भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि यानी 3 सितंबर 2026 को शीतला सप्तमी का पावन पर्व मनाया जाएगा। इस विशेष तिथि पर रवि योग और कृतिका नक्षत्र का अत्यंत दुर्लभ और फलदायी संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रवि योग में शुरू किया गया कोई भी कार्य निष्फल नहीं होता, क्योंकि इसमें सूर्य देव का विशेष तेज और ऊर्जा समाहित होती है। यदि आप भी इस शुभ दिन पर कोई नया कार्य, पूजा-पाठ या मांगलिक अनुष्ठान करने की योजना बना रहे हैं, तो पंचांग के अनुसार सभी शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय ध्यानपूर्वक नोट कर लें ताकि कार्य बिना किसी बाधा के संपन्न हो सके।
तिथि, नक्षत्र और शुभ योग का समय
वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार 3 सितंबर 2026 को भाद्रपद कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि पूरे दिन रहने के बाद देर रात 2 बजकर 26 मिनट तक प्रभावी रहेगी। इसके उपरांत अष्टमी तिथि का आरंभ हो जाएगा। इसी दिन रवि योग का प्रभाव रात्रि 12 बजकर 29 मिनट तक बना रहेगा। नक्षत्र मंडल की बात करें तो कृतिका नक्षत्र भी रात 12 बजकर 30 मिनट तक विद्यमान रहेगा। यह पूरा दिन शीतला सप्तमी के व्रत और पूजन के लिए अत्यंत पवित्र माना गया है, जिसमें विधि-विधान से पूजा अर्चना करने से आरोग्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
रवि योग एवं कृतिका नक्षत्र का ज्योतिषीय महत्त्व
ज्योतिष शास्त्र में रवि योग को एक अत्यंत शक्तिशाली और सकारात्मक योग माना गया है। सूर्य देव के प्रत्यक्ष प्रभाव वाले इस योग में नकारात्मक शक्तियों और अनिष्ट प्रभावों को समाप्त करने की अद्भुत क्षमता होती है। मान्यता है कि इस योग के दौरान किए गए संकल्प और शुरू किए गए कार्य निर्विघ्न रूप से पूरे होते हैं। वहीं, 27 नक्षत्रों की श्रृंखला में कृतिका को तीसरा स्थान प्राप्त है। कृतिका नक्षत्र का प्रथम चरण मेष राशि में आता है, जबकि अंतिम तीन चरण वृष राशि में स्थित होते हैं। इस कारण मेष और वृष दोनों ही राशियों के जातकों पर इस नक्षत्र का सीधा प्रभाव पड़ता है। कृतिका नक्षत्र के समय सूर्य देव की विशेष पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति को तेज, मान-सम्मान और आरोग्य की प्राप्ति होती है।
3 सितंबर 2026 के मुख्य शुभ मुहूर्त
दिन के दौरान विभिन्न धार्मिक क्रियाकलापों, मंत्र जाप और शुभ कार्यों के संपादन के लिए पंचांग में विशिष्ट मुहूर्त निर्धारित किए गए हैं। इन समय अवधियों में किए गए कार्य अति फलदायी सिद्ध होते हैं
- ब्रह्म मुहूर्त: प्रात: 04:30 AM से प्रात: 05:15 AM तक (ध्यान और प्रभु स्मरण हेतु श्रेष्ठ समय)
- प्रातः सन्ध्या: प्रात: 04:52 AM से प्रात: 06:00 AM तक
- अभिजित मुहूर्त: दोपहर 11:55 AM से दोपहर 12:46 PM तक (किसी भी नए कार्य की शुरुआत के लिए सर्वोत्तम)
- विजय मुहूर्त: दोपहर 02:27 PM से अपराह्न 03:18 PM तक
- अमृत काल: अपराह्न 03:07 PM से सायंकाल 04:54 PM तक
- गोधूलि मुहूर्त: सायंकाल 06:41 PM से संध्या 07:03 PM तक
- सायाह्न सन्ध्या: रात्रि 10:12 PM से रात्रि 11:43 PM तक
सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
3 सितंबर 2026 को सूर्योदय और सूर्यास्त का समय इस प्रकार रहेगा। दैनिक पूजा और व्रत के पारण आदि के लिए इन समयों का विशेष ध्यान रखा जाता है
- सूर्योदय: प्रातः 06:00 AM बजे
- सूर्यास्त: सायंकाल 06:41 PM बजे
विभिन्न प्रमुख शहरों में राहुकाल का समय
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राहुकाल की अवधि में कोई भी नया, शुभ या मांगलिक कार्य प्रारंभ नहीं करना चाहिए। इस समय में शुरू किए गए कार्यों में विघ्न आने की संभावना रहती है। देश के मुख्य शहरों में 3 सितंबर को राहुकाल की समयावधि निम्नवत रहेगी
- दिल्ली: दोपहर 01:55 PM से अपराह्न 03:30 PM तक
- मुंबई: दोपहर 02:11 PM से अपराह्न 03:45 PM तक
- चंडीगढ़: दोपहर 01:57 PM से अपराह्न 03:33 PM तक
- लखनऊ: दोपहर 01:40 PM से अपराह्न 03:15 PM तक
- भोपाल: दोपहर 01:53 PM से अपराह्न 03:28 PM तक
- कोलकाता: दोपहर 01:10 PM से दोपहर 02:44 PM तक
- अहमदाबाद: दोपहर 02:13 PM से अपराह्न 03:47 PM तक
- चेन्नई: दोपहर 01:41 PM से अपराह्न 03:13 PM तक



















