नई दिल्ली। भारत और इंग्लैंड के बीच आयोजित पांचवें टी20 इंटरनेशनल मैच के दौरान चयन को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। टीम प्रबंधन ने महज 15 साल के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन से बाहर कर दिया, जिसकी जगह संजू सैमसन को फिर से मौका दिया गया। इस बदलाव ने भारतीय क्रिकेट जगत के दिग्गज सुनील गावस्कर को बेहद नाराज कर दिया है। मैच के दौरान कमेंट्री करते हुए उन्होंने इस निर्णय की कड़ी आलोचना की और इसे युवा प्रतिभा के विकास के रास्ते में बड़ी बाधा करार दिया।
सिर्फ तीन मैचों का अनुभव और टीम से बाहर
वैभव सूर्यवंशी के लिए इंग्लैंड का दौरा काफी चुनौतीपूर्ण रहा, जिसमें उन्हें सिर्फ तीन टी20 मैच खेलने का मौका मिला। इन मैचों में उन्होंने कुल 42 रन बनाए। हालांकि उनका स्ट्राइक रेट काफी अच्छा था, लेकिन इंग्लैंड के तेज गेंदबाजों द्वारा उत्पन्न की गई अतिरिक्त उछाल और गति के सामने वह बड़ी पारी खेलने में नाकाम रहे। टीम प्रबंधन ने निर्णायक मैच में वैभव को दरकिनार करते हुए अनुभवी संजू सैमसन को वापस टीम में बुला लिया। संजू सैमसन आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे पर लगातार खराब फॉर्म से जूझ रहे थे, लेकिन अंतिम मैच में प्रबंधन ने युवा प्रतिभा के बजाय अनुभव पर दांव लगाना उचित समझा।
सुनील गावस्कर का सख्त रुख
सुनील गावस्कर ने इस टीम चयन पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि यह सीरीज का कोई अत्यंत महत्वपूर्ण 'करो या मरो' का मैच होता, तब भी अनुभवी खिलाड़ी को प्राथमिकता देना समझ में आता। लेकिन चूँकि भारतीय टीम पहले ही सीरीज हार चुकी थी और अंतिम मुकाबले का परिणाम सीरीज पर कोई असर नहीं डालने वाला था, तो ऐसे में किसी युवा खिलाड़ी को बाहर बैठाना पूरी तरह से गलत कदम है। उन्होंने आगे कहा कि ओपनिंग बल्लेबाज होने के बावजूद वैभव मध्यक्रम की जिम्मेदारी भी संभाल सकते थे, लेकिन उन्हें अपनी क्षमता साबित करने के लिए पर्याप्त अवसर ही नहीं मिले।
युवा आत्मविश्वास पर मंडराता खतरा
गावस्कर ने अपनी बात रखते हुए यह भी जोड़ा कि इतने कम उम्र के खिलाड़ी का हौसला टूटना नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि 15 साल की उम्र में किसी खिलाड़ी को मात्र तीन मैच के बाद बाहर कर देना बहुत कठोर निर्णय है, जो उस खिलाड़ी के आत्मविश्वास को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। दिग्गज बल्लेबाज ने यह भी सुझाव दिया कि टीम के किसी वरिष्ठ खिलाड़ी को वैभव के पास जाकर उन्हें प्रोत्साहित करना चाहिए और यह स्पष्ट करना चाहिए कि यह उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का अंत नहीं है। टीम प्रबंधन का यह फैसला अब क्रिकेट गलियारों में बड़ी बहस का मुद्दा बन गया है, और सुनील गावस्कर के बयानों ने इस विवाद को और हवा दे दी है कि क्या भारत अपनी भविष्य की युवा पीढ़ी को तैयार करने के मामले में गंभीर है या नहीं।











