नई दिल्ली। न्यूजीलैंड के खिलाफ मुकाबले में जीत मिलने के बावजूद भारतीय टीम की शुरुआत कई गंभीर सवालों के साथ हुई है। वेस्टइंडीज के दौरे पर उजागर हुई टीम इंडिया की कमजोरियों को कीवी टीम ने इस मुकाबले में भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। मुख्य कोच की आठ बल्लेबाजों को मैदान पर उतारने की रणनीति का अगर विश्लेषण किया जाए, तो विश्व कप के बाद से टीम ने मुकाबलों में हार का सामना ज्यादा किया है और जीत कम हासिल की है। न्यूजीलैंड के खिलाफ जीत तो हाथ लग गई, लेकिन क्या हर बार 225 रन के लक्ष्य का पीछा करना संभव होगा।
मैदान पर रणनीतिक चूक और प्लेइंग इलेवन का चयन
क्राइस्टचर्च के हेग्ले ओवल मैदान पर भारतीय टीम प्रबंधन ने ऐसी तीन बड़ी गलतियां कीं, जिनकी वजह से मैच शुरू होने से पहले ही टीम पर संकट के बादल मंडराने लगे थे। अंतिम एकादश में किसी भी विशेषज्ञ स्पिनर को जगह न देना, बल्लेबाजी क्रम में अनावश्यक बदलाव करना और स्पिन गेंदबाजों के सामने लड़खड़ाती हुई बल्लेबाजी ने टीम प्रबंधन की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। टॉस के बाद जब टीम में बदलाव की घोषणा हुई, तो कीवी कप्तान के चेहरे पर एक अलग ही मुस्कान नजर आई क्योंकि वे भांप गए थे कि यह एक दबाव में उतरी हुई टीम की प्लेइंग इलेवन है।
डगआउट में बैठे रहे विशेषज्ञ गेंदबाज
जिस टीम की बेंच पर वरुण चक्रवर्ती और कुलदीप यादव जैसे दिग्गज गेंदबाज मौजूद हों और टीम प्रबंधन उन्हें डगआउट में ही बैठाकर रखे, तो इसे क्या कहा जाएगा। मैच के दौरान कमेंट्री कर रहे रवि शास्त्री ने भी इस पर बड़ा सवाल उठाते हुए कहा कि अक्षर पटेल और नीतीश कुमार रेड्डी को बल्लेबाजी के लिए कितनी गेंदें मिल पाएंगी, यह अनिश्चितता हमेशा बनी रहेगी। इसीलिए बेहतर यही होता कि एक अतिरिक्त विशेषज्ञ स्पिनर को मैदान पर उतारा जाता। नीतीश और अक्षर ने मिलकर आठ ओवरों में कुल 91 रन लुटाए और उनके हाथ केवल एक ही सफलता लगी। विश्व कप के बाद से अधिकांश बड़ी टीमें या तो 200 से अधिक रन बना रही हैं या उनका सफलतापूर्वक पीछा कर रही हैं, लेकिन इसके बावजूद कोच इस बात पर ध्यान देते नजर नहीं आ रहे हैं।
बैटिंग ऑर्डर बदलने से बिगड़ा लय
जीत के लिए 226 रनों के बड़े लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय ओपनिंग जोड़ी ने महज 5.5 ओवरों में ही 93 रन जोड़ दिए थे। जब अभिषेक शर्मा आउट हुए, तो ऐसा लग रहा था कि ईशान किशन क्रीज पर आकर पारी को आसानी से आगे बढ़ाएंगे। लेकिन टीम प्रबंधन के मन में न जाने क्या चल रहा था कि जिस नंबर तीन पर बल्लेबाजी करते हुए ईशान किशन टी20 फॉर्मेट के नंबर एक बल्लेबाज बने थे, उस स्थान पर उनकी बजाय तिलक वर्मा को मैदान पर भेज दिया गया। यहीं से पूरी टीम की लय बिगड़ गई। तिलक वर्मा ने 11 गेंदों का सामना करते हुए केवल छह रन बनाए। तिलक की यह धीमी पारी इतनी दबाव वाली रही कि पहले वे खुद अपना विकेट गंवा बैठे और फिर उनके बाद संजू सैमसन भी भारी दबाव में आकर आउट हो गए। नंबर पांच पर बल्लेबाजी के लिए उतरे ईशान किशन पर भी इस बदले हुए बैटिंग ऑर्डर का बुरा असर साफ दिखाई दिया और वे केवल एक रन बनाकर पवेलियन लौट गए।
कीवी स्पिनर्स के जाल में फंसी भारतीय पारी
न्यूजीलैंड की पिचों पर जब भी मैच होता है, तो अमूमन तेज गेंदबाजों की गेंदबाजी की ही चर्चा होती है, लेकिन इस पहले टी20 मुकाबले में कीवी स्पिनरों ने भारतीय पारी को बुरी तरह उलझा कर रख दिया। टीम की इस आक्रामक शुरुआत पर ब्रेक लगाने का काम माइकल ब्रेसवेल ने अभिषेक शर्मा को आउट करके किया। ब्रेसवेल ने इसके बाद तिलक वर्मा को भी अपना शिकार बनाया और बेहद अहम मौकों पर रनों की गति पर लगाम कसी। इस ऑफ स्पिनर ने अपने चार ओवर के कोटे में 37 रन खर्च करते हुए दो महत्वपूर्ण विकेट झटके। इसके अलावा कीवी कप्तान के शुरुआती तीन ओवरों ने मैच का रुख पलटने में अहम भूमिका निभाई। मिचेल सैंटनर ने अपने पहले तीन ओवरों में मात्र 20 रन खर्च करते हुए दो बल्लेबाजों को पवेलियन की राह दिखाई। इस तरह से स्पिन गेंदबाजी के कुल सात ओवरों ने भारत को पूरी तरह से बैकफुट पर धकेल दिया। न्यूजीलैंड के स्पिन गेंदबाजों ने अपने सात ओवरों में सिर्फ 57 रन दिए और भारत के चार अहम विकेट अपने नाम किए।


















