राजनाथ सिंह ने स्वामी विवेकानंद के साल 1893 के ऐतिहासिक शिकागो भाषण को भारतीय सभ्यता का निर्णायक मोड़ बतायाद ऑफिस की याद सताने पर जरूर देखें ये 6 बेहतरीन ऑफिस कॉमेडी फिल्में, मिलेगा भरपूर मनोरंजनगंगा के बढ़ते जलस्तर से भोजपुर के घांघर में गहराया चारे का संकट, भुखमरी की कगार पर पहुंचे मवेशीअफगानिस्तान टी20 सीरीज से पहले टीम इंडिया की बढ़ी परेशानी, नेट प्रैक्टिस के दौरान चोटिल हुए ईशान किशननई दिल्ली में रूसी राष्ट्रपति का बिना प्रोटोकॉल वाला इशारा, अजित डोभाल से पुतिन की मुलाकात के क्या हैं कूटनीतिक मायने?कर्क साप्ताहिक राशिफल 13-19 सितंबर के लिए: मंगल के गोचर से करियर और आर्थिक जीवन में बदलाव, जानें अपना भाग्यभाई किंग हेराल्ड के अंतिम संस्कार के दो दिन बाद नॉर्वे की राजकुमारी ऐस्ट्रिड का निधन121 दिनों तक देवगुरु बृहस्पति की वक्री चाल: 6 राशियों के करियर और धन लाभ में आएगा बड़ा मोड़पायलटों के लिए ड्रग टेस्ट अनिवार्य, एयर इंडिया घटना के बाद DGCA का आदेशगूगल फोटोज की इन 10 सीक्रेट सेटिंग्स से बचाएं स्टोरेज और सुरक्षित रखें अपनी प्राइवेसी
राजनाथ सिंह ने स्वामी विवेकानंद के साल 1893 के ऐतिहासिक शिकागो भाषण को भारतीय सभ्यता का निर्णायक मोड़ बतायानेता जी
11 सित॰ 2026, 11:33 pm (1 घंटे पहले)· 2

राजनाथ सिंह ने स्वामी विवेकानंद के साल 1893 के ऐतिहासिक शिकागो भाषण को भारतीय सभ्यता का निर्णायक मोड़ बताया

राजनाथ सिंह ने 11 सितंबर के ऐतिहासिक महत्व को याद किया, जब साल 1893 में स्वामी विवेकानंद ने शिकागो में वैश्विक मंच पर भारतीय आध्यात्मिकता का परिचय दिया था.

राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक बेहद प्रभावशाली संदेश साझा किया है, जिसमें उन्होंने भारत की सभ्यता से जुड़ी यात्रा में 11 सितंबर के गहरे ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित किया है. यह तारीख उन्नीसवीं सदी के अंत में हुई एक बेहद महत्वपूर्ण घटना की याद दिलाती है, जिसने भारतीय आध्यात्मिकता और दर्शन को वैश्विक मंच पर स्थापित किया था.

शिकागो में ऐतिहासिक पल का स्मरण

अपने सोशल मीडिया पोस्ट में राजनाथ सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि 11 सितंबर भारत के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और निर्णायक तारीख है. इसी दिन साल 1893 में शिकागो में आयोजित विश्व धर्म संसद में स्वामी विवेकानंद ने अपना ऐतिहासिक भाषण दिया था. उनके इस संबोधन ने न केवल दुनिया भर के लोगों को भारत के समृद्ध आध्यात्मिक और सभ्यतागत मूल्यों से परिचित कराया, बल्कि पूर्वी और पश्चिमी दर्शन के बीच की दूरी को पाटने का काम भी किया. राजनाथ सिंह ने इस बात को रेखांकित किया कि कैसे उस क्षण ने आधुनिक दुनिया के सामने भारत के प्राचीन ज्ञान को प्रदर्शित करने के लिए एक महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में काम किया.

दुनिया भर में गूंजने वाले वे शब्द

शिकागो में अपने ऐतिहासिक भाषण की शुरुआत करते हुए स्वामी विवेकानंद ने वहां मौजूद लोगों को "सिस्टर्स एंड ब्रदर्स ऑफ अमेरिका" कहकर संबोधित किया था. उनके इन आत्मीय शब्दों ने सभा में उपस्थित हजारों लोगों के दिलों को तुरंत छू लिया था. राजनाथ सिंह ने इन शब्दों को याद करते हुए इन्हें वैश्विक भाईचारे, सहिष्णुता और स्वीकार्यता के भारतीय मूल्यों का प्रतीक बताया. स्वामी विवेकानंद ने धर्म को केवल कर्मकांडों के रूप में नहीं, बल्कि सभी आध्यात्मिक मार्गों की एकता और सार्वभौमिक स्वीकार्यता के रूप में प्रस्तुत किया था, जो आज के समय में भी पूरी तरह प्रासंगिक है.

भारतीय सभ्यता और आध्यात्म का स्थायी प्रभाव

राजनाथ सिंह द्वारा साझा की गई यह पोस्ट भारत के सभ्यतागत मूल्यों के स्थायी प्रभाव को रेखांकित करती है. इस विशेष तारीख पर स्वामी विवेकानंद के योगदान को याद करते हुए, यह पोस्ट लोगों को इस बात पर विचार करने के लिए प्रेरित करती है कि कैसे भारतीय दर्शन ने हमेशा से वैश्विक सद्भाव की वकालत की है. इस ऐतिहासिक भाषण को एक बड़े मोड़ के रूप में देखा जाता है जिसने भारत को विश्व पटल पर एक प्रमुख आध्यात्मिक मार्गदर्शक के रूप में स्थापित किया और विभिन्न संस्कृतियों के बीच आपसी सम्मान को बढ़ावा दिया.

जनता की प्रतिक्रिया

राजनाथ सिंह की इस सोशल मीडिया पोस्ट पर आम लोगों की तरफ से गहरी प्रतिक्रिया देखने को मिली, जहां अधिकांश लोगों ने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत पर गर्व महसूस किया और स्वामी विवेकानंद के शांति संदेश को शाश्वत बताया. कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने आधुनिक इतिहास में इस तारीख के अन्य पहलुओं पर भी चर्चा की और बताया कि इस दिन दिया गया भाईचारे का संदेश आज की दुनिया के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है.

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सवाल-जवाब

स्वामी विवेकानंद ने शिकागो में अपना ऐतिहासिक भाषण कब दिया था?
उन्होंने अपना ऐतिहासिक भाषण 11 सितंबर, 1893 को शिकागो में आयोजित विश्व धर्म संसद में दिया था.
उनके भाषण की शुरुआत के प्रसिद्ध शब्द क्या थे?
उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत प्रसिद्ध शब्दों "सिस्टर्स एंड ब्रदर्स ऑफ अमेरिका" (अमेरिका के भाइयों और बहनों) से की थी.
इस घटना को याद करते हुए सोशल मीडिया पोस्ट किसने साझा की?
यह पोस्ट राजनाथ सिंह ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा की थी.
11 सितंबर को भारत की यात्रा में एक निर्णायक तारीख क्यों माना जाता है?
यह उस दिन को दर्शाता है जब भारत के आध्यात्मिक ज्ञान और सार्वभौमिक सभ्यतागत मूल्यों को आधिकारिक तौर पर वैश्विक मंच पर पेश किया गया था.
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