भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाफ चल रही तीन मैचों की वनडे सीरीज में जो रूट ने एक ऐसा अविश्वसनीय कारनामा कर दिखाया है, जिसे सदियों तक याद रखा जाएगा। लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर खेले गए तीसरे और अंतिम मुकाबले में इस दिग्गज बल्लेबाज ने अपनी बेजोड़ तकनीक और क्रीज पर टिके रहने की अद्भुत क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया। पूरी सीरीज के दौरान भारतीय गेंदबाज इस खिलाड़ी को एक बार भी पवेलियन भेजने में पूरी तरह से नाकाम साबित हुए। उन्होंने इस अभियान का समापन 249 रनों के विशाल व्यक्तिगत योग के साथ किया, और हर मैच के अंत में वह नाबाद ही मैदान से बाहर लौटे। उन्होंने पहले मैच में 76 रनों की नाबाद पारी खेलकर इस शानदार सफर की शुरुआत की थी। इसके बाद दूसरे मुकाबले में वह अपनी टीम के लिए संकटमोचक बनकर उभरे, जहां उन्होंने मुश्किल परिस्थितियों से टीम को निकालते हुए 99 रनों की बेहतरीन नाबाद पारी खेली और जीत दिलाई। इस निरंतरता ने उन्हें एक अद्वितीय विश्व रिकॉर्ड का सरताज बना दिया है। अब वह दुनिया के इकलौते ऐसे बल्लेबाज बन गए हैं, जिन्होंने किसी द्विपक्षीय वनडे सीरीज में बिना अपना विकेट गंवाए सबसे ज्यादा रन बनाने का जादुई आंकड़ा छुआ है। विपक्षी टीम के लिए यह तथ्य किसी बुरे सपने से कम नहीं था कि वे तीन मैचों में एक बार भी उनका शिकार नहीं कर सके।
दिग्गजों के रिकॉर्ड्स को किया पीछे
इस पूरी सीरीज में अजेय रहकर, अनुभवी अंग्रेजी बल्लेबाज ने एक बहुत बड़ा वैश्विक कीर्तिमान अपने नाम कर लिया है, जो इससे पहले उन्हीं के कप्तान जोस बटलर के नाम दर्ज था। साल 2022 में नीदरलैंड्स के खिलाफ खेलते हुए बटलर ने दो पारियों में बिना आउट हुए कुल 248 रन बटोरे थे। इस प्रतिष्ठित सूची में इससे पहले तीसरे स्थान पर ऑस्ट्रेलिया के महान पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग काबिज थे। पोंटिंग ने साल 2007 में न्यूजीलैंड के खिलाफ शानदार प्रदर्शन करते हुए बिना आउट हुए 241 रनों का आंकड़ा पार किया था। जो रूट ने अब इन दोनों क्रिकेट के दिग्गजों को पछाड़कर सर्वोच्च स्थान हासिल कर लिया है। इसके अतिरिक्त, उनकी इस रनों की बारिश ने सचिन तेंदुलकर जैसे महान खिलाड़ी के एक बड़े रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया है। अंग्रेजी टीम का यह स्टार बल्लेबाज अब लगातार छह बार पचास रनों का आंकड़ा पार करने वाला अपने देश का पहला खिलाड़ी बन गया है, जो उनकी शानदार फॉर्म को दर्शाता है।
मजबूत शुरुआत और पारी की गति बदलना
