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आईपीएल का आक्रामक रवैया या केवल भ्रम? गौतम गंभीर की कोचिंग में विदेशी पिचों पर भारतीय बल्लेबाजों के संघर्ष की असल वजहक्रिकेट
2 घंटे पहले· 2

आईपीएल का आक्रामक रवैया या केवल भ्रम? गौतम गंभीर की कोचिंग में विदेशी पिचों पर भारतीय बल्लेबाजों के संघर्ष की असल वजह

टी20 क्रिकेट में आईपीएल के आक्रामक बल्लेबाजी मॉडल और विदेशी पिचों की कठोर वास्तविकताओं के बीच बढ़ती खाई ने भारतीय बल्लेबाजों की तकनीक और उनकी परिस्थितियों के अनुकूल ढलने की क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

संदीप यादवसंदीप यादवखेल संवाददाता 6 मिनट पढ़ें AI के लिए
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सफेद गेंद के क्रिकेट में भारतीय पुरुष टीम ने हाल के वर्षों में जो आक्रामक और निडर रवैया अपनाया है, उसका श्रेय आमतौर पर इंडियन प्रीमियर लीग यानी आईपीएल (IPL) को दिया जाता है। इस लीग ने देश को एक से बढ़कर एक आक्रामक खिलाड़ी दिए हैं और हर साल टूर्नामेंट से कोई न कोई नया पावर-हिटर उभरकर सामने आता है। लेकिन यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि खेल विशेषज्ञों द्वारा ऐसे खिलाड़ियों के लिए 'बल्लेबाज' के बजाय 'हिटर' शब्द का इस्तेमाल किया जाना बेहद विचारणीय है। पिछले कुछ समय से कई पूर्व क्रिकेटरों ने आईपीएल के कारण भारतीय बल्लेबाजों की तकनीक और बल्लेबाजी की गिरती कला को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। आज के युवा खिलाड़ी मैदान पर उतरकर केवल इस बात पर ध्यान देते हैं कि वे एक पारी में कितने छक्के लगा सकते हैं। खेल के इस बदलते स्वरूप की शुरुआत आईपीएल 2023 में 'इम्पैक्ट प्लेयर' नियम के लागू होने से काफी पहले ही हो चुकी थी। पहले भारतीय बल्लेबाजों पर यह आरोप लगता था कि वे शुरुआत से तेजी से रन बनाने का प्रयास नहीं करते हैं, जिसे उनके इरादे की कमी माना जाता था। लेकिन अब स्थिति पूरी तरह से बदल चुकी है, जहां तकनीक और सूझबूझ को दरकिनार कर केवल आक्रामक रवैये पर ही पूरा ध्यान केंद्रित कर दिया गया है।

आईपीएल का बढ़ता रन रेट और अंतरराष्ट्रीय स्तर से इसकी दूरी

इस बदलाव को बेहतर तरीके से समझने के लिए हमें आंकड़ों पर नजर डालनी होगी। साल 2021 के बाद से आईपीएल का औसत रन रेट 8.05 से बढ़कर 9.88 तक पहुंच गया है। अगर हम इसे औसत स्कोर के रूप में देखें, तो साल 2021 में इस लीग का औसत स्कोर जहां 161 रन था, वहीं साल 2026 में यह बढ़कर 197 रन हो गया। यह 36 रनों का एक बहुत बड़ा अंतर है। साल 2021 के आंकड़ों के हिसाब से इतने रन बनाने के लिए किसी भी टीम को लगभग 3.3 ओवर खेलने पड़ते थे, जिससे साफ पता चलता है कि रन बनाना अब कितना आसान हो गया है। असली चिंता की बात यह है कि आईपीएल और दुनिया के अन्य टी20 मैचों के बीच की खाई लगातार चौड़ी होती जा रही है। हालांकि दुनिया भर की विभिन्न क्रिकेट लीगों में बड़े स्कोर बन रहे हैं, लेकिन आईपीएल की गति और रन बनाने के तरीके की तुलना किसी अन्य टूर्नामेंट से नहीं की जा सकती। साल 2025 में दुनिया भर में खेले गए सभी टी20 मैचों का औसत रन रेट 8.42 था, जबकि आईपीएल में यह आंकड़ा 9.62 दर्ज किया गया था, जिसमें कमजोर टीमों के खिलाफ मुकाबले भी शामिल थे। साल 2026 में भी यह फासला कम नहीं हुआ, जहां वैश्विक टी20 मैचों का औसत रन रेट 8.55 रहा, वहीं आईपीएल का रन रेट 9.88 पर पहुंच गया। इस भारी अंतर का सबसे बड़ा कारण भारतीय पिचों का पूरी तरह से सपाट होना और मैदानों की बाउंड्री का बेहद छोटा होना है।

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विदेशी पिचों पर भारतीय बल्लेबाजी की खुली पोल

