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जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद सिराज से सीख रहे गुरनूर बरार, ऑल-फॉर्मेट पेसर बनने का है लक्ष्यक्रिकेट
1 सित॰ 2026, 2:34 pm (11 दिन पहले)· 2

जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद सिराज से सीख रहे गुरनूर बरार, ऑल-फॉर्मेट पेसर बनने का है लक्ष्य

तेज गेंदबाज गुरनूर बरार ने दलीप ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन के बीच खुलासा किया है कि जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद सिराज जैसे दिग्गजों के साथ समय बिताने से उनकी गेंदबाजी में निरंतरता आई है। उनका मुख्य लक्ष्य सभी प्रारूपों में प्रभावी प्रदर्शन करने वाला गेंदबाज बनना है।

भारतीय घरेलू क्रिकेट और दलीप ट्रॉफी में अपनी रफ्तार और धारदार गेंदबाजी से सुर्खियां बटोर रहे तेज गेंदबाज गुरनूर बरार इन दिनों अपने खेल को एक नए स्तर पर ले जाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। पिछले कुछ महीनों के दौरान भारतीय टीम के वरिष्ठ तेज गेंदबाजों जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद सिराज के साथ ड्रेसिंग रूम साझा करने और अभ्यास करने का उन्हें जो मौका मिला, उसने उनकी गेंदबाजी की लंबाई में उल्लेखनीय सुधार किया है। इस युवा खिलाड़ी का स्पष्ट कहना है कि उनका सबसे बड़ा सपना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक ऐसा ऑल-फॉर्मेट पेसर बनना है जो लंबे और कठिन मुकाबलों में भारी कार्यभार को आसानी से संभाल सके। अपने शुरुआती अंतरराष्ट्रीय सफर में उन्होंने छह वनडे मुकाबलों में कुल 11 विकेट अपने नाम किए हैं, हालांकि इस दौरान उनकी इकोनॉमी सात के आसपास रही है।

बीते समय में अफगानिस्तान और इंग्लैंड के खिलाफ खेली गई वनडे सीरीज के दौरान भारतीय राष्ट्रीय टीम के साथ बिताए गए समय ने उन्हें अपनी लाइन और लेंथ पर काम करने का एक नया दृष्टिकोण दिया है। इस 26 वर्षीय तेज गेंदबाज का मानना है कि इन अनुभवी खिलाड़ियों से मिली सीख उनके पूरे करियर की दिशा तय करने में मददगार साबित होगी। राष्ट्रीय टीम में अपने चयन को लेकर उन्होंने बताया कि रणजी ट्रॉफी और इंडिया ए के लिए लगातार किए गए उनके शानदार प्रदर्शन ने ही उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया था। लेकिन उनका मुख्य उद्देश्य हमेशा से यह सीखना रहा है कि विभिन्न पिचों और परिस्थितियों के अनुसार बल्लेबाजों के खिलाफ अपनी गेंदबाजी की लंबाई को कैसे और अधिक सटीक बनाया जाए।

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भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर, गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्कल और जसप्रीत बुमराह जैसे वरिष्ठ खिलाड़ियों के साथ हुई लंबी चर्चाओं ने उनके गेंदबाजी कौशल को तराशने में अहम भूमिका निभाई है। मोर्ने मोर्कल और गौतम गंभीर के साथ हुई उनकी रणनीतिक बातचीत ने एक गेंदबाज के रूप में उनकी समझ को काफी परिपक्व किया है। इसके अलावा जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद सिराज और प्रसिद्ध कृष्णा जैसे गेंदबाजों को करीब से देखने और उनके साथ समय बिताने का अनुभव बेहद सीखने वाला रहा है। जब कोई खिलाड़ी इन दिग्गजों को अभ्यास के दौरान खुद को तैयार करते और लगातार बल्लेबाजों पर दबाव बनाते देखता है, तो वह सीखने की प्रक्रिया का सबसे बड़ा हिस्सा बन जाता है। गुरनूर बरार भी अपने खेल में इसी अनुशासन को उतारने की कोशिश कर रहे हैं ताकि वह हर प्रारूप के अनुकूल गेंदबाज बन सकें।

