घरेलू क्रिकेट में रनों का अंबार लगाने वाले बल्लेबाज सरफराज खान ने भारतीय क्रिकेट टीम में दोबारा जगह न मिलने को लेकर खुलकर अपनी बात रखी है। रेलवे के खिलाफ जारी रणजी ट्रॉफी मैच के शुरुआती दिन का खेल समाप्त होने के पश्चात उन्होंने अपनी मानसिक स्थिति और संघर्ष को साझा किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि जब चयन के दरवाजे बंद नजर आते हैं, तो रोज सुबह जागते ही यह ख्याल दिमाग में कौंधता है कि इस निरंतर अभ्यास और पसीने का आखिरकार क्या औचित्य है। इसके बावजूद वह अपनी अनुशासित दिनचर्या से कभी समझौता नहीं करते और रोजाना भोर में 5 बजे उठकर मैदान की ओर रुख करते हैं।
पिता की कड़ी मेहनत से मिलती है मैदान पर लौटने की ऊर्जा
निराशा के इन थका देने वाले पलों में सरफराज अपने पिता नौशाद खान के समर्पण से हौसला पाते हैं। उन्होंने बताया कि जब भी उनके मन में अभ्यास को लेकर अनिच्छा पैदा होती है या यह सवाल उठता है कि वह इतनी मशक्कत क्यों झेल रहे हैं, तब वह अपने पिता को पसीना बहाते देखते हैं। पिता का यह अथक संघर्ष ही उन्हें दोबारा बल्ला थामने और मैदान पर अपना सौ प्रतिशत देने को विवश करता है। अपनी सख्त दिनचर्या के बारे में बात करते हुए बल्लेबाज ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को उनसे मुलाकात करनी हो, तो उसे उनके आवास पर जाने का कष्ट उठाने की आवश्यकता नहीं है। सुबह 6 बजे कोई भी सीधे आजाद मैदान अथवा क्रॉस मैदान आ सकता है, क्योंकि वह उसी समय वहां अभ्यास में लीन मिलते हैं।
घरेलू पिचों तक सीमित मानने की सोच पर उठाया सवाल
फरवरी 2024 में टेस्ट क्रिकेट में कदम रखने वाले सरफराज खान ने अब तक अपने करियर के सभी छह टेस्ट मैच भारतीय सरजमीं पर ही खेले हैं। उन्होंने इस बात पर आश्चर्य जताया कि टीम प्रबंधन शायद उनकी उपयोगिता केवल भारतीय उपमहाद्वीप की पिचों तक ही सीमित मान रहा है। यद्यपि चयन समिति ने उनसे व्यक्तिगत तौर पर इस विषय में कोई औपचारिक संवाद नहीं किया है, परंतु विदेशी दौरों से दूर रखे जाने के रवैये से उन्हें ऐसा ही प्रतीत होता है।
अपनी काबिलियत के प्रमाण के तौर पर उन्होंने दक्षिण अफ्रीका और इंग्लैंड के दौरों का स्मरण कराया, जहां इंडिया ए के लिए खेलते हुए उन्होंने अभ्यास मुकाबलों में शतकीय पारियां खेली थीं। विदेशी परिस्थितियों में रन बनाने के बाद भी नजरअंदाज किए जाने पर उन्होंने कहा कि वह इन तकनीकी फैसलों पर अधिक दिमाग नहीं खपाते। उनका मुख्य दायित्व केवल 22 गज की पट्टी पर जाकर क्रिकेट खेलना है। यदि चयनकर्ता उन्हें देश का प्रतिनिधित्व करने का अवसर प्रदान करेंगे, तो वह निश्चित रूप से टीम के लिए योगदान देंगे। अन्यथा वह मुंबई और घरेलू स्तर पर रणजी ट्रॉफी में लगातार रन बनाकर अपना काम पूरी ईमानदारी से जारी रखेंगे।



