भारतीय बल्लेबाजों की इस कमजोरी का खुलासा हाल ही में आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ मैचों में हुआ, जहां टीम को दोनों ही श्रृंखलाओं में 0-2 से करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। इस दौरान भारतीय टीम ने अपना दूसरा सबसे कम टी20 स्कोर दर्ज किया और उसे अपने इतिहास की सबसे बड़ी हार में से एक का सामना करना पड़ा। साल 2018 से आईपीएल खेल रहे इंग्लैंड के तेज गेंदबाज जॉफ्रा आर्चर ने इस स्थिति पर सटीक टिप्पणी की है। उन्होंने बताया कि आईपीएल में जहां 200 रनों का स्कोर भी सुरक्षित नहीं माना जाता, वहीं अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 200 रन एक बेहद मजबूत स्कोर होता है जिसे आसानी से बचाया जा सकता है। इंग्लैंड की पिचों पर गेंदबाजों को अपनी गलतियों को सुधारने का मौका मिलता है, जबकि आईपीएल में सपाट पिचों और छोटी बाउंड्री के कारण गेंदबाजों के पास गलती की कोई गुंजाइश नहीं होती। कुछ लोग तर्क दे सकते हैं कि टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भी बड़े स्कोर बने थे, लेकिन वह टूर्नामेंट एक विशेष परिस्थिति में खेला गया था। जुलाई 2024 में गौतम गंभीर के मुख्य कोच बनने के बाद से भारतीय टीम को मुख्य रूप से एशियाई परिस्थितियों में खेलने का अवसर मिला है, जिससे बल्लेबाजों की कमजोरियां सामने नहीं आ पाई थीं।

सपाट पिचों का भ्रम और अंतरराष्ट्रीय स्तर की चुनौतियां

साल 2024 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ जीत दर्ज करने के बाद, जो कि बहुत मजबूत टीम नहीं थी, भारतीय बल्लेबाज उपमहाद्वीप से बाहर संघर्ष करते दिखे हैं। एशिया कप 2025 में भारतीय टीम एक संयुक्त इकाई के रूप में प्रदर्शन करने में पूरी तरह विफल रही। हालांकि शिवम दुबे, अभिषेक शर्मा और तिलक वर्मा जैसे खिलाड़ियों ने व्यक्तिगत तौर पर कुछ अच्छी पारियां खेलीं, लेकिन पूरी टीम पूरे टूर्नामेंट में केवल एक बार ही 200 रनों का आंकड़ा पार करने में सफल रही। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर भी अभिषेक शर्मा को छोड़कर देश के लगभग सभी शीर्ष बल्लेबाज वहां की उछालभरी परिस्थितियों में बेबस नजर आए। तीन मैचों की श्रृंखला में भारत की पहली पारी के स्कोर क्रमशः 125, 186 और 167 रन रहे। आयरलैंड और इंग्लैंड के दौरों ने यह साफ कर दिया है कि जैसे ही भारतीय बल्लेबाजों को बल्लेबाजी के अनुकूल सपाट विकेट नहीं मिलते, वे रन बनाने के लिए संघर्ष करने लगते हैं। यह पूरी तरह से खिलाड़ियों की गलती नहीं है, क्योंकि आईपीएल के दौरान लगभग सभी मैदानों पर एक जैसी सपाट पिचें तैयार की जाती हैं। पूरी लीग में केवल गुजरात टाइटंस ही एक ऐसी टीम है जो गेंदबाजों के अनुकूल पिच तैयार करती है। बाकी मैदानों पर युजवेंद्र चहल और राशिद खान जैसे अनुभवी स्पिनरों को भी कोई मदद नहीं मिलती। इसके विपरीत, इंग्लैंड की परिस्थितियों में विल जैक्स जैसे गेंदबाज भारतीय बल्लेबाजों को आसानी से अपनी फिरकी में फंसा लेते हैं। भारत में जो गेंदें मिसहिट होने के बाद भी बाउंड्री के पार चली जाती हैं, वे ही गेंदें इंग्लैंड और आयरलैंड के बड़े मैदानों पर आसानी से कैच में तब्दील हो जाती हैं।

