श्रीलंका और भारत के बीच खेले जा रही दो टेस्ट मैचों की श्रृंखला के शुरुआती मुकाबले में भारतीय टीम बेहद मजबूत स्थिति में पहुंच चुकी है। खेल के शुरुआती दो दिनों में शानदार प्रदर्शन के बाद अब तीसरे दिन की शुरुआत होने जा रही है। टेस्ट क्रिकेट में तीसरा दिन मुकाबले का रुख तय करने के लिए बेहद निर्णायक माना जाता है। इस पड़ाव पर जो टीम बेहतर खेल दिखाती है, उसका दबदबा मुकाबले पर पूरी तरह से कायम हो जाता है। ऐसे में आज भारतीय टीम खास रणनीति के साथ मैदान में उतरेगी ताकि इस मुकाबले में अपनी पकड़ को और मजबूत किया जा सके।
500 रन के आंकड़े को छूने की चुनौती
दूसरे दिन का खेल समाप्त होने तक भारतीय टीम ने अपनी पहली पारी में 9 विकेट के नुकसान पर 460 रन बना लिए हैं। फिलहाल क्रीज पर कुलदीप यादव 12 रन और प्रसिद्ध कृष्णा 1 रन बनाकर डटे हुए हैं। सोमवार को तीसरे दिन का खेल शुरू होने पर भारतीय टीम का प्राथमिक लक्ष्य स्कोरबोर्ड पर 500 रन का आंकड़ा पूरा करना होगा। भारत को इस माइलस्टोन तक पहुंचने के लिए अब भी 40 अतिरिक्त रनों की जरूरत है। टेस्ट क्रिकेट में 500 रन का स्कोर मनोवैज्ञानिक रूप से काफी महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इतना बड़ा लक्ष्य सामने देखकर विरोधी टीम दबाव में आ जाती है। हालांकि, निचले क्रम के इन दोनों बल्लेबाजों के लिए 40 रनों की यह साझेदारी बनाना आसान नहीं होगा, क्योंकि श्रीलंकई गेंदबाज बचे हुए अंतिम विकेट को जल्द से जल्द चटकाने का प्रयास करेंगे।
श्रीलंका को जल्द समेटकर बड़ी बढ़त हासिल करने का लक्ष्य
भारतीय पारी समाप्त होते ही श्रीलंकई टीम को अपनी पहली पारी की बल्लेबाजी के लिए उतरना होगा। इसके बाद मुकाबला पूरी तरह से भारतीय गेंदबाजों के पाले में चला जाएगा। टीम प्रबंधन और कप्तान की कोशिश यही रहेगी कि अपने गेंदबाजों के दम पर श्रीलंकई बल्लेबाजों को जल्द से जल्द पवेलियन वापस भेजा जाए। यदि भारतीय गेंदबाज श्रीलंकई टीम को कम स्कोर पर आउट करने में सफल रहते हैं, तो पहली पारी के आधार पर भारत को एक विशाल और निर्णायक बढ़त हासिल हो जाएगी। जितनी तेजी से भारतीय गेंदबाज विकेट हासिल करेंगे, मैच पर भारत का नियंत्रण उतना ही मजबूत होता जाएगा।
देवदत्त पडिक्कल का शानदार शतक और राहुल-जुरेल के अर्धशतक
इस मुकाबले में अब तक भारतीय बल्लेबाजी का मुख्य आकर्षण देवदत्त पडिक्कल की बेहतरीन पारी रही है। देवदत्त पडिक्कल ने अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाते हुए 230 गेंदों का सामना किया और 167 रनों की जबरदस्त शतकीय पारी खेली। उनकी इस पारी ने भारतीय टीम को एक मजबूत आधार प्रदान किया। देवदत्त पडिक्कल के अलावा ऊपरी और मध्य क्रम के अन्य बल्लेबाजों ने भी उपयोगी योगदान दिया। केएल राहुल ने धैर्यपूर्वक बल्लेबाजी करते हुए 82 रनों की महत्वपूर्ण पारी खेली, जबकि ध्रुव जुरेल ने 51 रनों का योगदान देकर टीम के स्कोर को 450 के पार पहुंचाने में मदद की। शुरुआती दो दिनों में भारतीय बल्लेबाजों ने अपना काम पूरी तरह से कर दिया है और अब पूरी जिम्मेदारी गेंदबाजों के कंधों पर है।



