इस ऐतिहासिक सफर का सबसे रोमांचक मोड़ सीरीज के आखिरी मुकाबले में देखने को मिला। पारी की शुरुआत में ही मेजबान टीम ने एक बेहद मजबूत स्थिति हासिल कर ली थी। जैकब बेथेल और बेन डकेट की सलामी जोड़ी ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए टीम को एक बेहतरीन मंच प्रदान किया। जब 31वें ओवर में जैकब बेथेल का विकेट गिरा, तब तक स्कोरबोर्ड पर एक विकेट के नुकसान पर 192 रन टंग चुके थे। इसी बेहद अनुकूल स्थिति में जो रूट ने क्रीज पर अपना कदम रखा। शुरुआत में उन्होंने एक बहुत ही सधी हुई रणनीति अपनाई। उनका पूरा ध्यान केवल स्ट्राइक रोटेट करने और सिंगल्स या डबल्स लेकर रन गति को चालू रखने पर था। इस दौरान दूसरे छोर पर बेन डकेट लगातार भारतीय आक्रमण की बखिया उधेड़ रहे थे। डकेट ने 141 रनों की एक बेहद आक्रामक और यादगार पारी खेली। उनका यह बेहतरीन शतक इतना खास था कि इसने 47 साल पुराने एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया और महान कैरेबियाई बल्लेबाज विवियन रिचर्ड्स को भी आंकड़ों के मामले में पीछे छोड़ दिया।
गेंदबाजी आक्रमण की कमजोरियां उजागर
जैसे ही बेन डकेट अपनी शानदार शतकीय पारी खेलकर वापस लौटे, मैच का पूरा रुख ही बदल गया। जो रूट ने तुरंत अपनी रणनीति बदली और एक बेहद आक्रामक रवैया अपना लिया। उन्होंने शानदार बल्लेबाजी करते हुए महज 40 गेंदों में इस सीरीज का अपना लगातार तीसरा अर्धशतक पूरा कर लिया। भारतीय गेंदबाजों ने उनके खिलाफ शॉर्ट पिच गेंदे फेंकने की रणनीति अपनाई, लेकिन इस दिग्गज ने मैदान के हर कोने में रन बटोरे। उन्होंने रिवर्स स्वीप, पुल और स्कूप जैसे बेहतरीन शॉट्स खेलकर विपक्षी टीम की हर चाल को नाकाम कर दिया। उनकी इस आक्रामक बल्लेबाजी ने भारतीय गेंदबाजी आक्रमण की सबसे बड़ी कमजोरियों को पूरी तरह से बेनकाब कर दिया। मेहमान टीम को अपने मुख्य तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह की कमी बहुत खली, जो चोट के कारण बाहर थे। इसके साथ ही, टीम कॉम्बिनेशन का हवाला देकर करिश्माई स्पिनर कुलदीप यादव को बेंच पर बैठाने का टीम मैनेजमेंट का फैसला भी बहुत भारी पड़ा। बीच के ओवरों में भारत के पास कोई भी ऐसा गेंदबाज मौजूद नहीं था जो विकेट निकालकर रनों की रफ्तार पर लगाम लगा सके।
आखिरी ओवरों का तूफान और विशाल स्कोर
मैच के अंतिम ओवरों में फील्डिंग कर रही टीम के लिए हालात पूरी तरह से बेकाबू हो गए। डेथ ओवरों के दौरान जो रूट ने अपनी आक्रामकता को चरम सीमा पर पहुंचा दिया। अपनी पारी की आखिरी 15 गेंदों का सामना करते हुए उन्होंने निर्ममता से 35 रन कूट डाले। उनकी इस शानदार फिनिशिंग में पारी के अंतिम दो ओवरों में जड़े गए चार बेहतरीन चौके भी शामिल थे। अंतिम क्षणों में कप्तान जोस बटलर ने भी उनका पूरा साथ दिया और इन दोनों ने मिलकर भारतीय गेंदबाजों को पूरी तरह से दबाव में ला दिया। इन दोनों अनुभवी खिलाड़ियों ने महज 19 गेंदों का सामना करते हुए 63 रनों की एक बेहद विस्फोटक और अटूट साझेदारी निभाई। इस अंतिम प्रहार का ही नतीजा था कि मेजबान टीम ने आखिरी 5 ओवरों में 77 रन बटोरे और निर्धारित पचास ओवरों की समाप्ति पर 3 विकेट खोकर 387 रनों का एक पहाड़ जैसा स्कोर खड़ा कर दिया। जो रूट 48 गेंदों में 74 रन बनाकर अंत तक क्रीज पर डटे रहे। भारतीय दल और उनके रणनीतिकारों के लिए यह सीरीज एक बहुत बड़ा सबक छोड़ गई है, जहां उन्हें यह सोचना होगा कि आखिर वे इस खिलाड़ी को आउट करने में क्यों विफल रहे।




















