इंडियन प्रीमियर लीग के इतिहास में सबसे सफल कप्तानों में शुमार महेंद्र सिंह धोनी और चेन्नई सुपर किंग्स के बीच रिश्ते में नई हलचल देखने को मिल रही है। साल 2008 में टूर्नामेंट की शुरुआत के समय से ही धोनी इस टीम का अहम हिस्सा रहे हैं। उन्होंने न केवल टीम को अपनी कप्तानी में पांच बार चैंपियन बनाया, बल्कि वह इस फ्रेंचाइजी के लिए सबसे ज्यादा मैच खेलने वाले और सबसे अधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज भी हैं। 45 साल के हो चुके धोनी अपने क्रिकेट करियर के आखिरी पड़ाव पर हैं और IPL 2027 में उनके मैदान पर उतरने को लेकर तमाम अटकलें लगाई जा रही हैं। इसी बीच यह बात सामने आई है कि धोनी फ्रेंचाइजी के साथ अपने जुड़ाव को व्यावसायिक रूप से और मजबूत करना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने टीम में हिस्सेदारी खरीदने की इच्छा जताई थी, लेकिन दोनों पक्षों के बीच शेयर के प्रतिशत को लेकर सहमति नहीं बन सकी और बातचीत बेनतीजा समाप्त हो गई।
हिस्सेदारी के गणित पर नहीं बनी बात
धोनी और सीएसके मैनेजमेंट के बीच फ्रेंचाइजी की हिस्सेदारी को लेकर कई दौर की वार्ता हुई। शुरुआती दौर में धोनी ने चेन्नई सुपर किंग्स में 25 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने की इच्छा जाहिर की थी। हालांकि, फ्रेंचाइजी के मालिक धोनी को सिर्फ 3 फीसदी हिस्सेदारी ही देने के पक्ष में थे। दोनों पक्षों के बीच बातचीत का सिलसिला आगे बढ़ा, लेकिन मांग और प्रस्ताव के बीच का अंतर काफी बड़ा था। इसके बाद धोनी ने अपनी मांग को थोड़ा लचीला बनाते हुए इसे घटाकर 20 फीसदी कर दिया। इसके जवाब में सीएसके मैनेजमेंट ने भी अपने प्रस्ताव में थोड़ा सुधार किया और उसे बढ़ाकर 4 फीसदी कर दिया।
इसके बावजूद दोनों पक्षों के बीच बात नहीं बन सकी। आगे की चर्चा में धोनी 18 फीसदी हिस्सेदारी पर समझौता करने के लिए तैयार हो गए थे। हालांकि, सीएसके की ओर से दिया गया अंतिम प्रस्ताव 5.5 फीसदी हिस्सेदारी का ही रहा। दोनों ही पक्ष अपनी-अपनी तय शर्तों से पीछे हटने को तैयार नहीं हुए, जिसके कारण यह समझौता सिरे नहीं चढ़ सका। ध्यान देने योग्य बात यह है कि धोनी यह हिस्सेदारी मुफ्त में या सम्मान के रूप में नहीं मांग रहे थे, बल्कि वह इसके लिए निर्धारित व्यावसायिक मूल्य का भुगतान करने को पूरी तरह तैयार थे। इस पूरे घटनाक्रम पर फिलहाल सीएसके प्रबंधन या धोनी की तरफ से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
मौखिक बातचीत और स्वतंत्र पुष्टि का अभाव
इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि धोनी और सीएसके प्रबंधन के बीच हुई ज्यादातर चर्चाएं केवल मौखिक स्तर पर ही संपन्न हुई थीं। दोनों पक्षों के बीच किसी भी प्रकार का औपचारिक लिखित दस्तावेज या कानूनी समझौता तैयार नहीं किया गया था। लिखित कागजात न होने की वजह से हिस्सेदारी को लेकर हुई इस पूरी बातचीत का दायरा किस हद तक पहुंचा था, इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना मुश्किल है।
भविष्य के संबंधों और खेल पर असर
हिस्सेदारी की बातचीत बेनतीजा खत्म होने के बाद धोनी और सीएसके के लंबे समय से चले आ रहे संबंधों में तनाव आने के दावे किए जा रहे हैं। इन हालातों के बीच यह भी स्पष्ट नहीं है कि धोनी भविष्य में एक खिलाड़ी के तौर पर सीएसके की पीली जर्सी में दोबारा नजर आएंगे या नहीं। उल्लेखनीय है कि IPL 2025 के मेगा ऑक्शन से पहले चेन्नई सुपर किंग्स ने धोनी को 4 करोड़ रुपये में रिटेन किया था। लेकिन गंभीर चोट के चलते वह IPL 2026 के एक भी मुकाबले में मैदान पर नहीं उतर सके थे। ऐसे में आने वाले सीजनों में उनकी सक्रिय भागीदारी पर सवालिया निशान बरकरार हैं।



















