जापान में होने वाले एशियन गेम्स में भारतीय क्रिकेट टीम के ठहरने की व्यवस्था को लेकर उठा विवाद अब भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) की सफाई के बाद और चर्चा में आ गया है. आईओए ने बीसीसीआई को दो टूक कह दिया है कि क्रिकेटरों के लिए अलग से आवास की मांग वह खुद नहीं करेगा, हालांकि बोर्ड चाहे तो अपने स्तर पर अलग इंतजाम कर सकता है. आईओए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रघुराम अय्यर ने यह जानकारी सार्वजनिक तौर पर दी है.
अलग होटल चाहिए तो पूरा खर्च और जिम्मेदारी बीसीसीआई की
अय्यर ने साफ किया कि अगर बीसीसीआई तय करता है कि उसके खिलाड़ियों को आइची-नागोया में एशियन गेम्स के लिए तय किए गए आधिकारिक होटलों से बाहर ठहरना चाहिए, तो इसके लिए होटल, खाना और ट्रांसपोर्ट का पूरा बंदोबस्त बोर्ड को खुद करना होगा. साथ ही यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी बीसीसीआई की होगी कि उसके खिलाड़ी समय पर मैदान तक पहुंचें. यानी बीसीसीआई अपनी अलग व्यवस्था बनाने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है, लेकिन उससे जुड़ी हर लॉजिस्टिक जिम्मेदारी भी उसी को उठानी पड़ेगी.
36 खेलों के हर खिलाड़ी के साथ एक जैसा बर्ताव, आईओए का रुख
अय्यर ने कहा कि आईओए की जिम्मेदारी एशियन गेम्स में शामिल 36 खेलों के पूरे भारतीय दल के साथ बराबर व्यवहार सुनिश्चित करना है, किसी एक खेल को अलग सुविधा देना उसकी नीति में शामिल नहीं है. उन्होंने बताया कि बीसीसीआई के सीईओ हेमांग अमीन ने उनसे संपर्क किया था और दोनों पक्षों के बीच इस मुद्दे पर विस्तार से बातचीत हो चुकी है. बीसीसीआई सुविधाओं का जायजा लेने के लिए जापान में अपनी एक एडवांस टीम भेजने पर भी विचार कर रहा है, और आईओए को इस पर कोई आपत्ति नहीं है. अय्यर के मुताबिक, अपने आकलन के बाद बीसीसीआई खुद तय कर सकता है कि वह आयोजकों की दी गई सुविधाएं इस्तेमाल करना चाहता है या अपने स्तर पर अलग बंदोबस्त करना चाहता है. उन्होंने जोर देकर कहा, "किसी को वीआईपी ट्रीटमेंट नहीं दिया जाता है." यानी आईओए हर खेल, हर एथलीट, हर कोच और पूरे प्रतिनिधिमंडल के लिए एक जैसा रवैया अपनाता है.
किस टीम को कौन सा होटल मिला, विवाद की असली वजह क्या
रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम को तीन सितारा एपीए होटल नागोया एकामाए में ठहराया जाएगा, जबकि महिला टीम के लिए चार सितारा मेइतेत्सु ग्रैंड होटल तय किया गया है. दोनों ही होटल उस पांच सितारा श्रेणी से एक पायदान नीचे हैं, जिसमें भारतीय खिलाड़ी आमतौर पर ठहरते आए हैं. इसके अलावा इन होटलों में ट्विन-शेयरिंग कमरों की व्यवस्था है, यानी दो खिलाड़ियों को एक ही कमरे में साथ रहना होगा, और यही बात विवाद की सबसे बड़ी वजह बनकर सामने आई है.
अभी तक बीसीसीआई की तरफ से इस मामले में आधिकारिक बयान नहीं आया है कि वह अलग होटल का विकल्प चुनेगा या आईओए द्वारा दी गई सुविधाओं के साथ ही आगे बढ़ेगा. एडवांस टीम की रिपोर्ट के बाद ही यह साफ होगा कि खिलाड़ी नागोया के इन्हीं होटलों में रुकेंगे या बोर्ड अपने खर्च पर वैकल्पिक इंतजाम करेगा.


















