लॉर्ड्स के मैदान पर खेले गए फाइनल में सोफी मोलिन्यूक्स की कप्तानी वाली ऑस्ट्रेलियाई महिला टीम ने इंग्लैंड को 7 विकेट से हराकर वुमेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026 का खिताब अपने नाम कर लिया। यह ऑस्ट्रेलिया का इस फॉर्मेट में रिकॉर्ड सातवां खिताब है। कंगारू टीम ने सबसे पहले 2010 में यह ट्रॉफी जीती थी और उसके बाद 2012, 2014, 2018, 2020 और 2023 में भी चैंपियन बनकर टी20 क्रिकेट में ऐसा दबदबा कायम किया, जिसके आसपास कोई दूसरी टीम नहीं पहुंच पाई। अब 2026 में भी खिताब जीतकर उन्होंने अपनी बादशाहत को और मजबूत कर दिया है और बाकी टीमों से अपना फासला और बढ़ा लिया है। दूसरी तरफ इंग्लैंड की टीम एक बार फिर अपनी दूसरी ट्रॉफी का सपना पूरा नहीं कर पाई। इंग्लैंड ने 2009 में अपना पहला और अब तक का इकलौता टी20 वर्ल्ड कप खिताब जीता था। उसके बाद वह चार बार फाइनल तक पहुंची, लेकिन हर बार उसे ऑस्ट्रेलिया के हाथों ही हार का सामना करना पड़ा। यानी लगातार चार बार इंग्लैंड का दूसरी ट्रॉफी का रास्ता ऑस्ट्रेलिया ने ही रोका है। मैदान पर मिली इस जीत के साथ साथ ऑस्ट्रेलिया की झोली में भारी भरकम इनामी राशि भी आई, और दिलचस्प बात यह रही कि नॉकआउट चरण में पहुंचने से पहले ही बाहर हो चुकीं भारत और पाकिस्तान की टीमों को भी अच्छा खासा मुनाफा हुआ।
चैंपियन बनते ही ऑस्ट्रेलिया को मिले 22.27 करोड़ रुपये
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद यानी आईसीसी ने इस बार वुमेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए कुल प्राइज मनी का बजट करीब 87.64 लाख डॉलर यानी लगभग 83.41 करोड़ रुपये रखा था। यह रकम पिछली बार की तुलना में 10 प्रतिशत ज्यादा है, जो साफ दिखाता है कि महिला क्रिकेट से जुड़ी कुल इनामी राशि हर सीजन में लगातार बढ़ रही है। खिताब जीतने वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम को इनाम के तौर पर करीब 23.40 लाख डॉलर मिले, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 22.27 करोड़ रुपये बैठते हैं। फाइनल में हारने के बावजूद इंग्लैंड की टीम भी खाली हाथ नहीं लौटी। उपविजेता रहने के एवज में उन्हें करीब 11.70 लाख डॉलर यानी लगभग 11.13 करोड़ रुपये की इनामी राशि दी गई, जो चैंपियन टीम को मिली रकम से ठीक आधी है।
बाकी टीमों के हिस्से में भी आया मोटा इनाम
आईसीसी के नियमों के तहत टूर्नामेंट में खेलने वाली सभी 12 टीमों को उनके प्रदर्शन से पहले ही एक न्यूनतम रकम मिलना तय था। हर टीम को कम से कम 2.47 लाख डॉलर यानी करीब 2.35 करोड़ रुपये देने का प्रावधान रखा गया था, चाहे वह टीम एक भी मैच जीते या नहीं। इस गारंटीड रकम के अलावा ग्रुप स्टेज में जीत दर्ज करने वाली हर टीम को हर जीत के बदले 31,154 डॉलर यानी करीब 29.64 लाख रुपये का अतिरिक्त बोनस दिया गया। जो टीमें लड़ते हुए सेमीफाइनल तक तो पहुंचीं लेकिन वहां हार गईं, उन्हें और भी ज्यादा रकम मिली। वेस्टइंडीज और साउथ अफ्रीका को सेमीफाइनल में हार का सामना करना पड़ा था, और दोनों टीमों को करीब 6.75 लाख डॉलर यानी लगभग 6.42 करोड़ रुपये इनाम के तौर पर मिले, जो ग्रुप स्टेज से बाहर होने वाली किसी भी टीम को मिली रकम से कहीं ज्यादा है।
ग्रुप स्टेज से बाहर होकर भी भारत-पाकिस्तान को मिला मुनाफा
भारत और पाकिस्तान की दोनों टीमें इस बार सेमीफाइनल में जगह नहीं बना पाईं और ग्रुप स्टेज से ही टूर्नामेंट से बाहर हो गईं। हालांकि इससे पहले भारतीय महिला टीम ने अपने ग्रुप मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए तीन मैच जीते थे। वहीं पाकिस्तान की टीम को पूरे ग्रुप चरण में सिर्फ नीदरलैंड्स के खिलाफ ही अपनी इकलौती जीत नसीब हुई। टूर्नामेंट से जल्दी बाहर होने के बावजूद, जब गारंटीड फीस और जीत के बोनस को जोड़ा गया तो दोनों ही टीमों पर पैसों की अच्छी बारिश हुई। सिर्फ टूर्नामेंट में हिस्सा लेने के लिए ही भारतीय टीम को करीब 2.35 करोड़ रुपये मिल गए थे। इसके बाद ग्रुप स्टेज में तीन मैच जीतने का बोनस अलग से 88.94 लाख रुपये के तौर पर उनके खाते में आया। इस तरह भारतीय टीम ने इस अकेले वर्ल्ड कप से कुल मिलाकर 3.23 करोड़ रुपये की कमाई कर ली। दूसरी तरफ पाकिस्तान की टीम भी घाटे में नहीं रही, सिर्फ एक जीत के बावजूद उसने भी इस टूर्नामेंट से कुल 2.64 करोड़ रुपये अपने नाम किए।











