देशभर के सरकारी और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में आगामी 28 से 30 सितंबर 2026 तक कामकाज ठप रहने की संभावना है। बैंकिंग क्षेत्र के कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रमुख संगठन यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) ने लंबित मांगों को लेकर तीन दिवसीय देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। इस विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर भारतीय स्टेट बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, केनरा बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया जैसे दिग्गज सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने परिचालन संबंधी परामर्श जारी कर ग्राहकों को सचेत किया है कि शाखा स्तर पर बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।
मंत्रालय में आपात बैठक और निरंतरता की रणनीति
हड़ताल के दौरान आम जनता को होने वाली असुविधा को न्यूनतम करने और आवश्यक बैंकिंग गतिविधियों को चालू रखने के उद्देश्य से वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) सक्रिय हो गया है। वित्तीय सेवा विभाग के सचिव सोमवार, 21 सितंबर 2026 को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ एक अहम समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करने वाले हैं।
इस उच्चस्तरीय बैठक का मुख्य एजेंडा संभावित बाधाओं से निपटने के लिए आकस्मिक कार्ययोजना तैयार करना है। सरकार और बैंक प्रबंधन का प्रयास है कि शाखाओं में ताले लटकने की स्थिति में भी डिजिटल माध्यमों, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल भुगतान प्रणालियों और एटीएम नेटवर्क के जरिए बुनियादी लेनदेन बिना किसी रुकावट के जारी रखे जा सकें।
हड़ताल में शामिल यूनियनें और आंदोलन की रूपरेखा
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस सात प्रमुख संगठनों का एक संयुक्त मंच है, जिसमें एआईबीईए, एआईबीओसी, बीईएफआई, एनसीबीई, एआईबीओए, आईएनबीईएफ और आईएनबीओसी शामिल हैं। यूएफबीयू का दावा है कि वह देश के कुल बैंकिंग कार्यबल के लगभग 90 प्रतिशत कर्मचारियों और अधिकारियों का प्रतिनिधित्व करता है।
कर्मचारियों का यह आंदोलन अचानक नहीं शुरू हुआ है। इससे पहले संगठन ने 11 सितंबर 2026 को एक दिवसीय विरोध दर्ज कराया था। अब उसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए 28, 29 और 30 सितंबर को तीन दिनों की हड़ताल तय की गई है। इतना ही नहीं, बैंक यूनियनों ने यह चेतावनी भी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं लिया गया, तो 26 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी जाएगी।
प्रमुख मांगें: 5 दिवसीय बैंकिंग और पेंशन बहाली
यूनियनों के एजेंडे में सबसे बड़ा मुद्दा बैंकों में 5 दिवसीय कार्य सप्ताह की व्यवस्था लागू करना है। वर्तमान समय में देश के बैंकों में महीने के पहले और तीसरे शनिवार को पूरे छह दिन काम करना पड़ता है, जबकि केवल दूसरे और चौथे शनिवार को ही रविवार के साथ अवकाश मिलता है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि काम के बढ़ते दबाव और निजी जीवन में संतुलन बनाए रखने के लिए सप्ताह में केवल पांच कामकाजी दिन होने चाहिए।
