गॉल में खेले जा रहे पहले टेस्ट मैच के दूसरे दिन भारतीय टीम ने श्रीलंका के खिलाफ अपनी स्थिति बेहद मजबूत कर ली है। दिन का खेल खत्म होने तक भारत ने पहली पारी में 9 विकेट खोकर 460 रनों का विशाल स्कोर बना लिया। इस पारी को मजबूत आधार देने में युवा विकेटकीपर बल्लेबाज ध्रुव जुरेल की अहम भूमिका रही, जिन्होंने 68 गेंदों में 51 रनों की आक्रामक और संयमित अर्धशतकीय पारी खेली। मुकाबला खत्म होने के बाद जब पत्रकारों से बातचीत हुई, तो इस 25 वर्षीय खिलाड़ी ने अपनी इस पारी, टीम मैनेजमेंट के रुख और मैच की रणनीतियों पर खुलकर अपने विचार साझा किए।
टीम प्रबंधन का विश्वास और दबाव से मुक्ति
मुकाबले के बाद ध्रुव जुरेल ने स्पष्ट किया कि पिछली 7 पारियों से कोई अर्धशतक न जमा पाने के बावजूद उन पर किसी तरह का कोई मानसिक दबाव नहीं था। उन्होंने बताया कि इस कठिन चरण के दौरान मुख्य कोच गौतम गंभीर और कप्तान शुभमन गिल ने उन पर पूरा भरोसा बनाए रखा और उनका मनोबल लगातार बढ़ाया। जुरेल के अनुसार, जब भी उनकी बातचीत कप्तान या कोच से होती है, तो व्यक्तिगत आंकड़ों के बजाय मैच की तात्कालिक स्थिति और टीम की जरूरतों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।
मैदान पर उतरते समय अपनी सोच को लेकर जुरेल ने कहा कि वह कभी भी किसी निजी उपलब्धि या व्यक्तिगत रिकॉर्ड के बारे में विचार नहीं करते। उनका प्राथमिक उद्देश्य केवल वही काम करना होता है जिसकी मांग टीम उस समय कर रही होती है। उन्होंने कहा, "सच कहूं तो मुझ पर कोई दबाव नहीं था, मेरे लिए सबसे बड़ा सम्मान यही है कि मैं देश के लिए खेल रहा हूं।" राष्ट्रीय टीम का प्रतिनिधित्व करने को उन्होंने अपने करियर का सबसे बड़ा गौरव बताया और कहा कि वे खुद को बेहद भाग्यशाली मानते हैं कि उन्हें भारत के लिए खेलने का अवसर प्राप्त हुआ है।
गॉल की परिस्थितियों से तालमेल और पूर्व अनुभव
इस टेस्ट श्रृंखला की शुरुआत से पहले मिले अनुभवों को जुरेल ने अपनी सफलता का एक प्रमुख कारण माना। भारतीय टीम इस दौरे के लिए तय समय से 10 दिन पहले ही श्रीलंका पहुंच गई थी। गॉल टेस्ट से पहले टीम ने कोलंबो में गहन अभ्यास किया था। इसके अतिरिक्त, मुख्य सीरीज से ठीक पहले जुरेल भारत ए टीम की ओर से गॉल के इसी मैदान पर मुकाबला खेल चुके थे।
उन्होंने बताया कि गॉल में टीम ने 4 से 5 अभ्यास सत्रों में हिस्सा लिया था। ऐसे ट्रैक पर जितना अधिक समय बल्लेबाजी में बिताया जाए, परिस्थितियों को समझना उतना ही आसान हो जाता है। भारत ए के मैचों और अभ्यास सत्रों के माध्यम से उन्हें यहां के मौसम, पिच के मिजाज और सतह के व्यवहार को करीब से परखने का मौका मिला। जुरेल के अनुसार, इस पूर्व अनुभव ने उनकी तकनीक में सुधार लाने और क्रीज पर आत्मविश्वास के साथ टिके रहने में बहुत मदद की।
बारिश के बाद की रणनीति और देवदत्त पडिक्कल की सराहना
दूसरे दिन का खेल बारिश और गीली आउटफील्ड की वजह से काफी बाधित रहा, जिसके कारण दो महत्वपूर्ण सत्र पूरी तरह से धुल गए। खेल दोबारा शुरू होने पर भारतीय ड्रेसिंग रूम का लक्ष्य बोर्ड पर अधिक से अधिक रन जोड़ना था। हालांकि, जुरेल ने स्पष्ट किया कि योजना पहली ही गेंद से अंधाधुंध बड़े शॉट खेलने की नहीं थी। टीम का ध्यान समझदारी भरा क्रिकेट खेलने, निचले क्रम के बल्लेबाजों के साथ मजबूत साझेदारियां बनाने और पारी को मजबूती देने पर केंद्रित था।
इसके साथ ही जुरेल ने अपने साथी खिलाड़ी देवदत्त पडिक्कल की 167 रनों की शानदार पारी की भी जमकर तारीफ की। पडिक्कल ने इससे पहले भारत ए के लिए भी बेहतरीन रन बनाए थे और उसी लय को मुख्य राष्ट्रीय टीम में भी बरकरार रखा। जुरेल ने कहा कि जब भी पडिक्कल को मौका मिलता है, वे उसे बड़े स्कोर में बदलते हैं। एक ड्रेसिंग रूम साथी के रूप में पडिक्कल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस तरह का उत्कृष्ट प्रदर्शन करते देखना बेहद प्रेरणादायक और खुशी देने वाला अनुभव है।
तीसरे दिन की गेंदबाजी योजना और 20 विकेट का लक्ष्य
मैच के तीसरे दिन की परिस्थितियों का आकलन करते हुए भारतीय विकेटकीपर का मानना है कि गॉल की पिच अब भी बल्लेबाजों के लिए काफी अनुकूल बनी हुई है। ऐसे में भारतीय गेंदबाजों को विपक्षी टीम पर दबाव बनाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि जिस तरह श्रीलंका के गेंदबाजों ने लंबे स्पेल फेंके, उसी तरह भारतीय तेज गेंदबाजों और स्पिनरों को भी लंबे स्पेल डालने के लिए तैयार रहना होगा।
जुरेल ने गेंदबाजी की रणनीति पर बात करते हुए कहा कि सफलता का कोई जटिल फॉर्मूला नहीं है। भारतीय आक्रमण को केवल सही लाइन और लेंथ पर लगातार गेंदबाजी करनी होगी और चीजों को जितना हो सके सरल रखना होगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि टेस्ट मैच जीतने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ मैदान पर उतरना होगा और श्रीलंकाई टीम के सभी 20 विकेट चटकाने के लक्ष्य को हासिल करना होगा।



















