भारतीय खानपान में मिठाइयों का खास स्थान रहा है और त्योहारों या खास मौकों पर लड्डू का नाम सबसे पहले आता है। आम तौर पर लोग बेसन या मोतीचूर के लड्डुओं के बारे में ही ज्यादा सोचते हैं, लेकिन देश के अलग-अलग राज्यों में स्थानीय सामग्री और परंपरा के आधार पर कई अन्य प्रकार के लड्डू भी चाव से खाए जाते हैं। इन पारंपरिक व्यंजनों में स्वाद के साथ-साथ सेहत का भी पूरा ध्यान रखा जाता है।
तिल और गुड़ के लड्डू
सर्दियों के मौसम और मकर संक्रांति के दौरान तिल और गुड़ के लड्डू विशेष रूप से तैयार किए जाते हैं। इस प्रक्रिया में सबसे पहले तिल को अच्छी तरह भून लिया जाता है और फिर उसे गुड़ की चाशनी या पिघले हुए गुड़ के साथ मिलाया जाता है। मिश्रण को थोड़ा ठंडा होने के बाद हाथों से गोल आकार दिया जाता है। स्वाद को और बेहतर बनाने के लिए कई लोग इसमें मूंगफली या तरह-तरह के सूखे मेवे भी शामिल कर लेते हैं।
पारंपरिक गोंद के लड्डू
उत्तर भारत के तमाम परिवारों में गोंद के लड्डू बनाने की परंपरा सर्दियों के दिनों में निभाई जाती है। इन्हें बनाने के लिए खाने वाले गोंद को शुद्ध घी में तला जाता है ताकि वह अच्छी तरह फूल जाए। इसके बाद इसमें आटा, गुड़ या चीनी के साथ कटे हुए मेवे मिलाए जाते हैं और फिर गोल लड्डू तैयार किए जाते हैं। घी, मेवे और हल्की कुरकुरी बनावट इन लड्डुओं को बेहद खास बनाती है।
दक्षिण भारत के उड़द दाल लड्डू
दक्षिण भारतीय राज्यों में उड़द दाल से बनने वाले लड्डू काफी लोकप्रिय हैं और आंध्र प्रदेश में इन्हें विशेष रूप से सुन्नुंडालु कहा जाता है। इसे तैयार करने की विधि में उड़द दाल को भूनकर बारीक पीस लिया जाता है, जिसके बाद इसमें घी और चीनी या गुड़ मिलाकर लड्डू का रूप दिया जाता है। भुनी हुई दाल की सौंधी महक इन लड्डुओं को अन्य मिठाइयों से बिल्कुल अलग पहचान दिलाती है।
सत्तू से बनने वाले लड्डू
बिहार और उसके आसपास के इलाकों में सत्तू का उपयोग कई तरह के व्यंजनों में बहुतायत से होता है और इसके लड्डू भी काफी पसंद किए जाते हैं। भुने हुए चने के सत्तू में घी के साथ गुड़ या चीनी मिलाकर मिश्रण तैयार किया जाता है। जरूरत के मुताबिक इसमें बादाम, काजू या इलायची भी डाली जा सकती है, जिससे सत्तू की सोंधी खुशबू और गुड़ की मिठास का मेल एक अलग स्वाद देता है।
राजस्थान के प्रसिद्ध चूरमा लड्डू
राजस्थानी संस्कृति में चूरमा के लड्डू अपने अनूठे पारंपरिक स्वाद के लिए जाने जाते हैं। इन्हें बनाने के लिए सबसे पहले गेहूं के आटे से बाटी या मोटी रोटी पकाई जाती है। पकने के बाद इस बाटी को बारीक चूर कर उसमें घी और गुड़ या चीनी मिलाई जाती है। स्वाद को और बढ़ाने के लिए इलायची और कटे मेवे भी डाले जाते हैं और यह चूरमा मुख्य रूप से दाल-बाटी के साथ परोसा जाता है।
मूंगफली और गुड़ के लड्डू
मूंगफली और गुड़ के लड्डू बनाने के लिए बहुत अधिक तामझाम की आवश्यकता नहीं होती है। सबसे पहले मूंगफली के दानों को भूनकर उनके छिलके हटाए जाते हैं और फिर उन्हें हल्का दरदरा कूटकर पिघले हुए गुड़ में मिलाया जाता है। मिश्रण के गर्म रहने पर ही इसके लड्डू बांध लिए जाते हैं क्योंकि ठंडा होने पर गुड़ कड़ा हो जाता है। मूंगफली का क्रंच और गुड़ की मिठास सर्दियों के दिनों में लोगों को खूब भाती है।