इसके अतिरिक्त, यूनियनें सरकार की परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना का कड़ा विरोध कर रही हैं। उनका आरोप है कि यह योजना एकतरफा और भेदभावपूर्ण है, जिसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए और द्विपक्षीय बातचीत के आधार पर संशोधित किया जाना चाहिए। यूनियनों की अन्य प्रमुख मांगों में सभी पेंशनभोगियों के लिए महंगाई भत्ता फॉर्मूले में सुधार, समग्र पेंशन व्यवस्था को सुदृढ़ करना और कर्मचारियों को नेशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस) से पुरानी पेंशन योजना में लौटने का विकल्प देना शामिल है।
यूनियन नेताओं और अंतरराष्ट्रीय संगठनों का रुख
इंडियन नेशनल बैंक ऑफिसर्स कांग्रेस (आईएनबीओसी) के महासचिव प्रेम मक्कर ने स्थिति की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत में बैंक अधिकारी और कर्मचारी गंभीर दबाव में काम कर रहे हैं, क्योंकि बढ़ते व्यापार आकार, सभी स्तरों पर कर्मचारियों की भारी कमी, अनुपालन जिम्मेदारियों और प्रदर्शन लक्ष्यों के चलते कार्यभार अत्यधिक बढ़ गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दो साल पहले सप्ताह में 5 दिन काम करने के संबंध में जो प्रतिबद्धता जताई गई थी, वह आज भी अधूरी है। उनके अनुसार, यूएफबीयू द्वारा दिखाई गई एकजुटता कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा और सुरक्षित कार्य वातावरण हासिल करने के संकल्प को दर्शाती है।
इस बीच, यूएनआई ग्लोबल यूनियन संगठन से जुड़े घटनाक्रम बताते हैं कि बैंक कर्मियों का यह विवाद बुनियादी मुद्दों पर वर्षों से हो रही देरी का नतीजा है। पांच दिवसीय कार्य सप्ताह की मांग का आधार 2024 का एक समझौता है जिसे अब तक लागू नहीं किया जा सका है, जबकि सरकारी प्रोत्साहन योजना पर यूनियनों की आपत्तियां 2020 से लंबित हैं।
यूएनआई एशिया एंड पैसिफिक के क्षेत्रीय सचिव राजेंद्र आचार्य ने भी भारतीय बैंक यूनियनों के संघर्ष के प्रति एकजुटता जताई है। उन्होंने कहा कि यह सम्मानजनक कार्य परिस्थितियों, कार्य-जीवन संतुलन और टिकाऊ बैंकिंग क्षेत्र के लिए पूरी तरह से उचित मांग है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कर्मचारियों को पहले से तय समझौते के क्रियान्वयन के लिए बार-बार औद्योगिक हड़ताल का सहारा नहीं लेना पड़ना चाहिए, और उनका संगठन उचित कार्य सप्ताह के अधिकार के समर्थन में मजबूती से खड़ा है।
प्रमुख सार्वजनिक बैंकों की एडवाइजरी और आरबीआई की स्थिति
भारतीय रिजर्व बैंक की अवकाश सूची के अनुसार 28 से 30 सितंबर के बीच कोई आधिकारिक बैंक अवकाश घोषित नहीं है। इसके बावजूद, जमीनी स्तर पर कर्मचारियों की अनुपस्थिति के कारण शाखाओं का संचालन प्रभावित होने की पूरी संभावना है। इसे देखते हुए प्रमुख ऋणदाताओं ने अपने ग्राहकों को सचेत किया है।
भारतीय स्टेट बैंक ने अपनी आधिकारिक सलाह में स्पष्ट किया है कि बैंक ने हड़ताल के दिनों में शाखाओं और कार्यालयों के सामान्य कामकाज को बनाए रखने के लिए आवश्यक प्रबंध किए हैं, फिर भी काम पर असर पड़ने की संभावना बनी रहेगी। इसी तरह यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने कहा कि देशभर में उसकी शाखाओं और प्रशासनिक कार्यालयों का कामकाज बाधित हो सकता है। बैंक ने मौजूदा दिशानिर्देशों के तहत सुचारू संचालन के कदम उठाए हैं, हालांकि इस हड़ताल से होने वाले वास्तविक प्रभाव का सटीक आकलन अभी नहीं किया जा सकता।
बैंक ऑफ बड़ौदा और केनरा बैंक ने भी इसी प्रकार के परामर्श जारी किए हैं। दोनों संस्थानों का कहना है कि हड़ताल प्रभावी होने की स्थिति में कार्यालयों और शाखाओं के दैनिक कार्यों पर असर पड़ सकता है, हालांकि सेवाएं सामान्य रखने के लिए सभी आवश्यक प्रशासनिक प्रयास किए जा रहे हैं।

















