केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह छत्तीसगढ़ दौरे के दौरान राज्योत्सव के समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। मंच से जनता को संबोधित करते हुए उन्होंने पूरे प्रदेश के नागरिकों और विशेष रूप से आदिवासी समाज को राज्योत्सव की बधाई दी। अपने संबोधन में उन्होंने राज्य निर्माण की पृष्ठभूमि को याद करते हुए कहा कि जब छत्तीसगढ़ का गठन हुआ, तब यह स्पष्ट था कि वहां कांग्रेस की सरकार बनेगी। इसके बावजूद राजनीतिक नफा-नुकसान की चिंता किए बिना राज्य का निर्माण किया गया, जिसके लिए उन्होंने मंच और छत्तीसगढ़ की जनता की ओर से अटल बिहारी बाजपेयी का आभार व्यक्त किया।
नक्सल समस्या का अंत और प्रगति का संकल्प
समारोह को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि छत्तीसगढ़ अब नक्सलवाद के प्रभाव से बाहर निकलकर तेज गति से विकास के पथ पर अग्रसर है। उन्होंने दोहराया कि विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण ही उनका प्रमुख संकल्प है। उन्होंने सवाल उठाया कि नक्सलवाद समाप्त हो चुका है, तो अब इस मुद्दे पर आवाज धीमी क्यों पड़ गई है? केंद्र की पिछली कांग्रेस सरकार पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि उस दौर में नक्सल समस्या को मिटाने के गंभीर प्रयास नहीं किए गए। वर्तमान व्यवस्था ने नक्सल उन्मूलन का जो दृढ़ संकल्प लिया था, उसे जमीन पर पूरा करके दिखाया है।
हिंसा का दौर और मानवाधिकार पर सवाल
नक्सली हिंसा के पुराने दौर की चर्चा करते हुए केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि जिन बच्चों के हाथों में शिक्षा के लिए कलम होनी चाहिए थी, उन्हें अगवा करके जबरन बंदूकें थमा दी गईं। इसके अलावा क्षेत्र में विकास और तरक्की का रास्ता तैयार करने वाले कई निर्दोष लोगों को उनके परिजनों के सामने जिंदा जला दिया गया। उन्होंने मानवाधिकार की वकालत करने वालों से सीधा सवाल किया कि क्या हथियार उठाकर निर्दोषों की जान लेने वालों के लिए भी मानवाधिकार की दुहाई दी जानी चाहिए?
सांस्कृतिक पहचान, खेल और नवा रायपुर में हरित पहल
अमित शाह ने उल्लेख किया कि छत्तीसगढ़ में पूर्व में रमन सिंह के नेतृत्व में पूरे 15 साल तक विकास कार्यों को गति दी गई थी। आयोजन के दौरान समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली हस्तियों को सम्मानित भी किया गया। स्थानीय लोकसंस्कृति की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य की समृद्ध विरासत को सहेजने के लिए बस्तर पंडूम का आयोजन किया जाता है। विष्णुदेव साय की सरकार ने बस्तर दशहरा की अनूठी परंपरा को एक नई और भव्य पहचान दी है। इसके साथ ही बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडूम के आयोजनों के माध्यम से स्थानीय युवाओं ने अपनी पारंपरिक संस्कृति को फिर से जीवंत करने का काम किया है। पर्यावरण संरक्षण की योजना साझा करते हुए उन्होंने बताया कि वित्त मंत्री को यह विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है कि केवल नवा रायपुर क्षेत्र में ही 5 लाख पीपल के पेड़ लगाए जाएं।



