इम्पैक्ट प्लेयर नियम का नुकसान और तकनीकी कमियां

आईपीएल में लागू 'इम्पैक्ट प्लेयर' नियम ने भारतीय बल्लेबाजों को और अधिक गैर-जिम्मेदार बना दिया है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में ऐसा कोई नियम नहीं होता, जहां आप यह सोचकर खेल सकें कि आपके बाद एक अतिरिक्त बल्लेबाज टीम को संभाल लेगा। इस नियम के कारण बल्लेबाज बिना किसी डर के गैर-जिम्मेदाराना शॉट खेलते हैं, जिसकी आदत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी पड़ती है। उदाहरण के लिए, तिलक वर्मा की स्पिन के खिलाफ कमजोरी जगजाहिर है, लेकिन आईपीएल में उन्हें स्तरीय स्पिन गेंदबाजी का सामना नहीं करना पड़ता। ईशान किशन भी अक्सर कठिन और घूमती पिचों पर लाचार दिखाई देते हैं, जैसा कि आईपीएल 2026 और फिर आयरलैंड एवं इंग्लैंड के दौरों पर देखने को मिला। इसी तरह, अक्षर पटेल की तेज गेंदबाजों के खिलाफ कमजोरी के बावजूद उन्हें अक्सर पावरप्ले के दौरान ऊपरी क्रम में भेजा जाता है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक असफल रणनीति साबित होती है। ट्रेंट ब्रिज में मिली हार के बाद मुख्य कोच गौतम गंभीर ने भी स्वीकार किया कि टीम परिस्थितियों को समझने में पूरी तरह विफल रही। लगातार चार मैचों में टीम ने एक ही जैसी रणनीतिक गलतियां दोहराई हैं, चाहे वह खराब शॉट चयन हो या परिस्थितियों का गलत आकलन। भारतीय टीम को यह समझना होगा कि हर पिच अलग होती है और हवा की दिशा तथा मैदान का आकार जैसे छोटे-छोटे कारक भी मैच के परिणाम पर बड़ा असर डालते हैं। भारत को जल्द से जल्द आईपीएल की इन आसान आदतों से बाहर निकलना होगा, ताकि वे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खुद को ढाल सकें।

इसका आप पर असर

  • भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों के लिए: यह विश्लेषण दर्शाता है कि आईपीएल में बड़े स्कोर देखने का रोमांच तो है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जीत के लिए टीम को परिस्थितियों के अनुकूल ढलना होगा।
  • युवा क्रिकेटरों के लिए: सिर्फ चौके-छक्के लगाने के बजाय कठिन पिचों पर क्रीज पर टिकने और तकनीक को मजबूत करने की जरूरत है।

सवाल-जवाब

विदेशी पिचों पर भारतीय बल्लेबाजों के संघर्ष करने का मुख्य कारण क्या है?
इसका मुख्य कारण आईपीएल की सपाट पिचें, भारतीय मैदानों की छोटी बाउंड्री और विदेशी पिचों पर मिलने वाली स्विंग और सीम मूवमेंट की कमी है।
साल 2021 और 2026 के बीच आईपीएल के औसत रन रेट में क्या बदलाव आया है?
आईपीएल का औसत रन रेट साल 2021 में 8.05 से बढ़कर साल 2026 में 9.88 हो गया है, जिससे औसत स्कोर 161 से बढ़कर 197 पहुंच गया है।
'इम्पैक्ट प्लेयर' नियम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन को कैसे प्रभावित करता है?
यह नियम टीमों को एक अतिरिक्त बल्लेबाज खिलाने की अनुमति देता है, जिससे बल्लेबाजों का डर खत्म हो जाता है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में यह सुरक्षा कवच नहीं मिलता।
किस आईपीएल टीम को गेंदबाजों के अनुकूल पिच तैयार करने के लिए जाना जाता है?
पूरी लीग में केवल गुजरात टाइटंस को ही गेंदबाजों की मदद करने वाली पिचें तैयार करने के लिए जाना जाता है।
ट्रेंट ब्रिज में मिली हार के बाद मुख्य कोच गौतम गंभीर ने क्या कहा?
गौतम गंभीर ने स्वीकार किया कि टीम परिस्थितियों को समझने में पूरी तरह विफल रही और हवा की दिशा व मैदान के आकार जैसे कारकों के महत्व को रेखांकित किया।
संदीप यादव
लेखक के बारे मेंसंदीप यादवखेल संवाददाता नई दिल्ली
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संदीप यादव एक खेल संवाददाता हैं जो दुनियाभर के लाइव मैच, टूर्नामेंट, खिलाड़ियों के अपडेट और खेल ख़बरों को कवर करते हैं। वे बड़े खेल आयोजनों की तेज़ और दिलचस्प कवरेज देते हैं।

संदीप यादव एक खेल संवाददाता हैं जो राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय खेलों — क्रिकेट, फ़ुटबॉल, टेनिस, एथलेटिक्स और बड़े खेल आयोजनों — की कवरेज में विशेषज्ञता रखते हैं। वे लाइव मैच, खिलाड़ियों के प्रदर्शन, टीम अपडेट, टूर्नामेंट, रैंकिंग और ब्रेकिंग खेल ख़बरों पर रिपोर्ट करते हैं। गति, सटीकता और विश्लेषण पर ज़ोर देते हुए संदीप वैश्विक खेल जगत के अहम पलों और घटनाक्रमों को दर्शाने वाली दिलचस्प खेल कहानियाँ देते हैं। उनकी रिपोर्टिंग में मैच रिपोर्ट, मैच से पहले और बाद का विश्लेषण, खिलाड़ी प्रोफ़ाइल और बड़ी चैम्पियनशिप व लीग की कवरेज शामिल है।

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