पाकिस्तान क्रिकेट इस समय अपने सबसे नाजुक और बुरे दौर का सामना कर रहा है। मैदान पर लगातार मिल रही करारी हार और ड्रेसिंग रूम के भीतर का अशांत और डांवाडोल माहौल यह साफ तौर पर बयां करने के लिए काफी है कि राष्ट्रीय टीम में गहराई की कितनी भारी कमी हो चुकी है। इंग्लैंड के खिलाफ जारी तीन मैचों की टेस्ट सीरीज के पहले दो मुकाबलों में बेहद शर्मनाक शिकस्त झेलने के बाद, जब चयनकर्ताओं ने बीच सीरीज में अचानक बड़े बदलाव करने का फैसला लिया, तो पाकिस्तान के पूर्व कप्तानों और दिग्गज खिलाड़ियों का गुस्सा फूट पड़ा। लेकिन इस बार सबसे सीधा, तीखा और गंभीर हमला बोला है दुनिया के सर्वकालिक महान तेज गेंदबाजों में शुमार वसीम अकरम ने। अकरम ने बिना किसी हिचकिचाहट के सीधे पाकिस्तान की सबसे बड़ी टी20 लीग, यानी पाकिस्तान सुपर लीग (PSL) की गुणवत्ता और उसकी नीयत पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका स्पष्ट रूप से मानना है कि जहां दुनिया भर की अन्य लीग अपने देशों के लिए भविष्य के महान सितारे तैयार कर रही हैं, वहीं PSL पिछले 10 वर्षों के अपने सफर में पाकिस्तान को एक भी विश्वस्तरीय बल्लेबाज देने में पूरी तरह नाकाम रही है।
10 साल में नहीं मिला एक भी बेहतरीन बल्लेबाज
वसीम अकरम इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के साथ बतौर गेंदबाजी कोच और मेंटर काम कर चुके हैं और अपनी रणनीति के दम पर टीम को खिताबी जीत भी दिला चुके हैं। इसके अलावा, उन्होंने PSL में भी इस्लामाबाद यूनाइटेड, मुल्तान सुल्तांस और कराची किंग्स जैसी प्रमुख फ्रेंचाइजियों को अपनी सेवाएं दी हैं। ऐसे में वह दोनों देशों के लीग क्रिकेट के बुनियादी अंतर और वहां की कमियों को बहुत गहराई से समझते हैं। वसीम अकरम ने पाकिस्तान के मौजूदा क्रिकेट ढांचे पर तंज कसते हुए पूछा कि PSL को शुरू हुए अब पूरे 10 साल का लंबा वक्त बीत चुका है, लेकिन क्या इस लीग ने एक भी ऐसा धाकड़ बल्लेबाज तैयार किया है जिस पर पूरा देश गर्व कर सके? उन्होंने माना कि पाकिस्तान ने इस लीग के जरिए कुछ अच्छे तेज गेंदबाज तो जरूर हासिल किए हैं, लेकिन बल्लेबाजी के क्षेत्र में ऐसा कोई भी नया टैलेंट सामने नहीं आया है जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी कोई मजबूत और अमिट छाप छोड़ी हो।
भारत के 15 साल के वैभव सूर्यवंशी से सीख लेने की सलाह
अपनी बात को और अधिक मजबूत और तार्किक बनाने के लिए वसीम अकरम ने पाकिस्तान के सबसे पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी भारत के एक उभरते हुए युवा खिलाड़ी का उदाहरण दिया। उन्होंने भारत के केवल 15 साल के प्रतिभाशाली बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी का जिक्र किया। अकरम ने कहा कि जब तक पाकिस्तान का घरेलू क्रिकेट ढांचा इस दर्जे के होनहार खिलाड़ियों को तैयार कर सामने नहीं लाएगा, तक तक पाकिस्तान की राष्ट्रीय टीम का भला होना नामुमकिन है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब हम वैभव सूर्यवंशी जैसे बेहद युवा और 15 साल के बल्लेबाजी टैलेंट को तराश कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने के लिए तैयार करेंगे, तभी हमें पाकिस्तान क्रिकेट के स्तर में कोई वास्तविक और बड़ा सुधार दिखाई देगा। वसीम अकरम का मानना है कि जब तक आपके पास इस प्रकार के निडर और तकनीकी रूप से पूरी तरह मजबूत युवा खिलाड़ी नहीं होंगे, तब तक आप वर्ल्ड क्रिकेट में टिक नहीं सकते।
इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट मैच में खुली तकनीकी कमियां
वसीम अकरम ने इंग्लैंड के खिलाफ चल रही मौजूदा टेस्ट सीरीज का हवाला देते हुए पाकिस्तानी बल्लेबाजों की तकनीकी कमजोरियों को दुनिया के सामने लाकर रख दिया। सीरीज के पहले दो टेस्ट मैचों में जिस तरह से पाकिस्तानी टीम के बल्लेबाज इंग्लिश तेज गेंदबाज ओली रोबिन्सन के सामने असहाय नजर आए, उस पर अकरम ने गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि इंग्लैंड की पिचों पर हमारे बल्लेबाजों का फुटवर्क पूरी तरह से नदारद था। वे क्रीज के भीतर बिल्कुल जकड़ कर खड़े थे और ओली रोबिन्सन जैसे अनुशासित गेंदबाजों के खिलाफ अपना अगला पैर तक बाहर निकालने का साहस नहीं दिखा पा रहे थे। इंग्लैंड की कठिन परिस्थितियों में बेहतर बल्लेबाजी करने के लिए मजबूत तकनीक के साथ-साथ मजबूत जिगर और बड़े साहस की जरूरत होती है। लेकिन उस साहस को दिखाने के लिए खिलाड़ी के भीतर बुनियादी हुनर का होना सबसे अनिवार्य शर्त है।
क्लब क्रिकेट को पुनर्जीवित करने के लिए 100 मिलियन का सुझाव
लुधियाना जिमखाना क्रिकेट क्लब से अपने क्रिकेट के सफर की शुरुआत करने वाले महान गेंदबाज वसीम अकरम का दृढ़ विश्वास है कि PSL जैसी चमक-धमक वाली टी20 लीग केवल एक अस्थायी और ऊपरी समाधान हो सकती हैं। असली क्रिकेट और लंबे प्रारूप (रेड-बॉल) के लिए बेहतरीन टैलेंट हमेशा जमीनी स्तर से ही निकलकर आता है। पाकिस्तान के बड़े और प्रमुख शहरों में दम तोड़ चुके क्लब क्रिकेट के ढांचे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्होंने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) को एक बेहद ठोस और व्यावहारिक सुझाव दिया है। अकरम ने कहा कि अगर हम सचमुच रेड-बॉल क्रिकेट यानी टेस्ट मैचों में अपनी टीम के प्रदर्शन को सुधारना चाहते हैं, तो हमें अपने क्लब क्रिकेट को दोबारा जिंदा करना होगा। क्योंकि असली टैलेंट बड़ी-बड़ी फ्रेंचाइजी लीगों की चकाचौंध से नहीं, बल्कि धूल से भरे क्लब के मैदानों से मेहनत करके निकलता है। उन्होंने PCB को सलाह दी कि बोर्ड को कराची और लाहौर जैसे बड़े शहरों में कम से कम 100-100 मिलियन रुपये का बजट सिर्फ क्लब क्रिकेट के बुनियादी ढांचे और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए आवंटित करना चाहिए।



















