा साफ किया, बल्कि ICC टी20 रैंकिंग में शीर्ष पर काबिज टीम इंडिया को दूसरे स्थान पर धकेल कर नंबर-1 का प्रतिष्ठित ताज भी हासिल कर लिया। इस हार के कारण पिछले 1605 दिनों यानी लगभग साढ़े चार साल से चला आ रहा भारतीय टीम का दबदबा आखिरकार समाप्त हो गया है।
साढ़े चार साल बाद रैंकिंग में बड़ा उलटफेर
भारतीय टीम ने पिछले साढ़े चार साल से भी अधिक समय से अंतरराष्ट्रीय टी20 क्रिकेट की रैंकिंग में अपना शीर्ष स्थान बरकरार रखा था। लेकिन इंग्लैंड के खिलाफ मिली इस 4-0 की करारी हार ने भारत के इस शानदार और लंबे सिलसिले पर पूरी तरह से विराम लगा दिया है। इस द्विपक्षीय सीरीज के शुरू होने से पहले इंग्लैंड की टीम को आईसीसी रैंकिंग के शिखर पर पहुंचने के लिए हर हाल में भारतीय टीम का सूपड़ा साफ करने की जरूरत थी। अपनी घरेलू पिचों और परिस्थितियों का बेहतरीन तरीके से फायदा उठाते हुए इंग्लैंड ने इस बेहद मुश्किल चुनौती को बेहद आसान बना दिया और दुनिया की सबसे बेहतरीन टी20 टीम होने का गौरव फिर से हासिल कर लिया।
जोस बटलर और हैरी ब्रूक का मैदान पर हाहाकार
श्रृंखला के इस आखिरी मुकाबले में इंग्लैंड के बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजों की जमकर क्लास लगाई और उन्हें विकेट के लिए तरसा दिया। सलामी बल्लेबाज जोस बटलर और टीम के कप्तान हैरी ब्रूक ने मैदान के चारों तरफ रनों की ऐसी बौछार की कि भारतीय खेमा पूरी तरह से बेबस नजर आया। इन दोनों दिग्गज बल्लेबाजों ने दूसरे विकेट के लिए 233 रनों की रिकॉर्ड साझेदारी खड़ी की, जिसने मैच की दिशा तय कर दी। जोस बटलर ने केवल 64 गेंदों का सामना करते हुए 131 रनों की तूफानी और विस्फोटक पारी खेली। इस बेमिसाल पारी के दौरान बटलर के बल्ले से 12 शानदार चौके और 8 गगनचुंबी छक्के निकले। दूसरी तरफ, कप्तान हैरी ब्रूक ने भी भारतीय आक्रमण को कोई मौका नहीं दिया और 95 रनों की नाबाद पारी खेलकर टीम को मजबूत स्थिति में बनाए रखा। इन दोनों की बेजोड़ बल्लेबाजी की बदौलत इंग्लैंड ने निर्धारित 20 ओवरों में 257 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। इसके जवाब में उतरी भारतीय टीम इतने बड़े लक्ष्य के दबाव को संभाल नहीं सकी और केवल 201 रनों के स्कोर पर ही सिमट गई।
उछाल भरी इंग्लिश पिचों पर लड़खड़ाया भारत का बल्लेबाजी क्रम
इस पूरे दौरे के दौरान भारतीय बल्लेबाजों को इंग्लैंड की तेज और अतिरिक्त उछाल वाली पिचों पर रन बनाने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ा। टीम का शीर्ष क्रम लगातार मैचों में भारतीय टीम को एक मजबूत और ठोस शुरुआत देने में पूरी तरह से विफल रहा। आखिरी मुकाबले में बल्लेबाजों की नाकामी के साथ-साथ गेंदबाज भी पूरी तरह से दिशाहीन नजर आए और मेजबान बल्लेबाजों पर दबाव बनाने में असफल रहे। गेंदबाजी के अलावा भारतीय खिलाड़ियों ने फील्डिंग के दौरान भी कई बड़ी गलतियां कीं, जिसका पूरा फायदा इंग्लैंड के बल्लेबाजों ने उठाया। यही वजह रही कि भारतीय टीम इस सीरीज में एक भी मैच जीतने में कामयाब नहीं हो सकी। उल्लेखनीय है कि इस सीरीज का पहला मुकाबला बारिश की वजह से रद्द हो गया था, जिसके बाद बाकी बचे चारों मुकाबलों में इंग्लैंड ने एकतरफा जीत दर्ज की।
श्रेयस अय्यर की कप्तानी और कोचिंग स्टाफ पर उठे गंभीर सवाल
यह दौरा श्रेयस अय्यर के लिए टी20 अंतरराष्ट्रीय टीम के कप्तान के तौर पर पहली सबसे बड़ी परीक्षा माना जा रहा था, लेकिन उनके नेतृत्व में टीम इंडिया की रणनीतियां पूरी तरह से फ्लॉप साबित हुईं। इसके साथ ही मुख्य कोच गौतम गंभीर के मार्गदर्शन और उनकी कार्यप्रणाली पर भी उंगलियां उठने लगी हैं। गंभीर के कार्यकाल के दौरान भारतीय टीम इससे पहले श्रीलंका और न्यूजीलैंड के खिलाफ खेली गई वनडे सीरीज में भी हार का स्वाद चख चुकी है, जबकि टेस्ट क्रिकेट में भी टीम का प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा है। अब इंग्लैंड के खिलाफ मिली इस 4-0 की करारी शिकस्त ने टीम प्रबंधन के फैसलों और उनकी खेल रणनीति पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। दूसरी तरफ, हैरी ब्रूक की कप्तानी में खेलते हुए इंग्लैंड ने पहली बार भारत के खिलाफ किसी द्विपक्षीय टी20 सीरीज में क्लीन स्वीप करने का नया कीर्तिमान स्थापित किया है।











