क्रिकेट के आधुनिक दौर में मैदान पर पूरी तरह से फिट रहना हर खिलाड़ी के लिए अनिवार्य माना जाता है। आज के समय में हर देश के खिलाड़ियों में सिक्स-पैक्स दिखने की होड़ लगी रहती है, जिम में घंटों पसीना बहाया जाता है और खानपान को लेकर काफी सतर्कता बरती जाती है। खेल कौशल चाहे थोड़ा कम हो, लेकिन फिटनेस के मामले में कोई समझौता नहीं किया जाता है। क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट में ऐसी फिटनेस की मांग हर टीम करती है, लेकिन खेल का इतिहास हमेशा से ऐसा नहीं रहा है।
पुराने समय में स्किल को मिलती थी प्राथमिकता
यदि कुछ दशक पीछे मुड़कर देखा जाए तो यह साफ नजर आता है कि उस दौर में फिटनेस से ज्यादा खिलाड़ियों के खेल कौशल यानी स्किल की मांग हुआ करती थी। जिस ऑस्ट्रेलियाई टीम की बेहतरीन फिटनेस को देखकर आज दुनिया दंग रह जाती है, उसी टीम ने साल 1920 में एक ऐसे क्रिकेटर को मैदान पर उतारा था जिसका वजन 133 किलोग्राम था और उन्होंने टीम की कप्तानी भी संभाली थी। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के इतिहास पर नजर डाली जाए तो ऐसे कई खिलाड़ी मिल जाएंगे जिनका वजन 100 किलो से अधिक था, लेकिन उनके भारी शरीर ने कभी उनके शानदार प्रदर्शन के आड़े आने नहीं दिया।
वारविक आर्मस्ट्रांग बने थे पहले 100+ किलो के टेस्ट कप्तान
साल 1920 में इंग्लैंड के खिलाफ मुकाबले के लिए ऑस्ट्रेलिया ने एक ऐसे खिलाड़ी को टीम की कमान सौंपी थी, जिनका वजन 133 किलो था। वारविक आर्मस्ट्रांग नाम के इस धुरंधर क्रिकेटर को दुनिया दि बिग शिप के नाम से जानती थी। इतने ज्यादा वजन के साथ मैदान पर टिके रहना और लंबा प्रदर्शन करना कतई आसान नहीं था, इसके बावजूद वारविक आर्मस्ट्रांग ने अपने करियर में कुल 50 टेस्ट मैच खेले। उन्होंने 38.69 के शानदार औसत से बल्लेबाजी करते हुए 6 शतकों की मदद से 2863 रन बनाए। इसके अलावा वारविक आर्मस्ट्रांग उपयोगी लेग स्पिन गेंदबाजी भी करते थे और उन्होंने अपने नाम 87 टेस्ट विकेट भी दर्ज किए। साल 1921 में उन्हीं की कप्तानी में खेलते हुए ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड को 5-0 से करारी शिकस्त दी थी और सीरीज में क्लीन स्वीप किया था।
अन्य भारी-भरकम खिलाड़ियों का शानदार सफर
क्रिकेट जगत में ऐसे कई और खिलाड़ी भी हुए हैं जिन्होंने अपने भारी वजन के बावजूद अमिट छाप छोड़ी। साल 2019 में वेस्टइंडीज के एक खिलाड़ी ने भारत के खिलाफ अपना टेस्ट डेब्यू किया था जो ऑफ स्पिन गेंदबाजी के साथ-साथ निचले क्रम में बल्लेबाजी करने के लिए जाने जाते थे। उनका नाम रहकीम कार्नवाल था और उनका वजन 140 किलो था। इसके अलावा बरमूडा के बाएं हाथ के स्पिनर ड्वेन लेवरॉक 136 किलोग्राम वजन के साथ साल 2007 का वर्ल्ड कप खेले थे, जहां स्लिप में रॉबिन उथप्पा का बेहतरीन कैच लपकने की वजह से वह सालों तक सुर्खियों में बने रहे थे। पाकिस्तान के विकेटकीपर बल्लेबाज आजम खान भी 110 किलो वजन के साथ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेले, और टी-20 फॉर्मेट में उनका प्रदर्शन विशेष रूप से ध्यान खींचने वाला रहा। 100 किलो से अधिक वजन वाले खिलाड़ियों में सबसे लंबा अंतरराष्ट्रीय करियर श्रीलंका के सबसे सफल कप्तान अर्जुन रणतुंगा का रहा। करीब 115 किलो वजन के साथ रणतुंगा ने 93 टेस्ट मैच खेले और साल 1996 का वर्ल्ड कप अपनी टीम को जिताया। उनके नाम अपने देश के लिए पहला 100वां टेस्ट मैच खेलने का ऐतिहासिक रिकॉर्ड भी दर्ज है।
























