मद्रास हाई कोर्ट ने चेन्नई सुपर किंग्स के पूर्व कप्तान एमएस धोनी द्वारा दायर 100 करोड़ रुपये के मानहानि मुकदमे में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने पूर्व आईपीएस अधिकारी जी. संपत कुमार की उन तीन याचिकाओं को स्वीकार कर लिया है, जिनमें दिग्गज क्रिकेटर की गवाही दर्ज करने की प्रक्रिया और स्थान को लेकर विशेष दिशा-निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। न्यायपीठ ने साफ किया है कि गवाही की प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार का वीआईपी ट्रीटमेंट या विशेष छूट नहीं दी जाएगी।
फाइव स्टार होटल के बजाय सरकारी इमारत में होगी गवाही
अदालत में सुनवाई के दौरान जी. संपत कुमार के वकीलों ने धोनी के बयान दर्ज करने के स्थान पर कड़ा ऐतराज जताया था। याचिकाकर्ता का पक्ष रखते हुए वकीलों ने कहा कि एमएस धोनी भले ही एक बड़े सेलिब्रिटी क्रिकेटर हैं, लेकिन कानूनी प्रक्रिया में उन्हें किसी तरह की रियायत नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने अदालत से गुजारिश की थी कि धोनी की गवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग किसी फाइव स्टार लग्जरी होटल में कराने की अनुमति न दी जाए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जस्टिस गोविंदराजन थिलकवादी ने संपत कुमार के तर्कों को स्वीकार कर लिया। अदालत ने स्पष्ट आदेश जारी किया कि धोनी की गवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग किसी लग्जरी होटल में आयोजित नहीं होगी, बल्कि यह प्रक्रिया अदालत परिसर या फिर किसी मान्यता प्राप्त सरकारी भवन में ही संपन्न कराई जाएगी।
हाई कोर्ट द्वारा मंजूर की गईं तीन मुख्य मांगें
100 करोड़ रुपये के इस हाई-प्रोफाइल मानहानि मामले में मद्रास हाई कोर्ट ने संपत कुमार की निम्नलिखित तीनों मांगों को मंजूरी दी है
- न्यायिक अधिकारी की नियुक्ति: एमएस धोनी का बयान दर्ज करने की पूरी प्रक्रिया की देखरेख और निगरानी के लिए एक न्यायिक अधिकारी नियुक्त किया जाएगा।
- अनएडिटेड वीडियो रिकॉर्डिंग: गवाही के पूरे चरण की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी। इस रिकॉर्डिंग की बिना किसी बदलाव या संपादन (अनएडिटेड) वाली मूल प्रति संपत कुमार और कोर्ट द्वारा नियुक्त न्यायिक अधिकारी दोनों को प्रदान की जाएगी।
- सरकारी परिसर का चयन: बयान दर्ज करने का कार्य किसी लग्जरी होटल में होने के बजाय केवल अदालत परिसर या किसी सरकारी इमारत में ही आयोजित किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला और धोनी को हलफनामे का मौका
बहस के दौरान संपत कुमार की कानूनी टीम ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का उदाहरण प्रस्तुत किया। वकीलों ने दलील दी कि शीर्ष अदालत ने भी समान परिस्थितियों वाले मामलों में निष्पक्ष गवाही के लिए ऐसे ही दिशा-निर्देश जारी किए थे। सुप्रीम कोर्ट के उन आदेशों और नजीरों का अध्ययन करने के बाद जस्टिस गोविंदराजन थिलकवादी ने संपत कुमार की अर्जियों पर अपनी मुहर लगा दी।
इसके साथ ही न्यायमूर्ति ने यह भी स्पष्ट किया कि इन आवेदनों पर सुनवाई के बाद एमएस धोनी को भी अदालत में अपना जबावी हलफनामा (काउंटर एफिडेविट) दाखिल करने का पूरा अवसर दिया जाएगा, ताकि वे अपना पक्ष रख सकें।
2014 के 100 करोड़ मानहानि मुकदमे की पृष्ठभूमि
यह पूरा कानूनी विवाद वर्ष 2014 से चला आ रहा है, जब एमएस धोनी ने मद्रास हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। धोनी ने पूर्व आईपीएस अधिकारी जी. संपत कुमार, जी मीडिया, न्यूज नेशन नेटवर्क तथा जी न्यूज के पूर्व संपादक व बिजनेस हेड सुधीर चौधरी के खिलाफ 100 करोड़ रुपये का मानहानि मुकदमा दायर किया था।
धोनी का आरोप था कि 2013 के आईपीएल सट्टेबाजी और स्पॉट फिक्सिंग मामले में उनका नाम अनुचित तरीके से घसीटा गया और भ्रामक खबरें प्रसारित की गईं। इसी के विरोध में उन्होंने क्षतिपूर्ति के रूप में 100 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की थी।



















