गुवाहाटी के बरसापारा क्रिकेट स्टेडियम में 30 सितंबर की रात खेले गए मुकाबले ने एकदिवसीय क्रिकेट में पिचों के मिजाज पर नई बहस छेड़ दी है। मैच में गेंदबाजों की बेबसी साफ नजर आई और बल्लेबाजों के लिए परिस्थितियां पूरी तरह मुफीद रहीं। पहले बल्लेबाजी करते हुए वेस्टइंडीज ने 405 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया, जो उसके एकदिवसीय इतिहास का सबसे बड़ा टोटल है। भारतीय टीम ने इस विशालकाय लक्ष्य को महज औपचारिकता बनाते हुए 39 गेंद शेष रहते हासिल कर लिया और एकदिवसीय क्रिकेट के इतिहास में सबसे बड़ा रन चेज दर्ज किया। इस एकतरफा मुकाबले के बाद भारतीय टीम के हेड कोच गौतम गंभीर ने पिच की प्रकृति को लेकर कड़ा रुख अपनाया है।
हेड कोच ने उठाए पिच की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल
मुकाबला समाप्त होने के बाद मैच के आधिकारिक प्रसारक स्टार स्पोर्ट्स पर बातचीत के दौरान गौतम गंभीर ने पूर्व क्रिकेटर पार्थिव पटेल से चर्चा में अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने इस मुकाबले की तुलना एक तमाशे से करते हुए कहा कि यह खेल के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।
"मैं बल्ले और गेंद के बीच और ज्यादा मुकाबला देखना चाहता हूं।"
गंभीर ने स्पष्ट किया कि 400 से अधिक रनों के मुकाबले टीवी प्रसारकों और सांख्यिकी प्रेमियों को भले ही रोमांचित करते हों, लेकिन यह खेल के दीर्घकालिक भविष्य के लिए नुकसानदेह हैं। उन्होंने तर्क दिया कि जब तक गेंदबाजों के लिए सतह पर कोई मदद नहीं होगी, मुकाबला एकतरफा बना रहेगा और खेल की प्रतिस्पर्धात्मक भावना पूरी तरह खत्म हो जाएगी। उनका मानना है कि पिचों में ऐसा संतुलन अनिवार्य है जहां गेंदबाजों को भी अपनी कला दिखाने का उचित अवसर मिले। इसी मुकाबले में सलामी बल्लेबाज शुभमन गिल ने अपने एकदिवसीय करियर का दूसरा दोहरा शतक जमाते हुए सबसे तेज डबल सेंचुरी का रिकॉर्ड भी अपने नाम दर्ज कराया।
सोशल मीडिया पर दर्शकों और जानकारों की तीखी प्रतिक्रियाएं
सड़क जैसी सपाट पिच पर मैच खत्म होने के बाद विभिन्न सोशल मीडिया मंचों पर प्रशंसकों का आक्रोश फूट पड़ा। दर्शकों ने बरसापारा मैदान की सुविधाओं, पिच की तैयारी और मैच के दौरान मैदान पर दिख रही व्यवस्थाओं की कड़ी आलोचना की। खेल समीक्षक समीप राजगुरु ने सोशल मीडिया मंच X पर पिच क्यूरेशन पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि ऐसे विकेटों पर गेंदबाज पूरी तरह मुकाबले से बाहर हो जाते हैं और पूरा खेल केवल बल्लेबाजों की आपसी जंग बनकर रह जाता है।
वहीं पत्रकार अरणी बसु ने X पर टिप्पणी करते हुए रेखांकित किया कि इस प्रकार के सपाट और असंतुलित विकेट प्रशंसकों को पचास ओवर के प्रारूप से दूर करने का मुख्य कारण बन रहे हैं। तिरुवनंतपुरम के बाद अब गुवाहाटी में भी गेंदबाजों की यह लाचारी देखने को मिली है, जहां गेंद और बल्ले का संघर्ष पूरी तरह नदारद दिखा।
वर्ल्ड कप की तैयारियों और प्राथमिकताओं पर उठती चिंताएं
क्रिकेट विश्लेषकों का मानना है कि जब पिच निर्माण और मैचों के आयोजन से जुड़े फैसले केवल व्यावसायिक हितों और दर्शकों को लुभाने के आधार पर लिए जाने लगें, तो खेल की तकनीकी गुणवत्ता प्रभावित होती है। ऐसे भारी-भरकम स्कोर वाले मुकाबलों से आगामी बड़े टूर्नामेंटों या वर्ल्ड कप की ठोस तैयारी संभव नहीं है। लगातार सपाट पिचों पर खेलने से भारतीय गेंदबाजी आक्रमण को दबाव की परिस्थितियों और प्रतिस्पर्धी पिचों पर खुद को परखने का मौका नहीं मिल पाता है, जो आगे चलकर टीम संतुलन के लिए चुनौती बन सकता है।



















