वेस्टइंडीज के खिलाफ खेली गई पांच मैचों की द्विपक्षीय टी20 सीरीज का अंतिम मुकाबला खराब मौसम के कारण धुल जाने से दोनों टीमों को 2-2 की बराबरी से संतोष करना पड़ा। निर्णायक मुकाबले में मैदान गीला होने और लगातार बारिश के चलते कोई नतीजा नहीं निकल सका, जिससे ट्रॉफी जीतने की भारतीय उम्मीदें अधूरी रह गईं। मैच के बाद भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने स्वीकार किया कि अगर टीम ने कुछ महत्वपूर्ण पलों में बेहतर अनुशासन दिखाया होता, तो सीरीज का रुख अलग हो सकता था।
गेंदबाजों के प्रदर्शन पर कप्तान का खुला आकलन
पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान बातचीत करते हुए श्रेयस अय्यर ने साफ तौर पर कहा कि गेंदबाजी विभाग दूसरे और चौथे टी20 मुकाबले में अपनी योजना को सही ढंग से लागू नहीं कर सका। उनका मानना था कि इन दोनों मैचों में अगर गेंदबाज ज्यादा कसी हुई लाइन और लेंथ पर टिके रहते, तो भारत इस श्रृंखला को अपने नाम कर सकता था। इसके बावजूद उन्होंने खिलाड़ियों के जुझारू तेवर की खुलकर तारीफ की। अय्यर ने जोर देकर कहा कि टीम भविष्य के मुकाबलों में भी इसी आक्रामक शैली को बरकरार रखेगी और अपनी निर्भीक खेल नीति में कोई फेरबदल नहीं करेगी।
युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी पर रखी राय
टीम में नए खिलाड़ियों के चयन और मौके को लेकर हो रही चर्चाओं के बीच कप्तान ने युवा खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी की स्थिति स्पष्ट की। अय्यर ने बताया कि प्रबंधन इस उदीयमान प्रतिभा के संपर्क में है और उन्हें लगातार सही दिशा में काम करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। वर्तमान में भारतीय शीर्ष क्रम बेहद मजबूत स्थिति में है, जहां दोनों नियमित सलामी बल्लेबाज लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे में नए खिलाड़ियों को अंतिम ग्यारह में जगह बनाने के लिए सही अवसर की प्रतीक्षा करनी होगी।
श्रेयस अय्यर ने वैभव को दिए गए संदेश को दोहराते हुए कहा कि अपनी प्रक्रिया पर लगातार काम करते रहना और लय बनाए रखना सबसे अहम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कई बार खिलाड़ियों को अपनी बारी के लिए धैर्यपूर्वक इंतजार करना पड़ता है, इसलिए मुख्य ध्यान अपने कौशल को निखारने पर होना चाहिए।
लगातार सफर और कार्यभार प्रबंधन पर बोले श्रेयस
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के व्यस्त कैलेंडर और एक शहर से दूसरे शहर की निरंतर यात्राओं पर भी कप्तान ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय टीम इस तरह की दिनचर्या से पूरी तरह वाकिफ है और खिलाड़ियों के लिए यह कोई नई बात नहीं है। घरेलू परिस्थितियों में अलग-अलग मैदानों पर लगातार मैच खेलने का दबाव झेलने के लिए टीम का पूरा दल मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार रहता है। खिलाड़ियों का कार्यभार वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधित किया जा रहा है, जिससे वे मैदान पर अपना शत-प्रतिशत योगदान दे सकें।




















