अक्टूबर 1983 में कानपुर के ग्रीन पार्क स्टेडियम में टेस्ट क्रिकेट के इतिहास का सबसे खौफनाक तेज गेंदबाजी का प्रदर्शन देखा गया था। जून 1983 में लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर कपिल देव की अगुवाई वाली भारतीय टीम ने वेस्टइंडीज के अजेय समझे जाने वाले साम्राज्य को ढहाकर पहली बार विश्व कप ट्रॉफी पर कब्जा जमाया था। उस करारी हार ने कैरेबियाई टीम के स्वाभिमान को गहरी चोट पहुंचाई थी। इसके ठीक चार महीने बाद, अक्टूबर 1983 में वेस्टइंडीज की टीम भारत के दौरे पर आई। उनका मुख्य उद्देश्य केवल एक द्विपक्षीय सीरीज खेलना नहीं था, बल्कि दुनिया के सामने अपनी खोई हुई बादशाहत और खौफ को दोबारा स्थापित करना था। ग्रीन पार्क में खेला गया पहला टेस्ट मैच वेस्टइंडीज के उसी दबदबे और उनके दिग्गज तेज गेंदबाज मैल्कम मार्शल की अद्वितीय क्षमता का गवाह बना।
वेस्टइंडीज की पहली पारी में गोर्डन ग्रीनिज और मैल्कम मार्शल का प्रदर्शन
कानपुर में खेले गए सीरीज के शुरुआती टेस्ट में वेस्टइंडीज की टीम ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का निर्णय लिया। वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजों की कड़ी परीक्षा लेते हुए पहली पारी में 454 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। इस विशाल स्कोर की नींव सलामी बल्लेबाज गोर्डन ग्रीनिज ने रखी, जिन्होंने बेहतरीन तकनीक और धैर्य का परिचय देते हुए 194 रनों की मैराथन पारी खेली। हालांकि असली तहलका तब मचा जब निचले क्रम में मैल्कम मार्शल बल्लेबाजी करने उतरे। मार्शल ने केवल गेंद से ही नहीं, बल्कि बल्ले से भी ताबड़तोड़ अंदाज में रन बनाए। उन्होंने 92 रनों की आक्रामक पारी खेली और अपनी टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। हालांकि वह अपने शतक से केवल 8 रन दूर रह गए, लेकिन उनकी इस पारी ने यह स्पष्ट संकेत दे दिया था कि वेस्टइंडीज की टीम भारतीय टीम को किसी भी विभाग में कोई राहत देने के मूड में नहीं थी।
मैल्कम मार्शल की घातक गेंदबाजी और सुनील गावस्कर का डक
जब भारतीय टीम अपनी पहली पारी की शुरुआत करने मैदान पर उतरी, तो उन्हें वेस्टइंडीज के घातक तेज गेंदबाजी आक्रमण का सामना करना पड़ा। हालांकि वेस्टइंडीज की टीम में विवियन रिचर्ड्स, माइकल होल्डिंग और क्लाइव लॉयड जैसे महान खिलाड़ी शामिल थे, लेकिन कानपुर की पिच पर मैल्कम मार्शल की गति और स्विंग का स्तर अलग ही नजर आ रहा था। मार्शल ने अपनी पारी के शुरुआती स्पैल में ही भारत के दिग्गज सलामी बल्लेबाज सुनील गावस्कर को बिना कोई रन बनाए शून्य पर पवेलियन भेज दिया। जिस तेजी और उछाल वाली गेंद पर गावस्कर आउट हुए, उस पर उनके हाथ से बल्ला तक छूटकर गिर गया था। सुनील गावस्कर का इस तरह से विकेट गिरना भारतीय बल्लेबाजी क्रम के लिए एक तगड़ा झटका साबित हुआ। इसके बाद मार्शल ने अपनी आग उगलती गेंदों से भारतीय शीर्ष क्रम को पूरी तरह झकझोर कर रख दिया। उन्होंने अपने इस स्पैल के दौरान महज 9 रन देकर 4 बड़े विकेट चटकाए, जिसे टेस्ट इतिहास के सबसे विनाशकारी स्पैल्स में गिना जाता है।
'मार्शल लॉ' की सुर्खी और भारत की एक पारी और 83 रनों से हार
कैरेबियाई तेज गेंदबाज के इस जानलेवा हमले के सामने भारतीय बल्लेबाज ज्यादा देर तक नहीं टिक सके। दूसरे दिन का खेल समाप्त होने तक भारत का स्कोर 5 विकेट के नुकसान पर केवल 34 रन था। कानपुर के मैदान पर मैल्कम मार्शल के इस खौफनाक प्रदर्शन को देखते हुए अगले दिन के समाचार पत्रों ने अपनी मुख्य सुर्खी बनाई थी, 'मार्शल लॉ इन कानपुर'। यह शीर्षक उस समय के खेल के माहौल को सटीक रूप से दर्शाता था, जहां मैदान पर केवल और केवल मैल्कम मार्शल का दबदबा चल रहा था। पूरी भारतीय टीम पहली पारी में सिर्फ 207 रन बनाकर सिमट गई। इस करारी शिकस्त के कारण भारत को यह मैच एक पारी और 83 रनों के बड़े अंतर से गंवाना पड़ा था।



















