बांग्लादेश के क्रिकेट इतिहास के सबसे महान खिलाड़ी माने जाने वाले शाकिब-अल-हसन आज अपने ही देश में भारी जनाक्रोश का सामना कर रहे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के शासनकाल के दौरान सत्ताधारी अवामी लीग के साथ उनके करीबी रिश्तों ने उनकी छवि को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। जिस खिलाड़ी को कभी पूरा बांग्लादेश अपना राष्ट्रीय नायक मानता था, वही अब हिंसा, कानूनी मुकदमों और देश से निर्वासन का सामना कर रहा है। अवामी लीग सरकार के पतन के बाद जनता का गुस्सा इस कदर भड़का कि उनके आवास को निशाना बनाकर पेट्रोल बम तक फेंके गए।
अगस्त 2024 का जनआंदोलन और वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस विवाद
अगस्त 2024 में बांग्लादेश की सड़कों पर भयंकर जनसैलाब और हिंसा का दौर देखने को मिला था। छात्रों और आम नागरिकों के उग्र विरोध प्रदर्शनों के दबाव में 78 साल की तात्कालिक प्रधानमंत्री शेख हसीना को 5 अगस्त को अपना पद छोड़कर भारत में शरण लेनी पड़ी। इस घटना के ठीक दो साल बाद, 5 अगस्त को शेख हसीना ने डिजिटल माध्यम से अपनी पहली वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया। दिल्ली से आयोजित इस डिजिटल कार्यक्रम में पूर्व क्रिकेट कप्तान शाकिब-अल-हसन के भी शामिल होने की घोषणा की गई थी। उस दौरान शाकिब कोलंबो में मौजूद थे और सीधे तौर पर नहीं जुड़ पाए, लेकिन इस प्रेस वार्ता में उनकी संभावित मौजूदगी की खबर फैलते ही बांग्लादेश में विरोध की नई लहर उठ खड़ी हुई। गुमराह और आक्रोशित भीड़ ने मागुरा स्थित उनके पैतृक घर पर हमला कर उसे आग के हवाले कर दिया।
राष्ट्रीय नायक से जनाक्रोश के केंद्र तक का सफर
आर्थिक तंगी, राजनीतिक अस्थिरता और प्राकृतिक आपदाओं से जूझते बांग्लादेश में शाकिब-अल-हसन एक समय उम्मीद और राष्ट्रीय गौरव का चेहरा हुआ करते थे। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का मान बढ़ाने वाले व्यक्तित्व के रूप में उनकी लोकप्रियता नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के बाद सबसे अधिक थी। हालांकि, क्रिकेट करियर के चरम पर रहते हुए ही साल 2023 में शाकिब ने अवामी लीग में शामिल होने का राजनीतिक फैसला लिया। अवामी लीग ने बांग्लादेश पर 15 वर्षों से अधिक समय तक एक सख्त व्यवस्था के तहत शासन किया था। जनता के एक बड़े वर्ग में इस शासन के खिलाफ असंतोष पनप रहा था, लेकिन शाकिब ने शेख हसीना के साथ अपनी नजदीकियों का सार्वजनिक रूप से खुलकर प्रदर्शन किया। वे अपनी और अपने परिवार की तस्वीरें पूर्व प्रधानमंत्री के साथ लगातार साझा करते रहे, जिससे आम लोगों के बीच उनकी साख गिरती चली गई। शेख हसीना के हालिया बयानों पर अंतरिम सरकार के प्रतिनिधि तारिक रहमान ने भी कड़ी आपत्ति जताई थी और इसे अपमानजनक करार दिया था।
मागुरा की गलियों से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के शिखर तक
शाकिब-अल-हसन का जन्म साल 1987 में ढाका से लगभग 170 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित मागुरा जिले के एक साधारण परिवार में हुआ था। उन्होंने 2004 में डिविजनल क्रिकेट से अपने करियर की शुरुआत की और 2006 में बांग्लादेश की राष्ट्रीय टीम के लिए अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया। बाएं हाथ के इस बेहतरीन ऑलराउंडर ने लगभग दो दशकों के अपने करियर में 447 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले। इन मैचों में उन्होंने 14,730 रन बनाने के साथ-साथ 712 विकेट भी अपने नाम किए। उन्हें निस्संदेह बांग्लादेश का अब तक का सबसे महान क्रिकेटर माना जाता है। खेल के मैदान पर सफलता हासिल करने के साथ ही शाकिब ने सोने के कारोबार समेत कई व्यावसायिक क्षेत्रों में अपना विस्तार किया था। लेकिन राजनीति में एक विशिष्ट पक्ष चुनकर उन्होंने उस जनभावना की अनदेखी की, जो तत्कालीन सरकार के खिलाफ थी।
2024 का विवादित चुनाव और अमेरिका में निर्वासन
साल 2024 के आम चुनावों में शाकिब-अल-हसन ने अवामी लीग के टिकट पर चुनाव लड़ा और सांसद बने। इस चुनाव को विपक्षी दलों और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों द्वारा एकतरफा और धांधली से भरा हुआ माना गया था। शेख हसीना की सरकार के तख्तापलट के बाद अवामी लीग के हजारों कार्यकर्ताओं और शीर्ष नेताओं की तरह शाकिब को भी देश छोड़ना पड़ा। वर्तमान में वे अमेरिका में रह रहे हैं। मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और जनभावनाओं को देखते हुए यह लगभग तय है कि शाकिब अब कभी बांग्लादेश की राष्ट्रीय जर्सी में मैदान पर नहीं उतर पाएंगे। देश की आम जनता भी उनके खेल में लौटने के सख्त खिलाफ है।
वित्तीय हेरफेर और संगीन मुकदमों की जांच
शेख हसीना सरकार के सत्ता से हटते ही शाकिब-अल-हसन की कानूनी मुश्किलें बेहद बढ़ गई हैं। बांग्लादेश के भ्रष्टाचार निरोधक आयोग (ACC) ने शाकिब, उनकी मां शिरीन अख्तर और 13 अन्य व्यक्तियों के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं की जांच शुरू कर दी है। उन पर शेयर बाजार में हेरफेर, धोखाधड़ी, गबन और मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोप दर्ज हैं। इसके अलावा शाकिब पर चेक बाउंस से जुड़े मामले भी चल रहे हैं। हिंसक प्रदर्शनों के दौरान छात्र आंदोलनकारियों की हत्या से जुड़े मामलों में भी उनके पिता और अन्य सहयोगियों के नाम सामने आए हैं।
शेख हसीना पर मृत्युदंड का फैसला और स्वदेश वापसी की घोषणा
दूसरी तरफ, भारत में रह रहीं पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने बुधवार को सार्वजनिक बयान जारी करते हुए दिसंबर में बांग्लादेश लौटने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि चाहे उन्हें जेल भेजा जाए या मृत्युदंड दिया जाए, वे देश में विकास, धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र की पुनर्स्थापना के लिए वापस आएंगी। उल्लेखनीय है कि नवंबर 2025 में ढाका के एक विशेष न्यायाधिकरण ने 2024 के छात्र प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा को मानव जाति के खिलाफ अपराध करार देते हुए शेख हसीना को उनकी अनुपस्थिति में मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। इस अदालती फैसले के बाद से बांग्लादेश की वर्तमान सरकार लगातार भारत से शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर रही है।



















