क्रिकेट के इतिहास में कई ऐसी असाधारण कहानियां दर्ज हैं जहां मैदान पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने वाले खिलाड़ियों का नाम आधिकारिक आंकड़ों से पूरी तरह गायब है। दक्षिण अफ्रीका के घातक तेज गेंदबाज गार्थ ले रॉक्स की कहानी इसका एक सबसे प्रमुख उदाहरण है। 1970 के दशक में अपनी खौफनाक रफ्तार और तीखे बाउंसर्स से वेस्टइंडीज जैसी मजबूत टीम के दिग्गज बल्लेबाजों को खौफ में रखने वाले ले रॉक्स के नाम के आगे जब आईसीसी के आधिकारिक रिकॉर्ड देखे जाते हैं, तो वहां शून्य टेस्ट और शून्य विकेट दर्ज मिलता है।
रंगभेद की नीति और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट पर प्रतिबंध
गार्थ ले रॉक्स का जन्म 1955 में दक्षिण अफ्रीका में हुआ था। वह दौर ऐसा था जब दक्षिण अफ्रीका में जारी रंगभेद की नीति के कारण अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने वहां की क्रिकेट टीम पर पूर्ण अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगा रखा था। इस राजनीतिक परिस्थिति के कारण ले रॉक्स को अपने पूरे करियर के दौरान दक्षिण अफ्रीका के लिए कोई भी आधिकारिक टेस्ट या वनडे मैच खेलने का अवसर नहीं मिला। यही वजह है कि रिकॉर्ड किताबों में उनका अंतरराष्ट्रीय करियर पूरी तरह से खाली नजर आता है, जबकि वे अपने समय के सबसे खतरनाक तेज गेंदबाजों में गिने जाते थे।
कैरी पैकर की वर्ल्ड सीरीज क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन
जब दक्षिण अफ्रीकी खिलाड़ियों के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच के दरवाजे बंद थे, तब 1977 में ऑस्ट्रेलियाई मीडिया टायकून कैरी पैकर ने एक कमर्शियल विद्रोही लीग, वर्ल्ड सीरीज क्रिकेट की शुरुआत की। पैकर दुनिया भर के सबसे बेहतरीन और आक्रामक तेज गेंदबाजों को एक साथ लाना चाहते थे। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के इस प्रतिभाशाली गेंदबाज को अपनी वर्ल्ड इलेवन टीम में शामिल किया। इस मंच पर गार्थ ले रॉक्स ने अपनी गति, आक्रामकता और सटीक बाउंसर्स के दम पर वेस्टइंडीज और ऑस्ट्रेलिया के स्टार बल्लेबाजों के पसीने छुड़ा दिए।
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले गए एक मुकाबले में ले रॉक्स ने अपनी घातक गेंदबाजी का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। उन्होंने महज 5 ओवरों की गेंदबाजी में केवल 6 रन खर्च करके 3 मुख्य बल्लेबाजों को आउट किया, जिनमें दिग्गज बल्लेबाज ग्रेग चैपल और इयान चैपल के नाम भी शामिल थे। पूरी सीरीज में उनके इस बेजोड़ प्रदर्शन के लिए उन्हें मैन ऑफ द सीरीज के खिताब से सम्मानित किया गया।
आधुनिक क्रिकेट के बदलाव और मिटाए गए रिकॉर्ड्स
वर्ल्ड सीरीज क्रिकेट ने क्रिकेट के स्वरूप को बदलने में बड़ी भूमिका निभाई। इसी प्रतियोगिता के माध्यम से पहली बार रंगीन जर्सी, फ्लडलाइट्स में खेले जाने वाले डे-नाइट मैच और सफेद गेंद का इस्तेमाल शुरू हुआ। हालांकि, आईसीसी द्वारा इस सीरीज को आधिकारिक दर्जा नहीं दिए जाने के कारण इसमें बनाए गए सभी विकेट, रन और शतक आधिकारिक इतिहास से पूरी तरह खारिज कर दिए गए। इसके चलते गार्थ ले रॉक्स का यह बेहतरीन प्रदर्शन भी कागजी रिकॉर्ड्स में जगह नहीं बना सका।
रेबेल टेस्ट मैचों में हैट्रिक और 59 विकेट
वर्ल्ड सीरीज क्रिकेट के अलावा गार्थ ले रॉक्स ने दक्षिण अफ्रीका के लिए अनौपचारिक रेबेल टेस्ट मैच भी खेले। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया XI जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ कुल 15 रेबेल टेस्ट मुकाबलों में हिस्सा लिया और अपनी गेंदबाजी का जलवा बिखेरते हुए 59 विकेट चटकाए। इन मुकाबलों में ऑस्ट्रेलिया XI के खिलाफ ली गई एक शानदार हैट्रिक भी शामिल थी। हालांकि, इन मैचों को आधिकारिक मान्यता न मिलने के कारण ये आंकड़े भी आईसीसी के रिकॉर्ड बुक्स में दर्ज नहीं हो सके।
महान तेज गेंदबाजों की कतार में दर्ज होने से चूका नाम
उस दौर के क्रिकेट प्रशंसक और ले रॉक्स के खिलाफ खेलने वाले समकालीन बल्लेबाज इस बात को स्वीकार करते हैं कि ले रॉक्स अपने दौर के सबसे अजेय तेज गेंदबाजों में से एक थे। यदि उनके द्वारा रेबेल टेस्ट और वर्ल्ड सीरीज क्रिकेट में बनाए गए रिकॉर्ड्स को आधिकारिक मान्यता मिलती, तो आज उनका नाम मैल्कम मार्शल, डेनिस लिली और इमरान खान जैसे महानतम तेज गेंदबाजों की सूची में सबसे ऊपर गिना जाता। लेकिन राजनीतिक और प्रशासनिक वजहों से उनका करियर शून्य रिकॉर्ड के साथ सिमट कर रह गया।



