इंडिया ए की तरफ से श्रीलंका दौरे पर खेलते हुए इस पंजाब के तेज गेंदबाज ने दो मुकाबलों में कुल 54.3 ओवर फेंके और 13 विकेट झटके, जिससे उनका आत्मविश्वास काफी बढ़ा है। उनका मानना है कि जब वे मैदान पर गेंदबाजी कर रहे होते हैं, तो उनका पूरा ध्यान खेल में बने रहने पर होता है। हालांकि वे इस बात को भी समझते हैं कि एक तेज गेंदबाज के लिए सही ब्रेक और रिकवरी उतनी ही जरूरी है। इसके लिए पूरी योजना बनानी होती है कि मैच समाप्त होने के बाद रिकवरी के लिए क्या कदम उठाए जाएं और बेहतर नींद कैसे ली जाए। इसके बावजूद उनका मानना है कि शरीर को जितना ज्यादा चुनौती दी जाएगी, वह उतना ही मजबूत बनकर उभरेगा और उनकी मानसिकता हमेशा से एक आक्रामक तेज गेंदबाज की रही है जो लगातार गेंदबाजी करना चाहता है।

श्रीलंका में मिले इस शानदार अनुभव ने उन्हें मानसिक रूप से बेहद मजबूत बना दिया है। उनके लिए इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि सामने कौन सा बल्लेबाज खड़ा है, पिच कैसी है या मैदान कौन सा है। उनके लिए मुकाबला हमेशा खुद के खिलाफ होता है और वे मैदान पर हर स्पेल के दौरान अपनी सीमाओं को पार करने की कोशिश करते हैं। इस सोच के साथ उतरने के लिए वे एक पूर्वाग्रह-मुक्त मानसिकता पर जोर देते हैं, जो किसी भी गेंदबाज के लिए हर तरह की पिचों पर सबसे बड़ा हथियार साबित होती है। यदि कोई खिलाड़ी मैदान पर उतरने से पहले ही यह मान ले कि पिच से गेंदबाजों को कोई मदद नहीं मिलने वाली है, तो वह बल्लेबाज से एक कदम पीछे हो जाता है। वे कभी भी इस तरह के नकारात्मक विचारों को अपने ऊपर हावी नहीं होने देते और हमेशा बल्लेबाज को यह महसूस कराना चाहते हैं कि क्रीज पर उसका समय आसान नहीं रहने वाला है।

यदि किसी मुकाबले में पिच धीमी या सपाट नजर आती है, तब भी उनका एकमात्र उद्देश्य अपना शत-प्रतिशत योगदान देना और पिच की स्थिति को खेल के बीच से हटाना होता है। धीमी पिचों पर भी शॉर्ट पिच गेंदों का इस्तेमाल किया जा सकता है या बल्लेबाजों के पैड को निशाना बनाया जा सकता है, जिससे गेंदबाजी के कई अन्य विकल्प भी खुल जाते हैं। यदि पिच दोहरी गति वाली है या वहां सीम मूवमेंट मिलने की थोड़ी भी गुंजाइश है, तो उन परिस्थितियों का पूरा फायदा उठाया जा सकता है। उनके अनुसार एक सच्चे गेंदबाज के लिए हर प्रकार की पिच पर गेंदबाजी करने के लिए तैयार रहना चाहिए और इस बात का कोई बहाना नहीं होना चाहिए कि पिच धीमी है, तेज है, हरी भरी है या फिर पूरी तरह से सपाट है।

सवाल-जवाब

गुरनूर बरार ने अपनी गेंदबाजी में सुधार का श्रेय किसे दिया है?
उन्होंने अपनी गेंदबाजी में निरंतरता और सुधार का श्रेय जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद सिराज के साथ-साथ कोच गौतम गंभीर और मोर्ने मोर्कल से हुई बातचीत को दिया है।
गुरनूर बरार का करियर का मुख्य लक्ष्य क्या है?
उनका मुख्य लक्ष्य एक ऑल-फॉर्मेट पेसर बनना है जो लंबे और कठिन मुकाबलों में भारी कार्यभार को आसानी से संभाल सके।
श्रीलंका दौरे पर इंडिया ए के लिए खेलते हुए गुरनूर बरार ने कितने विकेट लिए थे?
श्रीलंका में दो मैचों के दौरान उन्होंने 54.3 ओवर फेंककर कुल 13 विकेट अपने नाम किए थे।
गुरनूर बरार ने अब तक कितने वनडे मैच खेले हैं और उनमें कितने विकेट लिए हैं?
उन्होंने अपने शुरुआती अंतरराष्ट्रीय करियर में छह वनडे मैच खेले हैं जिनमें 11 विकेट लिए हैं।
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