इंडियन प्रीमियर लीग के आगामी सत्र को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं, और इसी बीच चेन्नई सुपर किंग्स के पूर्व कप्तान एमएस धोनी से जुड़ा एक महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। जानकारी के अनुसार, एमएस धोनी ने आईपीएल के मैचों में इम्पैक्ट प्लेयर के रूप में मैदान में उतरने की संभावना को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। यह महत्वपूर्ण जानकारी भारतीय क्रिकेट टीम और चेन्नई सुपर किंग्स में धोनी के साथी रहे पूर्व खिलाड़ी सुब्रमण्यम बद्रीनाथ के माध्यम से सामने आई है। बद्रीनाथ ने स्पष्ट किया है कि धोनी केवल आंशिक रूप से मैदान में उतरने के पक्षधर नहीं हैं।
इम्पैक्ट प्लेयर बनने से धोनी का साफ इनकार
सुब्रमण्यम बद्रीनाथ ने अपने यूट्यूब चैनल पर एक विस्तृत बातचीत के दौरान इस पूरे मामले की जानकारी साझा की। बद्रीनाथ ने बताया कि एमएस धोनी से हुई व्यक्तिगत बातचीत के दौरान उन्होंने अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट रूप से सामने रखा था। धोनी का मानना है कि वे खुद को एक पूर्णकालिक विकेटकीपर और खिलाड़ी के रूप में देखते हैं। उनका दृष्टिकोण बिल्कुल साफ है कि यदि वे किसी मुकाबले का हिस्सा बनते हैं, तो वे पूरे 20 ओवर तक मैदान पर रहकर टीम के लिए योगदान देंगे। केवल कुछ ओवरों की बल्लेबाजी या इम्पैक्ट विकल्प के तौर पर मैदान में आना उनकी खेल शैली और मानसिकता के अनुकूल नहीं है।
आईपीएल 2026 में चोट के कारण नहीं खेल पाए थे एक भी मैच
यह घटनाक्रम आईपीएल 2026 के दौरान बनी परिस्थितियों से भी जुड़ा हुआ है। गौरतलब है कि आईपीएल 2026 के पूरे सत्र के दौरान एमएस धोनी पैर की चोट से जूझते रहे थे। चोट की वजह से वे पूरे टूर्नामेंट के दौरान चेन्नई सुपर किंग्स की टीम के साथ मौजूद तो रहे, लेकिन एक भी मैच में अंतिम एकादश का हिस्सा नहीं बन सके। उस दौरान फ्रेंचाइजी और क्रिकेट विशेषज्ञों के बीच इस बात पर विचार-विमर्श किया जा रहा था कि यदि धोनी पूर्ण फिटनेस हासिल नहीं कर पाते हैं, तो कम से कम इम्पैक्ट प्लेयर के नियम का उपयोग करते हुए उन्हें बल्लेबाजी के लिए मैदान में उतारा जा सकता है। हालांकि, बद्रीनाथ के इस नए खुलासे से अब साफ हो गया है कि धोनी ने स्वयं इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से मना कर दिया था।
बद्रीनाथ का दृष्टिकोण और टीम के फायदे का तर्क
चर्चा के दौरान सुब्रमण्यम बद्रीनाथ ने इस बात पर भी अपना विचार रखा कि यदि धोनी इम्पैक्ट प्लेयर के रूप में खेलते हैं तो इससे टीम को क्या लाभ हो सकता है। बद्रीनाथ के अनुसार, वर्तमान परिस्थितियों में धोनी के लिए लंबे समय तक विकेटकीपिंग करना और मैदान पर टिके रहना शारीरिक रूप से काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। चूंकि धोनी आमतौर पर पारी के अंतिम ओवरों में ही बल्लेबाजी करने आते हैं, इसलिए यदि वे केवल इम्पैक्ट प्लेयर की भूमिका निभाते हैं तो यह टीम और उनके शारीरिक प्रबंधन दोनों के दृष्टिकोण से काफी व्यावहारिक और फायदेमंद साबित हो सकता है। इसके बावजूद, धोनी अपनी पुरानी प्रतिबद्धता पर कायम हैं।
बीसीसीआई द्वारा इम्पैक्ट प्लेयर नियम की समीक्षा
इस पूरे मामले के साथ-साथ आईपीएल में इम्पैक्ट प्लेयर नियम के भविष्य को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड ने आईपीएल में भाग लेने वाली सभी 10 फ्रेंचाइजियों को आधिकारिक पत्र भेजकर इस नियम के संबंध में उनकी राय मांगी है। बोर्ड यह समीक्षा कर रहा है कि आने वाले सत्रों में इस नियम को बरकरार रखा जाए या इसे पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाए। पिछले कुछ सत्रों के दौरान कई प्रमुख खिलाड़ियों और टीमों ने इस नियम के प्रभाव पर चिंता व्यक्त की थी और इसका विरोध किया था। अब बीसीसीआई फ्रेंचाइजियों की प्रतिक्रिया के आधार पर ही इस नियम पर कोई अंतिम निर्णय लेगा।


















