भारतीय क्रिकेट में इस समय कई बड़े खिलाड़ी फिटनेस संबंधी परेशानियों से जूझ रहे हैं, जिसका सीधा असर टीम के प्रदर्शन और योजनाओं पर पड़ता दिखाई दे रहा है। श्रीलंका के खिलाफ आगामी टेस्ट सीरीज के लिए जब टीम का ऐलान किया गया था, तब शुरुआती स्क्वाड में जसप्रीत बुमराह और साई सुदर्शन का नाम भी जोड़ा गया था। हालांकि, पूरी तरह से फिट न होने के कारण इन दोनों खिलाड़ियों को आखिरकार इस सीरीज से बाहर होना पड़ा। इस पूरी स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए बेंगलुरु स्थित बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण ने इंजर्ड खिलाड़ियों का पक्ष लिया है और कहा है कि क्रिकेटर कोई कलपुर्जा या मशीन नहीं होते कि उन्हें जब चाहा तब सटीक समय सीमा के भीतर फिट मान लिया जाए।
मशीन नहीं है मानव शरीर
बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया के साथ 9 अगस्त को हुई एक महत्वपूर्ण मुलाकात के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में वीवीएस लक्ष्मण ने खिलाड़ियों की रिकवरी प्रक्रिया को लेकर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि क्रिकेटर किसी कारखाने में बनी मशीन की तरह काम नहीं करते जिनकी फिटनेस हर बार निश्चित समय सीमा के अंदर ही लौट आए। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का दायरा केवल चोट से उबरने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी भूमिका क्रिकेटरों को उनके खेल कौशल में और अधिक सुधार करने में मदद करने के लिहाज से बेहद व्यापक है। लक्ष्मण ने इस बात पर जोर दिया कि वह इस तरह के मामलों में 'दोष' जैसे शब्दों का प्रयोग करने से बचते हैं क्योंकि इससे किसी एक व्यक्ति को बेवजह बलि का बकरा बना दिया जाता है। पुरुष और महिला दोनों ही टीमों के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, टीम मैनेजमेंट और सपोर्ट स्टाफ के बीच बेहतरीन तालमेल बना हुआ है, लेकिन अंततः यह एक मानव शरीर है और रिकवरी की अपनी शारीरिक सीमाएं होती हैं।
बुमराह और सुदर्शन के चयन का सच
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वीवीएस लक्ष्मण ने जसप्रीत बुमराह और साई सुदर्शन के चयन को लेकर भी स्थिति साफ की। उन्होंने बताया कि श्रीलंका के खिलाफ होने वाली टेस्ट सीरीज में इन दोनों खिलाड़ियों का नाम केवल इस शर्त पर शामिल किया गया था कि वे फिटनेस क्लेरेंस हासिल कर लें। यही कारण था कि उनके नामों के आगे स्टार का निशान लगाया गया था। चयनकर्ता हमेशा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से खिलाड़ियों की मौजूदा फिटनेस स्थिति की आधिकारिक रिपोर्ट मांगते हैं। इसके बाद यह विस्तृत रिपोर्ट चयन समिति के अध्यक्ष, दोनों टीमों के मुख्य कोच और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई को भेज दी जाती है, जिसके आधार पर ही अंतिम फैसला लिया जाता है।
चोटों को बताया खेल का स्वाभाविक हिस्सा
टीम इंडिया के कई प्रमुख खिलाड़ियों के एक साथ चोटिल होने के मामले पर बात करते हुए वीवीएस लक्ष्मण ने कहा कि उन्हें इस बात से किसी तरह की घबराहट या चिंता महसूस नहीं होती है। जब कोई भी खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष कोटि का क्रिकेट खेलता है, तो उससे लगातार अपना शत-प्रतिशत प्रदर्शन देने की उम्मीद की जाती है। किसी भी खिलाड़ी के पूरे खेल करियर में चोट लगना एक सामान्य और अपरिहार्य हिस्सा होता है। यदि कोई खिलाड़ी मैदान पर उतरते समय हमेशा चोट से बचने के डर के बारे में ही सोचता रहेगा, तो वह कभी भी अपनी पूरी क्षमता के साथ खुलकर नहीं खेल पाएगा। उन्होंने सलाह दी कि चोट को हमेशा एक नकारात्मक पहलू के रूप में देखने के बजाय इसे खेल के एक स्वाभाविक हिस्से के तौर पर स्वीकार किया जाना चाहिए।
इस बीच, भारतीय खेमे से कुछ सकारात्मक खबरें भी सामने आई हैं जहां भारतीय टीम के कप्तान शुभमन गिल पूरी तरह फिट हो चुके हैं और उन्होंने आगामी टेस्ट सीरीज से पहले अभ्यास मैच में मैदान पर उतरकर बल्लेबाजी भी शुरू कर दी है। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के मोर्चे पर राजनीतिक तनाव बढ़ने के कारण भारत और बांग्लादेश के बीच होने वाली सीरीज पर बड़ा संकट मंडरा रहा है जिससे बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड की उम्मीदों को तगड़ा झटका लगा है।



















