बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन दिनों भारतीय क्रिकेट टीम के कई खिलाड़ियों की फिटनेस और चोटों से जुड़े मामलों के चलते खासी चर्चा में बना हुआ है। जसप्रीत बुमराह और साई सुदर्शन जैसे अहम खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर चल रही चर्चाओं और टीम प्रबंधन के साथ किसी भी तरह के मतभेद की अटकलों के बीच, बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने हाल ही में इस केंद्र का दौरा किया था। इस दौरे के बाद क्रिकेट प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया और इन तमाम विषयों पर खुलकर बात की। उन्होंने चयन प्रक्रिया, मेडिकल स्टाफ की स्थिति और फिटनेस आंकलन के नए तरीकों से जुड़ी हर बात को साफ शब्दों में सामने रखा।
वीवीएस लक्ष्मण ने सबसे पहले इस बात पर जोर दिया कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की जिम्मेदारी केवल चोटिल खिलाड़ियों के उपचार या उनके रिहैबिलिटेशन तक ही सीमित नहीं है। इसका मूल उद्देश्य भारतीय क्रिकेट की भविष्य की प्रतिभाओं की पाइपलाइन को पूरी तरह मजबूत रखना है, ताकि देश के किसी भी स्तर पर नए और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की कोई कमी न पड़े। इस पूरी व्यवस्था का मकसद खेल के बुनियादी ढांचे को निरंतर गति देना और हर आयु वर्ग में मजबूत बेंच स्ट्रेंथ तैयार करना है, जिससे आने वाले समय में राष्ट्रीय टीम को बेहतरीन खिलाड़ी मिलते रहें।
टीम प्रबंधन और चयनकर्ताओं के बीच किसी तरह के तनाव या खींचतान की खबरों को पूरी तरह खारिज करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि कहीं कोई ब्लेम गेम नहीं चल रहा है। गौतम गंभीर के नेतृत्व वाले कोचिंग स्टाफ, राष्ट्रीय चयन समिति और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के बीच पूरा तालमेल और समन्वय बना हुआ है। सभी विभाग मिलकर इस बात पर ध्यान दे रहे हैं कि खिलाड़ियों को आ रही फिटनेस समस्याओं की असली जड़ क्या है, ताकि उनका सही और स्थायी समाधान निकाला जा सके।
खिलाड़ियों के चयन और उनकी फिटनेस रिपोर्ट के तकनीकी पहलुओं को समझाते हुए उन्होंने जसप्रीत बुमराह और साई सुदर्शन का विशेष हवाला दिया। उन्होंने बताया कि जब चयन सूची में किसी खिलाड़ी के नाम के आगे स्टार का निशान होता है, तो इसका सीधा अर्थ यह होता है कि उसका चयन फिटनेस की शर्त के अधीन है। यदि किसी खिलाड़ी की रिकवरी उम्मीद के मुताबिक धीमी रफ्तार से आगे बढ़ती है, तो इस बात की पूरी जानकारी तुरंत मुख्य चयनकर्ता और कोच तक पहुंचाई जाती है ताकि समय रहते जरूरी कदम उठाए जा सकें।
स्पोर्ट्स साइंस एंड मेडिसिन के खाली पड़े प्रमुख पद को लेकर भी उन्होंने खुलकर बात की। नितिन पटेल के इस पद को छोड़ने के बाद से यह कुर्सी खाली है। वीवीएस लक्ष्मण ने बताया कि दो योग्य विशेषज्ञों को इसके लिए शॉर्टलिस्ट किया गया था, जिनमें एंड्रयू लेपस और एक अन्य विशेषज्ञ शामिल थे, लेकिन व्यक्तिगत और पारिवारिक कारणों से उन्होंने आखिरी मौके पर बेंगलुरु आने में असमर्थता जताई। फिलहाल इस विभाग की जिम्मेदारी अलग-अलग वर्टिकल हेड्स आपस में मिलकर संभाल रहे हैं और एक उपयुक्त नाम की तलाश लगातार जारी है।
खिलाड़ियों के वर्कलोड और व्यस्त अंतरराष्ट्रीय शेड्यूल को ध्यान में रखते हुए फिटनेस परखने के एक नए तरीके की भी शुरुआत की गई है। स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच एड्रियन ले रूक्स ने ब्रोंको टेस्ट को फिटनेस मॉनिटरिंग के लिए पेश किया है। चूंकि चल रही सीरीज के बीच पारंपरिक यो-यो टेस्ट कराना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं होता, इसलिए खिलाड़ियों के फिटनेस स्तर पर लगातार नजर रखने के लिए इस नए टेस्ट का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि उनकी सहनशक्ति और शारीरिक क्षमता का सही आकलन होता रहे।
इस पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के कामकाज और खिलाड़ियों के फिटनेस प्रबंधन को लेकर बनी तमाम तरह की भ्रम की स्थितियों को दूर करने का प्रयास किया गया। हालांकि स्पोर्ट्स साइंस के प्रमुख का पद खाली होना अभी भी एक चुनौती है, लेकिन ब्रोंको टेस्ट जैसी आधुनिक पहलों से यह उम्मीद जरूर बंधती है कि आने वाले समय में खिलाड़ियों की फिटनेस की निगरानी और अधिक पुख्ता होगी।



















