राजस्थान के बीकानेर नगर निगम में नए महापौर के चयन के लिए राजनीतिक हलचल चरम पर पहुंच चुकी है। नगर निगम मुख्यालय में सुबह 10 बजे से मतदान की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिसके तुरंत बाद मतों की गिनती कर अंतिम परिणाम घोषित किए जाएंगे। इस महत्वपूर्ण मुकाबले में मुख्य मुकाबला दो प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच केंद्रित है। कांग्रेस पार्टी ने महापौर पद के लिए अनिल कल्ला पर भरोसा जताते हुए उन्हें चुनावी मैदान में उतारा है। इसके विपरीत, भारतीय जनता पार्टी ने सुरेंद्र सिंह शेखावत को अपना उम्मीदवार घोषित कर मुकाबले को पूरी तरह रोचक बना दिया है। नगर निगम के कुल 80 सदस्यों वाले सदन में संख्या बल का गणित काफी नाजुक मोड़ पर खड़ा है, जिससे अंतिम परिणाम आने तक किसी भी तरह के कयास लगाना कठिन बना हुआ है।
सदन का दलीय ढांचा और बहुमत का गणित
बीकानेर नगर निगम के 80 सदस्यीय सदन में विभिन्न दलों की मौजूदा स्थिति पर नजर डालें तो कांग्रेस पार्टी 42 पार्षदों के समर्थन के साथ सबसे आगे नजर आती है। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी के पास वर्तमान में 27 पार्षद हैं। सदन में निर्दलीय एवं अन्य श्रेणियों के 10 पार्षद मौजूद हैं, जबकि राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी यानी आरएलपी का एक पार्षद सदन का हिस्सा है। नगर निगम में बहुमत का जादुई आंकड़ा हासिल करने के लिए कम से कम 41 पार्षदों के समर्थन की अनिवार्यता है। इस लिहाज से देखा जाए तो कांग्रेस पार्टी आवश्यक संख्या से केवल एक सीट आगे खड़ी है। संख्या बल के आधार पर कांग्रेस की स्थिति मजबूत दिखती है, लेकिन केवल एक सीट का फासला किसी भी अप्रत्याशित उलटफेर की आशंका को हमेशा खुला रखता है। दूसरी तरफ भाजपा के पास 27 सीटें हैं और उसे बहुमत तक पहुंचने के लिए 14 अतिरिक्त मतों की आवश्यकता है।
निर्दलीयों और अन्य पार्षदों के भरोसे भाजपा की रणनीति
सदन में संख्या बल के लिहाज से काफी पीछे रहने के बावजूद भारतीय जनता पार्टी मुकाबले से पीछे हटने को तैयार नहीं है। भाजपा नेतृत्व ने 10 अन्य तथा एक आरएलपी पार्षद को साधकर पूरे चुनावी गणित को अपने पक्ष में मोड़ने की सुनियोजित रणनीति तैयार की है। भाजपा खेमे का दावा है कि कई गैर-कांग्रेसी और निर्दलीय पार्षद उनके प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह शेखावत के पक्ष में मतदान करने के लिए सहमत हो चुके हैं। यदि भाजपा इन 11 पार्षदों का समर्थन जुटाने में सफल भी रहती है, तब भी उसे अपना आंकड़ा 38 तक ही पहुंचाने में सफलता मिलेगी। ऐसे में भाजपा को जीत दर्ज करने के लिए प्रतिद्वंद्वी खेमे में भी सेंधमारी की उम्मीद रखनी होगी। भाजपा की पूरी उम्मीद इस बात पर टिकी है कि मतदान के गोपनीय स्वरूप का लाभ उठाकर अतिरिक्त पार्षदों का विश्वास हासिल किया जा सके।
कांग्रेस की एकजुटता और क्रॉस वोटिंग की आशंका
दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी के सामने अपने 42 पार्षदों को एकजुट बनाए रखना सबसे बड़ी परीक्षा साबित हो रहा है। यद्यपि कांग्रेस के पास 41 के बहुमत के आंकड़े से एक पार्षद अधिक है, लेकिन किसी भी प्रकार की क्रॉस वोटिंग या किसी पार्षद के मतदान प्रक्रिया से अनुपस्थित रहने पर पार्टी का समीकरण पूरी तरह बिगड़ सकता है। अपने खेमे में किसी भी तरह के बिखराव या असंतोष की खबरों को खारिज करने के लिए कांग्रेस ने पार्षदों की एकजुटता दर्शाने वाली सामूहिक तस्वीरें जारी की हैं। इन तस्वीरों के जरिए यह स्पष्ट संदेश देने का प्रयास किया गया है कि पार्टी के सभी 42 पार्षद पूरी तरह अनुशासित और एकजुट हैं। इसके बावजूद पार्टी का रणनीतिकार दल लगातार उन निर्दलीय व अन्य सदस्यों पर भी नजर बनाए हुए है, जिनका रुख अब तक सार्वजनिक रूप से तय नहीं हुआ है।
नेताओं को पुलिस नोटिस और प्रशासनिक दबाव के आरोप
मतदान से ठीक पहले बीकानेर की स्थानीय राजनीति में उस समय नया मोड़ आ गया जब कांग्रेस संगठन से जुड़े कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों को नोटिस जारी होने की बात सामने आई। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक कांग्रेस पार्टी के एक अहम पदाधिकारी को एसपी और एसीपी स्तर से विधिवत नोटिस भेजकर सुबह 10 बजे पूछताछ के लिए तलब किया गया। इसके अतिरिक्त पार्टी की स्थानीय संगठन इकाई तथा कांग्रेस से जुड़े नेता अरुण एवं राजीव टंडन को भी प्रशासनिक नोटिस थमाए जाने की जानकारी मिली है। इन नोटिसों के सामने आने के बाद कांग्रेस ने कड़ा ऐतराज जताते हुए आरोप लगाया है कि स्थानीय पुलिस तंत्र का अनुचित इस्तेमाल कर उनके पार्षदों और संगठन के प्रमुख नेताओं पर मानसिक दबाव बनाया जा रहा है। दूसरी ओर, भाजपा खेमे से भी कांग्रेस नेताओं को नोटिस दिए जाने के घटनाक्रम की पुष्टि की गई है, हालांकि इन आरोपों और नोटिसों के कानूनी कारणों की कोई स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
मतगणना के साथ ही तय होगा नगर निगम का भविष्य
नगर निगम सभागार में सुबह 10 बजे मतदान शुरू होने के साथ ही दोनों दलों के रणनीतिकारों की धड़कनें तेज हो गई हैं। मतदान की प्रक्रिया पूरी होते ही मतपेटियों को खोला जाएगा और तुरंत मतगणना का काम शुरू कर दिया जाएगा। दोपहर तक यह तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी कि क्या कांग्रेस के 42 पार्षदों की ताकत अनिल कल्ला को महापौर की कुर्सी पर बैठाने में सफल रहती है, या फिर भाजपा के सुरेंद्र सिंह शेखावत निर्दलीय पार्षदों और गुप्त समर्थन के सहारे पासा पलटने में कामयाब होते हैं। बीकानेर नगर निगम के इस मुकाबले में हर एक वोट का महत्व इतना अधिक है कि एक भी पार्षद का इधर-उधर होना पूरे नतीजे की दिशा तय कर देगा।



















