भगवान शिव की नगरी काशी जल्द ही क्रिकेट के नक्शे पर एक नई पहचान बनाने जा रही है। वाराणसी के गंजारी में बन रहा यूपी का तीसरा इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम अब अपने निर्माण के आखिरी चरण में पहुंच गया है। खास बात यह है कि इसे पूरी तरह भगवान शिव की थीम पर आकार दिया जा रहा है, जो इसे दुनिया का अपनी तरह का सबसे अनोखा स्टेडियम बनाता है।
निर्माण कहां तक पहुंचा
परियोजना से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक इस स्टेडियम का अब तक 92 फीसदी काम पूरा हो चुका है। बचे हुए 8 फीसदी काम को अगले ढाई महीने यानी अगस्त तक निपटा लिया जाएगा। इसके बाद मैदान पर एक ट्रायल मैच भी कराया जाएगा, जो दिसंबर में प्रस्तावित है।
प्रोजेक्ट डायरेक्टर सरोज शुक्ला ने TrendKia से बातचीत में बताया कि शेष बचा काम 31 अगस्त तक पूरा करके स्टेडियम को BCCI को हैंडओवर कर दिया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि शुरुआत में इस स्टेडियम की दर्शक क्षमता 30 हजार रखी गई थी, जिसे अब बढ़ाकर 32 हजार कर दिया गया है।
शिव की झलक हर कोने में
इस मैदान को देखकर ही काशी और भगवान शिव का अहसास होगा। यहां शिव को प्रिय डमरू, त्रिशूल, चंद्रमा और बेलपत्र की आकृतियां उकेरी गई हैं। स्टेडियम का रूफ भी अर्धचंद्राकार स्वरूप में तैयार हो रहा है — ठीक वैसा ही, जैसा चंद्रमा भगवान शिव के माथे की शोभा बढ़ाता है। फिलहाल डमरू के आकार वाली मीडिया गैलरी का काम तेज रफ्तार से चल रहा है।
स्थापत्य की बारीकियों में भी बनारस की आत्मा झलकती है। स्टेडियम की सीढ़ियां बनारस के घाटों की सीढ़ियों की तर्ज पर बनाई गई हैं। दिव्यांग दर्शकों का भी पूरा ध्यान रखा गया है — उनके लिए लिफ्ट लगाई गई हैं, ताकि वे आसानी से दर्शक दीर्घा तक पहुंचकर मैच का आनंद ले सकें।
100 टन की त्रिशूल वाली फ्लड लाइट
स्टेडियम की सबसे आकर्षक खासियत इसकी फ्लड लाइटें हैं। मैदान के चारों ओर त्रिशूल के आकार वाली 4 फ्लड लाइट लगाई गई हैं, जिनका कुल वजन 100 टन है। प्रोजेक्ट डायरेक्टर सरोज शुक्ला ने बताया कि इन्हें 5 चरणों में इंस्टॉल किया गया है और इस समय इनकी टेस्टिंग का काम भी जारी है।
451 करोड़ की परियोजना
इस पूरे स्टेडियम के निर्माण पर कुल 451 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। शिव की थीम, घाटों जैसी सीढ़ियां, त्रिशूल वाली रोशनी और अर्धचंद्राकार छत मिलकर इसे न सिर्फ क्रिकेट का मैदान, बल्कि काशी की सांस्कृतिक विरासत का एक जीवंत प्रतीक बना देंगे।













