क्रिकेट की दुनिया में ज्यादातर उन पारियों और मुकाबलों को याद रखा जाता है जिनमें चौकों और छक्कों की बरसात होती है या फिर बल्लेबाज ताबड़तोड़ शतक जमाते हैं। हालांकि, टेस्ट क्रिकेट का असली सौंदर्य और चुनौती केवल आक्रामक बल्लेबाजी में नहीं, बल्कि प्रतिकूल परिस्थितियों में विकेट बचाए रखने के धैर्य में भी छिपी होती है। 30 जुलाई 2016 को श्रीलंका के ऐतिहासिक गॉल अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में टेस्ट क्रिकेट के इतिहास का एक बेहद अनोखा और अद्भुत रिकॉर्ड कायम हुआ था। इस मैच में ऑस्ट्रेलिया के दो निचले क्रम के बल्लेबाजों ने रन बनाने की परवाह छोड़ केवल क्रीज पर टिके रहने का फैसला किया और लगातार 154 डॉट गेंदें खेलकर दुनिया को हैरान कर दिया।
गॉल का मैदान और इसका टेस्ट इतिहास
श्रीलंका का गॉल स्टेडियम हमेशा से ही टेस्ट मुकाबलों में अपनी खास पिच और स्पिनरों के दबदबे के लिए जाना जाता रहा है। भारतीय टीम के संदर्भ में देखें तो 2015 के दौरे पर इसी मैदान पर टीम इंडिया को हार का सामना करना पड़ा था, जबकि 2017 में भारतीय टीम ने वापसी करते हुए शिखर धवन और चेतेश्वर पुजारा के शानदार शतकों की मदद से विशाल स्कोर खड़ा किया और जीत हासिल की। लेकिन 2016 का ऑस्ट्रेलिया बनाम श्रीलंका टेस्ट मैच एक अलग ही वजह से इतिहास में दर्ज हो गया, जब हार से बचने के लिए ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों ने रक्षात्मक बल्लेबाजी का अद्भुत उदाहरण पेश किया।
हार टालने के लिए क्रीज पर डटे पीटर नेविल और स्टीव ओ'कीफ
इस टेस्ट मैच के पांचवें और अंतिम दिन ऑस्ट्रेलियाई टीम पर करारी हार का संकट मंडरा रहा था। श्रीलंकाई स्पिनरों की फिरकी के सामने ऑस्ट्रेलियाई ऊपरी क्रम ध्वस्त हो चुका था और मैच बचाने की राह बेहद कठिन नजर आ रही थी। ऐसे मुश्किल क्षणों में विकेटकीपर बल्लेबाज पीटर नेविल और स्पिन गेंदबाज स्टीव ओ'कीफ क्रीज पर उतरे। उस समय दोनों खिलाड़ियों का उद्देश्य स्कोरबोर्ड को आगे बढ़ाना नहीं, बल्कि किसी भी तरह हर ओवर निकालकर मैच को ड्रॉ की ओर ले जाना था।
25.4 ओवर तक लगातार 154 डॉट बॉल का महा-रिकॉर्ड
पीटर नेविल और स्टीव ओ'कीफ की जोड़ी ने श्रीलंकाई गेंदबाजों के खिलाफ रक्षात्मक तकनीक की एक मजबूत दीवार खड़ी कर दी। दोनों ने मिलकर लगातार 154 डॉट गेंदें खेलीं, यानी 25.4 ओवरों तक एक भी रन नहीं बनने दिया। क्रिकेट के मैदान पर जहां बल्लेबाज हर मौके पर सिंगल चुराने की फिराक में रहते हैं, वहां 25 से अधिक ओवरों तक बिना कोई रन बनाए गेंद को सिर्फ ब्लॉक करते जाना मानसिक सहनशक्ति और अनुशासन का एक अनूठा उदाहरण था।
इतिहास की सबसे धीमी 100 से अधिक गेंदों की साझेदारी
इस मैराथन रक्षात्मक प्रयास के दौरान दोनों बल्लेबाजों ने कुल मिलाकर 174 गेंदों का सामना किया और महज 4 रन जोड़े। इस दौरान उनकी साझेदारी का रन-रेट 0.13 रन प्रति ओवर रहा, जो टेस्ट क्रिकेट इतिहास में 100 से अधिक गेंदों की किसी भी साझेदारी के लिए दर्ज किया गया सबसे कम रन-रेट का विश्व रिकॉर्ड बन गया। यद्यपि ऑस्ट्रेलिया की टीम इस मुकाबले को ड्रॉ कराने में सफल नहीं हो सकी और श्रीलंका ने अंत में मैच अपने नाम कर लिया, लेकिन नेविल और ओ'कीफ की इस जुझारू पारी की सराहना पूरी दुनिया के क्रिकेट प्रेमियों ने की।
आधुनिक क्रिकेट के दौर में इस रिकॉर्ड की अहमियत
आज के समय में जब टी-20 और फटाफट क्रिकेट का बोलबाला है, जहां बल्लेबाज पहली ही गेंद से बड़े शॉट्स खेलने का प्रयास करते हैं, वहां लगातार 154 डॉट गेंदें खेलने का यह रिकॉर्ड अपने आप में अद्वितीय है। प्रतिकूल परिस्थितियों में खुद को झोंक देने और पिच पर टिके रहने का यह प्रयास टेस्ट क्रिकेट के मूल चरित्र को रेखांकित करता है। यह रिकॉर्ड आधुनिक दौर में एक ऐसी उपलब्धि बन चुका है जिसे तोड़ पाना किसी भी बल्लेबाज के लिए लगभग असंभव माना जाता है।



















